केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश को सरसों की खरीद में भावांतर भुगतान योजना (बीबीवाई) का लाभ देने को मंजूरी दे दी है। यह योजना सोयाबीन के लिए लाई गई थी और अब केंद्र ने सरसों के लिए इसका विस्तार करने के मध्य प्रदेश सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बीच दिल्ली में आज हुई बैठक में इस योजना का विस्तार सरसों के लिए करने का फैसला किया गया। जब किसी जिंस का बाजार भाव सरकार के मानक स्तर से नीचे चला जाता है तो किसानों को उस घाटे की भरपाई भावांतर योजना के तहत की जाती है। इसमें किसानों को खुले बाजार में बिक्री की अनुमति होती है और अंतर की भरपाई सरकार सीधे किसानों को करती है।
इस योजना का विस्तार सरसों तक करने से तिलहन उत्पादकों को राहत मिलने की उम्मीद है। इससे कि सानों के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। मध्य प्रदेश पहले राज्यों में से है, जिसने भावांतर भुगतान योजना शुरू की थी। 2017 में यह योजना शिवराज चौहान के शासनकाल में सोयाबीन के लिए लागू हुई थी।
इसके बाद मौजूदा मोहन यादव सरकार ने योजना को कुछ बदले मानकों के साथ फिर से पेश किया। इस तरह से मध्य प्रदेश कुछ ऐसे बड़े कृषि राज्यों में शामिल हो गया है, जो 2 प्रमुख फसलों के लिए भावांतर भुगतान करने की तैयारी में है।
राजस्थान और उत्तर प्रदेश के बाद मध्य प्रदेश देश का प्रमुख सरसों उत्पादक राज्य है।
2026 सीजन की सरसों की नई फसल बाजार में आनी शुरू हो गई है। प्रमुख मंडियों में सरसों की नई फसल की कीमत 5,950 रुपये प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम है। आधिकारिक बयान के मुताबिक बैठक के दौरान चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसानों को तेज भुगतान सुनिश्चित किया जाए, जिससे उन्हें बगैर देरी के मुआवजा मिल सके।