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West Asia conflict: पश्चिम एशिया तनाव का असर भारत के पर्यटन, विमानन, होटल और रेस्टोरेंट कारोबार पर साफ दिखने लगा है। इस तनाव से विदेशी पर्यटक भारत कम आ रहे हैं। जिससे विमानन उद्योग और होटल व रेस्टॉरेंट उद्योग को चपत लग रही है। उद्योग संगठन पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री (PHDCCI) ने आज ‘Impact of the West Asia Conflict on India’s Tourism, Aviation & Hospitality Sectors’ नामक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें इस संकट से विमानन, पर्यटन, आतिथ्य और रेस्टोरेंट क्षेत्रों पर पड़े व्यापक असर को रेखांकित किया गया है।
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र जीडीपी में लगभग 8% योगदान और 4 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देता है। 2025 में गिरने और फिर मजबूत रिकवरी के बाद अब फिर बाहरी झटकों का सामना कर रहा है। ब्रांडेड होटलों की संख्या 2 लाख कमरों के करीब पहुंच चुकी थी और घरेलू विमानन यात्री संख्या प्रतिदिन 5 लाख के पार थी। लेकिन 2026 की शुरुआत में पश्चिम एशिया में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव ने नई अनिश्चितता पैदा कर दी है।
PHDCCI की पर्यटन व आतिथ्य समिति के सह चेयरमैन राजन सहगल ने कहा कि दुनिया में तनाव बढ़ते ही सबसे पहले असर पर्यटन पर पड़ता है। रूस–यूक्रेन युद्ध में यह दिखा था और अब पश्चिम एशिया के संघर्ष ने यात्रा का तरीका ही बदल दिया है। भारत से विदेश जाने वाले लोग अब लंबी दूरी की बजाय नजदीकी देशों जैसे थाईलैंड, सिंगापुर और वियतनाम को ज्यादा चुन रहे हैं क्योंकि अंतरराष्ट्रीय यात्रा को लेकर अनिश्चितता है। वहीं भारत घूमने आने वाले विदेशी पर्यटक 15-20 फीसदी तक कम हुए हैं। लेकिन बिजनेस यात्रा और भारत की घरेलू यात्रा मांग अभी भी स्थिति संभाले हुए है।
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PHDCCI की यह रिपोर्ट बताती है कि पश्चिम एशिया तनाव का सबसे ज्यादा दबाव विमानन क्षेत्र पर है। कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को रद्द या लंबा रास्ता लेना पड़ रहा है। इससे उड़ान समय 2-4 घंटे बढ़ गया है और ईंधन खर्च भी बढ़ा है। उद्योग के आकलन के अनुसार, एयरलाइंस की कुल परिचालन लागत में ईंधन की हिस्सेदारी 35-40% होती है। जिससे हवाई यात्रा महंगी हो गई है। मौजूदा हालात ने मुनाफे पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया है।
इस रिपोर्ट में ICRA Limited के हवाले से कहा गया है कि भारतीय विमानन उद्योग की लगभग 15-20% आय उन उड़ानों से जुड़ी है जो पश्चिम एशिया के एयरस्पेस से होकर गुजरती है। ऐसे में इस क्षेत्र में लंबे समय तक बाधा बनी रहने पर एयरलाइंस की आमदनी प्रभावित हो सकती है।
क्रिएटिव ट्रेवल के संयुक्त प्रबंध निदेशक राजीव कोहली ने कहा कि इस साल के अनुमानित पर्यटन कारोबार का लगभग 10-15% पहले ही प्रभावित हो चुका है। आगे की बुकिंग और भविष्य की यात्रा पूछताछ भी धीमी पड़ने लगी है। रिपोर्ट में कहा गया कि पश्चिम एशिया तनाव, उच्च ईंधन मूल्य, कमजोर मुद्रा के कारण वित्त वर्ष 26 में उद्योग को 17 से 18 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है।
होटल सेक्टर में घरेलू यात्रियों की वजह से कमरे भरे तो हैं। लेकिन बिजली, ईंधन और दूसरी लागत बढ़ने से मुनाफा घटा है। विदेशी मेहमानों पर निर्भर प्रीमियम और बिजनेस होटल ज्यादा प्रभावित हैं। सरोवर होटल के चेयरमैन अजय के. बकाया (Bakaya) ने कहा कि दिल्ली, बेंगलूरु, हैदराबाद और चेन्नई जैसे प्रमुख महानगरों में मांग में करीब 10% नरमी दिखी है। लेकिन इसकी भरपाई लीजर मांग (घूमने-फिरने, छुट्टियां मनाने और मनोरंजन के लिए की जाने वाली यात्रा) में तेज बढ़ोतरी से हो गई है। खासकर गोवा जैसे पर्यटन स्थलों पर यात्रा मांग में लगभग 15% की बढ़ोतरी देखी गई है, जबकि अन्य लीजर बाजार स्थिर बने हुए हैं।
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पर्यटन और आतिथ्य तंत्र का अहम हिस्सा रेस्टोरेंट उद्योग इस समय कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति में बाधाओं के कारण गंभीर परिचालन संकट का सामना कर रहा है। आपूर्ति में इस रुकावट ने मोहल्ले के छोटे स्वतंत्र रेस्टोरेंट और क्विक सर्विस आउटलेट्स से लेकर बड़े होटलों की किचन और संगठित फूड सर्विस चेन तक सभी के सामने तुरंत चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के अध्यक्ष सागर दरयानी के कहा कि एलपीजी आपूर्ति में जारी रुकावट ने रेस्टोरेंट उद्योग के लिए गंभीर संकट पैदा कर दिया है। करीब 10% रेस्टोरेंट अस्थायी रूप से बंद हो गए हैं, जबकि 60–70% प्रतिष्ठानों ने सीमित आपूर्ति के चलते इंडक्शन कुकिंग, वैकल्पिक ईंधन, सीमित मेन्यू या कम समय तक संचालन जैसे उपाय अपनाए हैं। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं के व्यवहार पर दिखने लगा है। बाहर खाने की आवृत्ति 8-10% घटी है और प्रति ग्राहक औसत खर्च 6-8% कम हुआ है। जिससे उद्योग के कुल कारोबार में कमी आई है।
उद्योग के आकलन के अनुसार भारत का फूड सर्विस बाजार 2024 में 5.69 लाख करोड़ रुपये का था और 2028 तक बढ़कर 7.76 लाख रुपये करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। 2026 में इसका आकार लगभग 6.46 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है यानी इस क्षेत्र में रोज करीब 17,700 करोड़ रुपये का कारोबार हो रहा है। मौजूदा समय में कारोबार में 15-20% की सुस्ती देखी जा रही है। इसका मतलब है कि रोजाना लगभग ₹2,650 करोड़ की आर्थिक गतिविधि कम हो रही है, जो महीने भर में करीब ₹79,000 करोड़ के नुकसान के बराबर है। यह फूड सर्विस इकोसिस्टम के लिए बड़ा आर्थिक झटका है।
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रेस्टोरेंट उद्योग में संचालन और वित्तीय चुनौतियों के साथ-साथ रोजगार पर भी चिंता बढ़ गई है। रेस्टोरेंट उद्योग सीधे तौर पर 85 लाख से अधिक लोगों को रोजगार देता है, जिससे यह सेवा क्षेत्र में सबसे बड़े रोजगार प्रदाताओं में से एक है। यदि आपूर्ति में यह बाधा लंबे समय तक बनी रहती है तो 5–7 लाख नौकरियों पर खतरा पैदा हो सकता है। खासकर छोटे और मध्यम रेस्टोरेंट संचालक लागत और आपूर्ति के उतार-चढ़ाव से अधिक प्रभावित होते हैं। ऐसे में वे भर्ती रोकने और विस्तार योजनाएं टालने पर मजबूर हो सकते हैं।
उद्योग ने इस पश्चिम एशिया संकट से पर्यटन, विमानन, होटल-रेस्टोरेंट व आतिथ्य क्षेत्र को उबारने के लिए सरकार मदद करने की गुहार लगाई है। PHDCCI ने सरकार को सुझाव दिया है कि संघर्ष वाले हवाई मार्गों पर निर्भरता घटाई जाए, एटीएफ और होटल-रेस्टोरेंट पर टैक्स बोझ कम किया जाए। साथ ही छोटे कारोबारियों को सस्ती वित्तीय मदद दी जाए। इसके अलावा घरेलू पर्यटन सर्किट, बेहतर कनेक्टिविटी और आसान वीजा प्रक्रिया पर जोर देने की बात कही गई है। इस रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि हालात चुनौतीपूर्ण जरूर हैं, लेकिन मजबूत घरेलू मांग के दम पर पर्यटन, होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर इस झटके से उबर सकता है।