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रीपो रेट में कोई बदलाव नहीं, तटस्थ रुख बरकरार; वैश्विक अनिश्चितता और मुद्रास्फीति जोखिमों पर नजर

मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक के बाद आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने कहा, ‘युद्ध विराम को कुछ हद तक ध्यान में रखा गया है।’

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मनोजित साहा   
Last Updated- April 08, 2026 | 11:08 PM IST

अमेरिका-ईरान के बीच दो हफ्ते के संघर्ष विराम की घोषणा के कुछ ही घंटे बाद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की छह-सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति ने रीपो दर को 5.25 फीसदी पर अपरिवर्तित रखने की घोषणा की, साथ ही अपना तटस्थ रुख भी बरकरार रखा। मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक के बाद आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने कहा, ‘युद्ध विराम को कुछ हद तक ध्यान में रखा गया है।’

फरवरी से दिसंबर 2025 के बीच रीपो दर में 125 आधार अंक की कटौती करने के बाद से दो बैठकों में मौद्रिक नीति स​मिति ने नीतिगत दर को अपरिवर्तित रखा है। फरवरी में पिछली नीति के बाद से भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं काफी बढ़ गई हैं जिसे देखते हुए मल्होत्रा ने कहा कि मुद्रास्फीति बढ़ने का जो​खिम है और ऐसा मुख्य रूप से ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि के दबाव की वजह से होगा।

हालांकि मुख्य मुद्रास्फीति अभी भी कम बनी हुई है। साथ ही उन्होंने कहा कि आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के जोखिम के कारण भविष्य में मुद्रास्फीति की राह थोड़ी अनिश्चित हो गई है। मौद्रिक नीति समिति ने पहली बार मौद्रिक नीति वक्तव्य में मुख्य मुद्रास्फीति के अनुमान जारी किए हैं। चालू वित्त वर्ष के लिए समग्र मुद्रास्फीति 4.6 फीसदी और मुख्य मुद्रास्फीति 4.4 फीसदी रहने का अनुमान है।

वृद्धि के मोर्चे पर केंद्रीय बैंक का आकलन है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और आपूर्ति में आई अन्य बाधाओं के कारण ऊर्जा और अन्य जिंसों की बढ़ी हुई कीमतें 2026-27 में वृद्धि को प्रभावित कर सकती हैं। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 6.9 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है।

आरबीआई गवर्नर ने कहा, ‘संघर्ष का और बढ़ना और उसका बड़े इलाके में फैलना, वैश्विक वित्तीय बाजार में बढ़ती अस्थिरता तथा मौसम से जुड़ी घटनाएं घरेलू अर्थव्यवस्था की वृद्धि के अनुमान पर भारी पड़ रही हैं। मूल अनुमान के घटने का जोखिम बना हुआ है और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण अनिश्चितता का स्तर अभी भी ऊंचा बना हुआ है।’ उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान वित्त वर्ष 2026 के 7.6 फीसदी के अनुमान से कम है।

मल्होत्रा ​​ने कहा कि इसकी पूरी संभावना है कि निकट से मध्यम अवधि तक दरें कम बनी रहें लेकिन यह इस बात पर निर्भर करेगा कि हालात किस तरह रहते हैं। भारतीय स्टेट बैंक में ग्रुप मुख्य आ​र्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष ने कहा, ‘मौजूदा गवर्नर की अगुआई में एमपीसी की कुल 8 बैठकें हुई हैं और उनके 8 बयानों में से हमारी राय में यह बयान सबसे ज्यादा सतर्क हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि दरों में बढ़ोतरी जल्द होगी।’ घोष ने

एक नोट में कहा, ‘मौजूदा अनिश्चित वैश्विक माहौल को देखते हुए हम एक लंबे विराम की उम्मीद कर रहे हैं।’बार्कलेज के अर्थशास्त्री कहा कि निकट भविष्य में रीपो दर में कोई बढ़ोतरी होने की संभावना नहीं है।

बार्कलेज ने एक नोट में कहा, ‘मौद्रिक नीति समिति को पूरा यकीन है कि बढ़ती महंगाई असल में आपूर्ति में आई रुकावट का नतीजा है। हमें उम्मीद नहीं है कि वह जल्दबाजी में ब्याज दरें बढ़ाकर इस पर कोई प्रतिक्रिया देगी, खास तौर तब जब दो हफ्ते का युद्ध विराम कुछ राहत दे रहा है।’

मल्होत्रा ने स्वीकार किया कि वित्त वर्ष 2026 में रुपया पिछले वर्षों के औसत से ज्यादा कमजोर हुआ। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण मार्च में डॉलर के मुकाबले रुपया 4 फीसदी से ज्यादा नरम हुआ है। इस वजह से केंद्रीय बैंक को ऑनशोर डिलीवरेबल नेट ओपन पोजीशन पर सीमा तय करना और बैंकों को अपने ग्राहकों को नॉन-डिलीवरेबल अनुबंध देने से रोकने जैसे कुछ नियामकीय कदम उठाने पड़े। इन कदमों के बाद रुपये की चाल बदल गई और यह 2.4 फीसदी मजबूत हुआ है।

मल्होत्रा ने बताया कि भारतीय बैंक मजबूत बने हुए हैं और अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की पूंजी पर्याप्तता, नकदी की स्थिति, परिसंपत्ति की गुणवत्ता और मुनाफे से जुड़े वित्तीय मानदंड लगातार अच्छे बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि बैंक उधारी में वृद्धि देखी जा रही है और इसका आधार भी व्यापक हो रहा है। मौद्रिक नीति की अगली बैठक 3 से 5 जून को प्रस्तावित है।

First Published : April 8, 2026 | 11:04 PM IST