दिल्ली सरकार के खाद्य, आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में जरूरी सामान की आपूर्ति मांग से ज्यादा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए दिल्ली पुलिस ने शहर के 22 स्थानों पर छापेमारी की। इस दौरान उत्तर रोहिणी थाने में एक मामला दर्ज किया गया, जहां अवैध रूप से रखे गए छह सिलेंडर बरामद हुए।
उन्होंने यह भी बताया कि शिकायतों के लिए 011-23379836 नंबर के साथ एक कंट्रोल रूम बनाया गया है। यहां आने वाली हर शिकायत पर नजर रखी जा रही है, ताकि जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्ती से कार्रवाई की जा सके।
दिल्ली में कमर्शियल LPG पर सख्ती, PNG कनेक्शन जरूरी
दिल्ली सरकार ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई को लेकर नियम कड़े कर दिए हैं। अब जिन इलाकों में पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG की सुविधा उपलब्ध है, वहां व्यवसायों को एलपीजी लेने के लिए PNG कनेक्शन लेना या उसके लिए आवेदन करना अनिवार्य होगा।
खाद्य, आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के विभाग ने 2 अप्रैल को इस संबंध में आदेश जारी किया है। इसके तहत कमर्शियल और औद्योगिक उपभोक्ताओं को एलपीजी सप्लाई तभी मिलेगी, जब वे संबंधित ऑयल मार्केटिंग कंपनी में पंजीकृत हों और PNG कनेक्शन के लिए आवेदन कर चुके हों।
सरकार के अनुसार जिन क्षेत्रों में अभी PNG नेटवर्क नहीं पहुंचा है, वहां उपभोक्ताओं को यह लिखकर देना होगा कि जैसे ही सुविधा उपलब्ध होगी, वे PNG पर शिफ्ट हो जाएंगे।
अधिकारियों ने बताया कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियां दस्तावेजों की कम से कम एक बार जांच करेंगी ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके। जिन उपभोक्ताओं ने PNG अपनाने की इच्छा जताई है, उनकी जानकारी इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड को भी दी जाएगी, ताकि आगे की प्रक्रिया पूरी की जा सके।
सरकार ने वाणिज्यिक गैस उपभोक्ताओं को लेकर नया निर्देश जारी किया है। आदेश में कहा गया है कि तेल विपणन कंपनियां यानी ओएमसी समय-समय पर उपभोक्ताओं से जरूरी दस्तावेज जरूर लें। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि संबंधित उपभोक्ता कंपनी में पंजीकृत है और उसने पाइप्ड नेचुरल गैस यानी पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन किया है या उपलब्ध होने पर इसे लेने की इच्छा जताई है।
आदेश में कारोबारियों को कुछ राहत भी दी गई है। जिन व्यवसायों को अपने काम के लिए पीएनजी के साथ एलपीजी की भी जरूरत है, वे विभाग के अतिरिक्त आयुक्त को आवेदन दे सकते हैं। इसमें उन्हें अपनी जरूरत का कारण बताना होगा। ऐसे मामलों पर फैसला तीनों ओएमसी के साथ चर्चा के बाद लिया जाएगा।
साथ ही यह भी कहा गया है कि ओएमसी खुद भी ऐसे आवेदन एकत्र कर अतिरिक्त आयुक्त को भेज सकती हैं, ताकि जल्दी निर्णय लिया जा सके। अतिरिक्त आयुक्त को निर्देश दिया गया है कि वह इन मामलों का निपटारा प्राथमिकता के आधार पर करें और इसमें तीनों तेल कंपनियों से सलाह लें।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि 26 मार्च को जारी नीति और उसके बाद जारी परिशिष्ट में बाकी सभी नियम पहले की तरह ही लागू रहेंगे।