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रेयर अर्थ गलियारे को मिली गति, आंध्र प्रदेश ने बनाया व्यापक खाका

इस परियोजना में सरकार के साथ मिलकर काम कर रहे एक सलाहकार ने बताया कि मोनाजाइट को परमाणु ऊर्जा अधिनियम के तहत एक निर्धारित पदार्थ के रूप में वर्गीकृत किया गया है

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साकेत कुमार   
Last Updated- April 30, 2026 | 9:41 AM IST

आंध्र प्रदेश ने तटीय सैंड मिनरल्स, रेयर अर्थ और टाइटेनियम का एक पूरी तरह से एकीकृत इकोसिस्टम तैयार करने के लिए विस्तृत खाका पेश किया है। राज्य रेयर अर्थ के क्षेत्र में महत्त्वाकांक्षी कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। इसका लक्ष्य अगले दशक में 50,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश आकर्षित करना है, क्योंकि भारत रणनीतिक खनिजों और परमानेंट मैग्नेट के लिए चीन पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 के बजट में आंध्र प्रदेश, केरल, तमिलनाडु और ओडिशा सहित 4 तटीय राज्यों में रेयर अर्थ गलियारों के विकास को समर्थन करने की घोषणा की थी, जिसे देखते हुए आंध्र प्रदेश सरकार की यह घोषणा महत्त्वपूर्ण है।

राज्य के एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘राज्य सरकार अगले 10 वर्षों में खनन, खनिज पृथक्करण और तटीय सैंड मिनरल सेक्टर में मूल्य संवर्धन संयंत्रों में 50,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की परिकल्पना कर रही है।’

आंध्र प्रदेश सरकार एक समग्र रेयर अर्थ पॉलिसी बनाने पर भी तेजी से काम कर रही है। अधिकारी ने कहा, ‘इस नीति को कैबिनेट से मंजूरी मिलने की उम्मीद है और जून 2026 तक इसे अधिसूचित कर दिया जाएगा। इसके बाद राज्य सरकार राज्य के भीतर औद्योगिक पार्कों/रेयर अर्थ गलियारों को अधिसूचित करेगी और राज्य के भीतर एक एंड टु एंड औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के लिए प्रतिष्ठित कंपनियों के साथ साझेदारी करेगी।’

बिज़नेस स्टैंडर्ड ने फरवरी में ही खबर दी थी कि केरल ने प्रस्तावित 42,000 करोड़ रुपये के रेयर अर्थ गलियारे पर काम करने के चरण में पहुंच गया है और यह केंद्र के रणनीतिक खनिज पहल को संचालित करने वाला पहला राज्य बन गया है। मार्च में बिज़नेस स्टैंर्ड ने यह खबर भी प्रकाशित की थी कि परमाणु ऊर्जा विभाग ने 4 राज्यों में संभावित गलियारे के स्थलों की पहचान की है, जिसमें आंध्र प्रदेश में विजग-श्रीकाकुलम बेल्ट, केरल में कोच्चि-तिरुवनंतपुरम बेल्ट और ओडिशा में गोपालपुर शामिल हैं।

विशिष्ट औद्योगिक गलियारे

आंध्र प्रदेश अब सबसे मजबूत दावेदारों में से एक बनकर उभरा है, जिसने तटीय सैंड मिनरल्स, रेयर अर्थ और टाइटेनियम का पूरी तरह से एकीकृत इकोसिस्टम बनाने के उद्देश्य से एक विस्तृत खाका पेश किया है। इसका लक्ष्य एक ऐसा पूरी तरह से एकीकृत इकोसिस्टम बनाना है जिसमें माइनिंग, मिनरल सेपरेशन, रिफाइनिंग, मेटल और अलॉय का उत्पादन और रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट जैसे उच्च मूल्य वाले अंतिम उत्पादों का निर्माण शामिल हो।

राज्य अपने तट के साथ तीन विशेष औद्योगिक क्लस्टर की योजना बना रहा है। इनमें श्रीकाकुलम में एक टाइटेनियम पार्क, अनाकापल्ली में एक रेयर अर्थ कॉरिडोर और मछलीपट्टनम में एक एकीकृत टाइटेनियम और रेयर अर्थ पार्क शामिल हैं। इन क्लस्टरों का उद्देश्य खनन और खनिज पृथक्करण से लेकर रेयर अर्थ ऑक्साइड, मिश्र धातु, परमानेंट मैगनेट, टाइटेनियम डाइऑक्साइड पिगमेंट, टाइटेनियम स्पंज और टाइटेनियम धातु के उन्नत विनिर्माण तक, एक संपूर्ण घरेलू मूल्य श्रृंखला का निर्माण करना है।

यह कदम राज्य सरकार के लिए एक रणनीतिक दांव है। वैश्विक स्तर पर रेयर अर्थ प्रोसेसिंग और परमानेंट मैग्नेट बनाने के क्षेत्र में चीन का दबदबा है, जबकि भारत रेयर अर्थ मैग्नेट के लिए अभी भी काफी हद तक आयात पर ही निर्भर है। हाल में आपूर्ति में आई रुकावटों और निर्यात पर लगे नियंत्रणों के कारण भारत की विनिर्माण आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरियां सामने आई हैं। खासकर इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा क्षेत्रों में आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई है।

मोनाजाइट पर जोर

आंध्र प्रदेश इन रुकावटों के प्रति भारत की प्रतिक्रिया के केंद्र में खुद को स्थापित करने का एक अवसर देखता है। प्राकृतिक संसाधन होने के कारण राज्य की महत्त्वाकांक्षा को बल मिला है, क्योंकि आंध्र प्रदेश को भारत के सबसे समृद्ध मोनोजाइट वाले राज्यों में से एक माना जाता है।

राज्य ने 16 तटीय सैंड मिनरल भंडार को चिह्नित किया है, जो श्रीकाकुलम, विजयनगरम, विशाखापत्तनम, अंकपल्ली, कोनासीमा, काकीनाडा, पश्चिम गोदावरी और कृष्णा सहित तटीय जिलों के 16,604 हेक्टेयर में फैला है। इन भंडारों में इल्मेनाइट, रूटाइल, जिरकॉन, गार्नेट और मोनाजाइट जैसे महत्त्वपूर्ण खनिज पाए जाते हैं। विशेष रूप से मोनाजाइट रणनीतिक रूप से बहुत महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें ‘रेयर अर्थ एलिमेंट्स’ होते हैं, जिनका उपयोग परमानेंट मैग्नेट बनाने में किया जाता है। यह एक रेडियोधर्मी खनिज है, जो ‘परमाणु ऊर्जा अधिनियम’ के तहत विनियमित होता है। इसलिए निजी कंपनियां सीधे तौर पर मोनाजाइट वाले भंडारों के लिए खनन पट्टे प्राप्त नहीं कर सकतीं। इस समस्या को हल करने के लिए आंध्र प्रदेश ने एक अनूठा सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल तैयार किया है।

इस परियोजना में सरकार के साथ मिलकर काम कर रहे एक सलाहकार ने बताया कि मोनाजाइट को परमाणु ऊर्जा अधिनियम के तहत एक निर्धारित पदार्थ के रूप में वर्गीकृत किया गया है, इसलिए खनन पट्टे आंध्र प्रदेश खनिज विकास निगम (एपीएमडीसी) के पास ही रहने की उम्मीद है। वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार ऐसी साझेदारी संरचनाओं की तलाश कर रही है, जिनके जरिए निजी कंपनियां खनन और बाद के मूल्य संवर्धन में हिस्सा ले सकें।

First Published : April 30, 2026 | 9:41 AM IST