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VB-G RAM G: 1 जुलाई से देशभर में लागू होगा नया ग्रामीण रोजगार कानून, मनरेगा की लेगा जगह

ग्रामीण परिवारों को अब 125 दिन रोजगार की गारंटी, गांवों में इंफ्रास्ट्रक्चर और आजीविका परियोजनाओं पर होगा बड़ा फोकस

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संजीब मुखर्जी   
Last Updated- May 11, 2026 | 5:02 PM IST

VB-G RAM G: केंद्र सरकार ने सोमवार (11 मई) को औपचारिक रूप से विकसित भारत-गारंटी फॉर एम्प्लॉयमेंट एंड लाइवलीहुड मिशन (ग्रामीण) यानी VB–G RAM G Act को लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी। यह योजना 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में मनरेगा (MGNREGA) की जगह लेगी। यह देश में ग्रामीण रोजगार सृजन और ग्रामीण बुनियादी ढांचा विकास व्यवस्था में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के बयान के अनुसार, नया कानून 1 जुलाई 2026 से पूरे भारत में लागू होगा और चरणबद्ध तरीके से मौजूदा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) की व्यवस्था की जगह लेगा।

भोपाल में मीडिया को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह कानून ग्रामीण मजदूरों, किसानों और गांवों के लिए “एक नए युग की शुरुआत” करेगा। इससे रोजगार और आजीविका के अवसर बढ़ेंगे तथा ग्रामीण बुनियादी ढांचा मजबूत होगा।

उन्होंने कहा कि नए ढांचे के तहत ग्रामीण परिवारों को हर साल 125 दिनों के रोजगार की गारंटी मिलेगी, जबकि वर्तमान में मनरेगा के तहत 100 दिनों का रोजगार मिलता है। संक्रमण काल के दौरान मनरेगा की सभी मौजूदा व्यवस्थाएं लागू रहेंगी और पुरानी योजना के अधूरे कार्य 1 जुलाई तक जारी रहेंगे।

चौहान ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि संक्रमण अवधि में किसी भी मजदूर को काम से वंचित न होना पड़े। उन्होंने कहा कि राज्यों के साथ चर्चा के बाद योजना के क्रियान्वयन से जुड़े नियमों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। नए कानून के तहत संचालन संबंधी तैयारियां पूरी करने के लिए राज्यों को छह महीने तक का समय दिया जाएगा।

हालांकि 1 जुलाई के बाद ग्रामीण रोजगार से जुड़े कार्यों की फंडिंग VB–G RAM G ढांचे के तहत ही होगी, भले ही कुछ राज्य तब तक अपनी तैयारियां पूरी न कर पाए हों।

बजट में ₹95,000 करोड़ से ज्यादा का प्रावधान

केंद्र सरकार ने इस कार्यक्रम के लिए केंद्रीय बजट में 95,000 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया है, जबकि राज्यों ने भी अलग से बजटीय प्रावधान किए हैं। चौहान ने कहा कि इस योजना के तहत कुल वार्षिक खर्च 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहने की उम्मीद है।

सरकार इस कार्यक्रम का उपयोग केवल मजदूरी आधारित रोजगार के लिए ही नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर ग्रामीण बुनियादी ढांचा निर्माण के लिए भी करना चाहती है। योजना के तहत जल संरक्षण परियोजनाएं, गांव की सड़कें, पुल, पुलिया, स्कूल और आंगनवाड़ी भवन तथा कृषि से जुड़ा बुनियादी ढांचा जैसे कार्य शामिल होंगे।

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यह योजना स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों के लिए आजीविका आधारित परिसंपत्तियों को भी समर्थन देगी। इसके तहत वर्किंग शेड के निर्माण जैसे कार्य भी किए जाएंगे। बाढ़ प्रभावित और नदी किनारे वाले क्षेत्रों में रिटेनिंग वॉल जैसे आपदा न्यूनीकरण ढांचे को भी इस योजना में शामिल किया जाएगा।

DBT) के जरिए श्रमिकों के खातों में भुगतान

कृ​षि मंत्री ने कहा कि मजदूरी का भुगतान सीधे लाभ हस्तांतरण (DBT) व्यवस्था के तहत श्रमिकों के बैंक या डाकघर खातों में किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य तीन दिनों के भीतर भुगतान प्रक्रिया पूरी करना है, हालांकि अधिकतम 15 दिनों के भीतर भुगतान अनिवार्य होगा। भुगतान में देरी होने पर श्रमिकों को मुआवजा मिलेगा, जबकि मांग के बावजूद रोजगार न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता भी दिया जाएगा।

क्रियान्वयन क्षमता मजबूत करने के लिए योजना के तहत प्रशासनिक खर्च की सीमा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत कर दी गई है। इसका उद्देश्य फील्ड स्टाफ को समय पर वेतन और पर्याप्त सहायता सुनिश्चित करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में “विकसित भारत के लिए विकसित गांव” के लक्ष्य को हासिल करने में यह पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

First Published : May 11, 2026 | 3:20 PM IST