ओडिशा सरकार ने सोमवार को देश के सबसे बड़े खेलों से जुड़े बुनियादी ढांचे में से एक के विकास के लिए 5,000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश करने की बड़ी महत्वाकांक्षी योजना पर काम करने की घोषणा की। इसके तहत भुवनेश्वर के बाहरी इलाके में एक विशाल स्पोर्ट्स वैली बनाई जाएगी और राज्य के हर प्रखंड में आधुनिक बहुउद्देशीय स्टेडियम बनाए जाएंगे।
राज्य के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि सरकार ओडिशा के सभी 314 प्रखंडों में आधुनिक सुविधाओं वाले बहुउद्देशीय स्टेडियम बनाने के लिए लगभग 4,124 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इसके अलावा, भुवनेश्वर के बाहरी क्षेत्र गोठापटणा में लगभग 1,000 करोड़ रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक खेल परिसर और विश्वस्तरीय स्टेडियम बनाए जाएंगे।
प्रस्तावित खेल परिसर, भुवनेश्वर न्यू सिटी परियोजना के तहत गोठापटणा में लगभग 150 एकड़ क्षेत्र में तैयार की जाने वाली बड़ी स्पोर्ट्स वैली का हिस्सा होगा। अधिकारियों के अनुसार, प्रस्तावित नया स्टेडियम आकार, क्षमता और दर्शकों के लिए उपलब्ध सुविधाओं के मामले में कलिंगा स्टेडियम से भी बड़ा और अधिक आधुनिक हो सकता है।
मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार के दो वर्ष का कार्यकाल के पूरा होने के मौके पर अपनी उपलब्धियां गिनाते हुए कहा, ‘ओडिशा देश का पहला ऐसा राज्य बन रहा है जो खिलाड़ियों की पहचान, प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं और खेल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इतना बड़ा निवेश कर रहा है। यह नया खेल परिसर देश की सबसे आधुनिक खेल सुविधाओं में से एक होगा और ओडिशा को खेलों का प्रमुख केंद्र बनाने में मदद करेगा।’
अधिकारियों के मुताबिक स्पोर्ट्स वैली में कई अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं होंगी जिनमें साइक्लिंग के लिए विशेष साइकिल ट्रैक, तीरंदाजी स्टेडियम, विभिन्न खेलों के लिए उच्च-प्रदर्शन प्रशिक्षण केंद्र, 5 किलोमीटर लंबा फिटनेस ट्रैक, खिलाड़ियों के प्रशिक्षण की आधुनिक सुविधाएं और एक खुले मंच वाला सभागार शामिल है। खेल से जुड़े बुनियादी ढांचे के विस्तार से ओडिशा के खेल छात्रावासों और प्रशिक्षण केंद्रों को और मजबूती मिलेगी जिन संस्थानों ने एथलेटिक्स, हॉकी, वेटलिफ्टिंग, फुटबॉल, रग्बी और अन्य खेलों में कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी तैयार किए हैं।
खेल एवं युवा सेवा मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने कहा कि यह नई सुविधा जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं के विकास और अंतरराष्ट्रीय/उच्च स्तरीय प्रतियोगिताओं के बीच की दूरी को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा, ‘राज्य के खेल छात्रावासों से निकलने वाले खिलाड़ियों को आधुनिक स्तर के अनुभव और विशेष प्रशिक्षण की जरूरत होती है। स्पोर्ट्स वैली उन्हें विश्वस्तरीय सुविधाएं और उच्च स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के अवसर देगी।’
करीब 4,124 करोड़ रुपये के इस खेल बुनियादी ढांचा कार्यक्रम के तहत, राज्य के हर प्रखंड में गुणवत्तापूर्ण खेल सुविधाएं तैयार की जाएंगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों तक संगठित खेलों की पहुंच बढ़ेगी। यह पहल व्यवस्थित तरीके से प्रतिभाओं के विकास का एक तंत्र बनाने में मदद करेगी, जिससे युवा खिलाड़ियों को आधुनिक मैदान, कोचिंग सुविधाएं और प्रतियोगिता के अवसर अपने ही क्षेत्र में मिलेंगे और उन्हें बड़े शहरों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
ओडिशा 2018 में हॉकी इंडिया के साथ साझेदारी करके पुरुष और महिला राष्ट्रीय हॉकी टीमों को प्रायोजित करने वाला भारत का पहला राज्य बना था। यह प्रायोजन अब 2036 तक बढ़ा दिया गया है। राज्य सरकार ने राउरकेला में 20,000 दर्शकों की क्षमता वाला बिरसा मुंडा अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम 262 करोड़ रुपये की लागत से बनाया है। इसके अलावा, कलिंगा स्टेडियम और भुवनेश्वर की अन्य खेल सुविधाओं को आधुनिक बनाने पर 430 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं।
ओडिशा ने कई बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी की है, जिनमें 2018 और वर्ष 2023 में पुरुषों का हॉकी वर्ल्ड कप का आयोजन शामिल हैं। ओडिशा ऐसा पहला स्थान बना जिसने इस टूर्नामेंट के लगातार दो संस्करणों की मेजबानी की। इन सफल आयोजनों ने राज्य की खेल के बुनियादी ढांचे और आयोजन क्षमता प्रबंधन को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई।
हॉकी के अलावा, राज्य ने प्रमुख खेल संस्थानों के साथ साझेदारी करके एथलेटिक्स, बैडमिंटन, वेटलिफ्टिंग, तैराकी, फुटबॉल, शूटिंग और अन्य खेलों के लिए प्रदर्शन केंद्र विकसित किए हैं। इन केंद्रों में खिलाड़ियों को खेल विज्ञान, पोषण, फिजियोथेरेपी और अंतरराष्ट्रीय स्तर की कोचिंग की सुविधाएं मिलती हैं। पिछले वर्ष वर्ल्ड एथलेटिक्स कॉन्टिनेंटल टुअर ब्रॉन्ज की मेजबानी के बाद, ओडिशा को अब अगस्त में उससे बड़े स्तर के वर्ल्ड एथलेटिक्स कॉन्टिनेंटल टुअर सिल्वर के आयोजन की मेजबानी के लिए चुना गया है।
राज्य 2028 में दो बड़े अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स आयोजनों, वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप और एशियन इनडोर एथलेटिक्स चैंपियनशिप की भी तैयारी कर रहा है। जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री ट्रॉफी कार्यक्रम का विस्तार करने का निर्णय लिया है। इस पहल के तहत ग्रामीण क्षेत्रों से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान की जाएगी।