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नई दिल्ली में जुटे क्वाड देशों के विदेश मंत्री, हिंद प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और समुद्री निगरानी बढ़ाने पर बनी सहमति

नई दिल्ली में क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में चीन की आर्थिक जबरदस्ती के खिलाफ दुर्लभ खनिजों और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की समुद्री सुरक्षा बढ़ाने के लिए नई पहलों की घोषणा की गई

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अर्चिस मोहन   
Last Updated- May 26, 2026 | 10:29 PM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की सरकार द्वारा चीन  के साथ संबंधों को फिर से संतुलित करने की कोशिशों के बीच चतुष्पक्षीय सुरक्षा संवाद क्वाड के भविष्य की प्रासंगिकता को लेकर चिंता के बावजूद चार सदस्यीय समूह के विदेश मंत्रियों ने आज संदेश दिया कि यह समूह जीवंत बना हुआ है और अमेरिका की इसमें व्यापक दिलचस्पी है।

बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में क्वाड के विदेश मंत्रियों ने होर्मुज स्ट्रेट और लाल सागर के माध्यम से नौवहन की सुगमता पर जोर दिया, वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों की निंदा की और जहाजों से टोल वसूलने का विरोध किया। उन्होंने पूर्वी चीन सागर और दक्षिण चीन सागर के विवादित क्षेत्रों में सैन्यीकरण पर गंभीर चिंता व्यक्त की। यह इस बात का प्रमाण है कि क्वाड अपने मुख्य उद्देश्यों को पूरा कर रहा है। 

अमेरिका के विदेश मंत्री ने जापान, ऑस्ट्रेलिया और मेजबान भारत के विदेश मंत्रियों के साथ मिलकर ऊर्जा सुरक्षा और महत्त्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में समूह के सहयोग को मजबूत करने के लिए नई पहल शुरू की।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य सक्रियता को ध्यान में रखते हुए क्वाड के विदेश मंत्रियों ने घोषणा की कि यह समूह क्षेत्र में समुद्री निगरानी के लिए प्रौद्योगिकी को बढ़ाएगा, समुद्री केबलों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा और प्रमुख हिंद-प्रशांत गलियारों के लिए बंदरगाह बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा जिसकी शुरुआत फिजी में एक बंदरगाह के निर्माण से होगी।

दुर्लभ खनिज पहल के लिए क्वाड के भागीदार खनन, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण सहित आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ करने के लिए सरकारी और निजी क्षेत्र के सहयोग से 20 अरब डॉलर तक जुटाएंगे। क्वाड के विदेश मंत्रियों ने चीन के निर्यात नियंत्रण व्यवस्था का संकेत देते हुए ‘आर्थिक जबरदस्ती’ पर गंभीर चिंता व्यक्त की। चीन में वै​श्विक दुर्लभ पृथ्वी खनिज का लगभग 70 फीसदी है।

क्वाड बैठक के दौरान भारत और अमेरिका ने महत्त्वपूर्ण खनिजों की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने की खातिर सहयोग के लिए रूपरेखा पेश की। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने इसे अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी की ‘ठोस मिसाल’ बताया। यह ढांचा अमेरिका की पैक्स सिलिका पहल को जोड़ता है जिसमें भारत फरवरी में शामिल हुआ था। अमेरिका महत्त्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करने के लिए 30 अरब डॉलर जुटा रहा है। हिंद-प्रशांत ऊर्जा सुरक्षा पर क्वाड की पहल ऊर्जा और उर्वरकों की आपूर्ति में व्यवधान के बीच आई है। इस पहल के तहत 

क्वाड भागीदारों ने खुले और स्थिर ऊर्जा बाजार और लचीली तथा विविध आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करने के लिए साथ मिलकर काम करने का संकल्प लिया। 

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा पर घोषणाओं की व्याख्या करते हुए रूबियो ने कहा कि वैश्विक समुद्री व्यापार का 60 फीसदी हिंद-प्रशांत से होकर गुजरता है। विदेश मंत्री जयशंकर की अध्यक्षता में अमेरिकी विदेश मंत्री रूबियो, ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी आज सुबह नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में ​शिरकत की।

इसके बाद उन्होंने संयुक्त रूप से मीडिया को संबोधित किया। हालांकि इस बात पर अनिश्चितता बनी रही कि भारत इस साल क्वाड शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा या नहीं। क्वाड शिखर सम्मेलन भारत के अलावा किसी अन्य देश में या किसी अन्य बहुपक्षीय शिखर सम्मेलन के साथ आयोजित किया जा सकता है, पूछे जाने पर सरकार के अधिकारियों ने कहा कि विदेश मंत्री इसके स्थल और तारीख तय करेंगे।

ऑस्ट्रेलिया भारत से क्वाड की अध्यक्षता संभालने वाला है। भारत को 2024 में क्वाड शिखर सम्मेलन की मेजबानी करनी थी लेकिन यह उस वर्ष सितंबर में अमेरिका के डेलावेयर में आयोजित किया गया था क्योंकि जो बाइडन के कार्यकाल के अंतिम कुछ महीने बचे थे। 2025 में भारत में शिखर सम्मेलन नहीं हो सका।

उधर, पेइचिंग में चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा, ‘देशों के बीच सहयोग क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए सहायक होना चाहिए, न कि किसी तीसरे पक्ष को निशाना बनाने के लिए। हम विशिष्ट गुट बनाने या गुटों में टकराव में शामिल होने का विरोध करते हैं।’

विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव के नागराज नायडू ने कहा कि क्वाड का अस्तित्व इसलिए नहीं है कि हमें किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र और उसकी चिंता को दूर करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि क्वाड के भीतर भारत का ध्यान व्यावहारिक परियोजनाओं को वितरित करने पर रहा है, जैसे कि कोविड महामारी के दौरान क्षेत्र में भारत की सहायता, सौर परियोजनाओं को स्थापित करने में उसका काम और छात्रवृत्ति प्रदान करना। उन्होंने कहा कि क्वाड अपने विकासात्मक एजेंडे के दायरे का विस्तार कर रहा है।

First Published : May 26, 2026 | 10:29 PM IST