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पश्चिम एशिया संकट से बढ़ा दबाव, उर्वरक सब्सिडी बिल ₹3 लाख करोड़ के पार जाने के आसार

वित्त वर्ष 2027 के लिए केंद्र सरकार का उर्वरक सब्सिडी बिल 1.71 लाख करोड़ रुपये के बजट अनुमान के मुकाबले दोगुना हो सकता है

Published by
कृति अंबे   
असित रंजन मिश्र   
Last Updated- June 09, 2026 | 10:15 PM IST

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण दुनिया भर में उर्वरक की कीमतें बढ़ गई हैं। इससे वित्त वर्ष 2027 के लिए केंद्र सरकार का उर्वरक सब्सिडी बिल 1.71 लाख करोड़ रुपये के बजट अनुमान के मुकाबले दोगुना हो सकता है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने यह जानकारी दी।

अधिकारी ने कहा, ‘उर्वरक विभाग के अधिकारी इस साल सब्सिडी में 100 फीसदी बढ़ोतरी की मांग के साथ वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के साथ तीन बैठकें पहले ही कर चुके हैं।’ अगर उनकी बात मान ली जाती है तो वित्त वर्ष 2027 में उर्वरक सब्सिडी मद की रकम 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगी।

अधिकारी ने अपनी पहचान जाहिर न करने की शर्त पर कहा, ‘हम उर्वरक का घरेलू उत्पादन बढ़ाने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं ताकि सब्सिडी का बोझ कुछ कम हो सके।’ इसके अलावा पश्चिम एशिया संकट के कारण आपूर्ति बाधित होने से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आई है।

अधिकारी ने कहा, ‘सरकार ने सीमा शुल्क में कटौती के जरिये तेल विपणन कंपनियों को 1.23 लाख करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की है। यह मदद उस नुकसान की भरपाई के लिए दी गई थी जो उन्हें खुदरा कीमत बढ़ाने से पहले 78 दिनों तक उठाना पड़ा था।’

सरकार ने मार्च के आखिर में पेट्रोल और डीजल पर सीमा शुल्क को 10 रुपये प्रति लीटर घटा दिया था ताकि खुदरा कीमतें बढ़ाए बिना तेल विपणन कंपनियों को कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से कुछ राहत मिल सके। मगर तेल विपणन कंपनियों ने मई से खुदरा कीमतें बढ़ानी शुरू कर दी हैं।

उर्वरक सब्सिडी बिल अधिक होने के कारण व्यय में वृद्धि और उत्पाद शुल्क में कटौती के कारण सरकार को हुए करीब 1.23 लाख करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान से उसकी वित्तीय स्थिति पर दबाव पड़ा है। सरकार अतिरिक्त संसाधन जुटाने के लिए विनिवेश से मिलने वाली राशि और गैर-कर राजस्व पर भरोसा कर रही है। अधिकारी ने बताया कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पूरे विनिवेश विभाग के साथ बैठक की और इस महत्वपूर्ण समय में काम तेज करने को कहा।

इस बैठक के बाद, निवेश एवं सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) ने हर हफ्ते विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (पीएसयू) में ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) के जरिये अल्पांश हिस्सेदारी बेचनी शुरू कर दी है। अधिकारी ने बताया कि सीतारमण हर सोमवार को दीपम के साथ समीक्षा बैठक भी करती हैं ताकि प्रगति का जायजा लिया जा सके।

दीपम ने वित्त वर्ष 2026 में पूरे वर्ष में केवल पांच पीएसयू में ओएफएस किया था, लेकिन वित्त वर्ष 2027 के पहले तीन महीनों में ही चार पीएसयू में हिस्सेदारी बेच दी है। इस वित्त वर्ष में अब तक 18,533 करोड़ रुपये की राशि जुटाई जा चुकी है, जो सरकार के 80,000 करोड़ रुपये की अन्य पूंजीगत प्राप्तियों के लक्ष्य का 23 प्रतिशत है।

सरकार ने वित्त वर्ष 2027 में राजकोषीय घाटा 16.96 लाख करोड़ रुपये या जीडीपी के 4.3 प्रतिशत के रूप में तय किया है। सरकार घाटे को पूरा करने के लिए धन जुटाने के लिए दूसरे उपाय भी कर रही है। अधिकारी ने बताया कि वित्त मंत्रालय वैश्विक सूचकांकों जैसे ब्लूमबर्ग ग्लोबल एग्रीगेट इंडेक्स से भारत के सरकारी बॉन्ड को शामिल कराने की बातचीत कर रहा है। इससे भारत में विदेशी निवेश बढ़ने की उम्मीद है जो रुपये में तेज गिरावट के बीच चालू खाता घाटे का प्रबंधन करने में मदद करेगा।

जनवरी में ब्लूमबर्ग ने कहा था कि वह भारत को अपने लगभग 3 लाख करोड़ डॉलर के सूचकांक में शामिल करने पर विचार कर रहा है और अगला अपडेट 2026 के मध्य तक आने की संभावना है।

सरकार ने पिछले सप्ताह विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) को सरकारी बॉन्ड पर पूंजीगत लाभ और विदहोल्डिंग टैक्स से छूट दी है। यह कदम खास तौर पर बॉन्ड बाजार को मजबूत करने और भारत की प्रतिभूतियों को वैश्विक सूचकांक में शामिल कराने के उद्देश्य से उठाया गया है। हालांकि बाहरी चुनौतियां हैं, लेकिन भारत की जीडीपी वृद्धि मजबूत बनी हुई है।

First Published : June 9, 2026 | 10:15 PM IST