Kerala CM VD Satheesan
केरल विधानसभा चुनाव परिणाम आने के कई दिनों बाद कांग्रेस ने आखिरकार अपने विधायक दल के नेता के नाम की घोषणा कर दी है। पार्टी ने वरिष्ठ नेता V. D. Satheesan को कांग्रेस विधायक दल (CLP) का नेता चुना है। इसके साथ ही उनके राज्य के अगले मुख्यमंत्री बनने का रास्ता भी साफ माना जा रहा है।
चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद लगभग 10 दिनों तक कांग्रेस के भीतर लगातार मंथन और बैठकों का दौर चलता रहा। कई दौर की बातचीत और वरिष्ठ नेताओं से विचार-विमर्श के बाद पार्टी ने यह बड़ा फैसला लिया।
यह घोषणा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान की गई, जिससे पार्टी के अंदर चल रही असमंजस की स्थिति भी खत्म हो गई।
कांग्रेस की ओर से यह घोषणा अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) की महासचिव Deepa Dasmunsi ने की। इस मौके पर पार्टी के वरिष्ठ नेता Jairam Ramesh, Ajay Maken और Mukul Wasnik भी मौजूद रहे।
पार्टी नेतृत्व की मौजूदगी में यह फैसला औपचारिक रूप से सामने रखा गया, जिससे संगठन में एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की गई।
कांग्रेस के नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) मुख्यालय में आयोजित की गई थी। इसी बैठक में नेताओं के बीच विचार-विमर्श के बाद सतीसन के नाम पर सहमति बनी। इसके बाद पार्टी ने आधिकारिक तौर पर उनके नाम की घोषणा कर दी।
VD Satheesan केरल की राजनीति में एक प्रमुख नाम हैं। वे एर्नाकुलम जिले के नेट्टूर से संबंध रखते हैं और वर्तमान में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्य विधानसभा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उनकी राजनीतिक पहचान एक मजबूत संगठनकर्ता और जमीन से जुड़े नेता के रूप में रही है।
वीडी सतीशन ने अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत छात्र जीवन से की। उन्होंने एस.एच. कॉलेज, थेवारा और बाद में महात्मा गांधी विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान सक्रिय छात्र राजनीति में हिस्सा लिया। इसी दौरान उन्होंने छात्र संगठनों में नेतृत्व की जिम्मेदारियां संभालीं, जिससे उनकी राजनीतिक समझ और अनुभव मजबूत हुआ।
राजनीति के साथ-साथ सतीशन पेशे से केरल हाईकोर्ट में वकालत भी करते हैं। उन्होंने 1990 के दशक के मध्य में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने हार नहीं मानी और अगले चुनाव में जीत हासिल कर राजनीतिक सफर को नई दिशा दी।
वे परवूर विधानसभा क्षेत्र से लगातार पांच बार विधायक चुने गए। 2001, 2006, 2011, 2016 और 2021 के चुनावों में उन्होंने लगातार जीत दर्ज की। इस लंबे कार्यकाल ने उन्हें क्षेत्र में एक मजबूत और भरोसेमंद नेता के रूप में स्थापित किया।
कांग्रेस संगठन में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है। वे ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के सचिव और केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के उपाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। पार्टी संगठन में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है।
उनकी पहचान सिर्फ चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं रही। पूर्व वित्त मंत्री टी. एम. थॉमस आइज़क के साथ अंतर-राज्य लॉटरी मुद्दे पर उनकी बहस ने उन्हें एक नीति-आधारित नेता के रूप में भी स्थापित किया। इसके अलावा वे पश्चिमी घाट संरक्षण जैसे पर्यावरणीय मुद्दों पर भी सक्रिय रहे हैं।
केरल की कांग्रेस-यूडीएफ सरकार के दौरान वे उन विधायकों के समूह में शामिल थे जिन्हें “ग्रीन एमएलए” कहा जाता था। ये विधायक पश्चिमी घाट संरक्षण के लिए गठित माधव गाडगिल समिति की सिफारिशों का समर्थन करते थे और पर्यावरण सुरक्षा को लेकर सक्रिय रहे।
2021 में केरल कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन के बाद उन्हें विधानसभा में विपक्ष का नेता बनाया गया। इसके बाद उन्होंने संगठन को मजबूत करने और विपक्ष को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनके नेतृत्व में यूडीएफ ने उपचुनावों में बेहतर प्रदर्शन किया और लोकसभा चुनावों में भी केरल में मजबूत नतीजे दर्ज किए। 2026 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने लगभग 20,600 वोटों के अंतर से जीत हासिल कर अपनी राजनीतिक पकड़ को और मजबूत किया।
केरल विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्पष्ट बहुमत के करीब पहुंचने वाली जीत दर्ज की है। 140 सीटों वाली विधानसभा में UDF ने कुल 98 सीटों पर कब्जा जमाया।
इस चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। पार्टी ने अकेले 63 सीटें जीतकर राज्य की राजनीति में अपनी मजबूत स्थिति दर्ज कराई है। यह नतीजा कांग्रेस के लिए एक बड़ी राजनीतिक सफलता माना जा रहा है।
UDF के सहयोगी दलों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया है। भारतीय यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने 22 सीटें जीतीं, केरल कांग्रेस (KEC) को 7 सीटें मिलीं और रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (RSP) ने 3 सीटों पर जीत हासिल की।
वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) को इस चुनाव में बड़ा झटका लगा है।
इन आंकड़ों से साफ है कि इस बार के चुनाव में वाम मोर्चा अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन करता नजर आया।