Petrol, Diesel price: पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 25 से 28 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी की खबरों ने बाजार और आम लोगों के बीच हलचल मचा दी। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि कुछ राज्यों चुनाव खत्म होने के बाद ईंधन के दामों में बड़ा उछाल आ सकता है। यह अनुमान अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और घरेलू कीमतों के बीच बढ़ते अंतर पर आधारित था, जिससे तेल कंपनियों पर भारी दबाव पड़ रहा है।
हालांकि, इन अटकलों के बीच सरकार ने तुरंत स्थिति साफ की। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 25 से 28 रुपये की बढ़ोतरी का कोई प्रस्ताव नहीं है। मंत्रालय ने ऐसी खबरों को गलत बताते हुए कहा कि इस तरह का कोई फैसला विचाराधीन नहीं है।
दरअसल, वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। इससे घरेलू ईंधन कीमतों और अंतरराष्ट्रीय लागत के बीच अंतर बढ़ गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस अंतर के कारण तेल विपणन कंपनियों को हर महीने भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
इसके बावजूद सरकार फिलहाल कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश कर रही है, ताकि महंगाई पर असर न पड़े और आम उपभोक्ताओं को राहत मिल सके। कुल मिलाकर, फिलहाल पेट्रोल-डीजल के दामों में अचानक बड़ी बढ़ोतरी की कोई आधिकारिक योजना नहीं है, लेकिन वैश्विक हालात को देखते हुए आगे की दिशा पर नजर रखना जरूरी रहेगा।
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हो सकती है। यह बढ़ोतरी चल रहे विधानसभा चुनावों के खत्म होने के बाद देखने को मिल सकती है। चुनाव 29 अप्रैल को समाप्त होंगे।
कोटक के अनुसार, कच्चे तेल की लागत और खुदरा कीमतों के बीच बढ़ते अंतर का बोझ रिफाइनरी कंपनियों पर तेजी से बढ़ रहा है। यह बोझ हर महीने करीब 7,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह स्थिति लंबे समय तक टिकाऊ नहीं है। 25 से 28 रुपये प्रति लीटर की संभावित बढ़ोतरी का अनुमान कच्चे तेल की कीमत लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल के आधार पर लगाया गया है। यह मौजूदा बाजार स्थिति को दर्शाता है।
इस स्तर पर उत्पादन और आयात की लागत और उपभोक्ताओं से वसूली जा रही कीमत के बीच अंतर बहुत ज्यादा हो गया है। इसे लंबे समय तक नजरअंदाज करना संभव नहीं है। हालांकि, इतनी बड़ी बढ़ोतरी एक बार में होने की संभावना कम है। कीमतों में बढ़ोतरी धीरे-धीरे की जा सकती है। यह कई हफ्तों या महीनों में चरणबद्ध तरीके से लागू हो सकती है। इससे महंगाई पर असर को नियंत्रित किया जा सकेगा। साथ ही रिफाइनरी कंपनियों के बढ़ते नुकसान को भी सीमित किया जा सकेगा।