भारतीय वायु सुरक्षा अधिकारी सिएटल जाने की योजना बना रहे हैं। वहां वे बोइंग द्वारा किए जा रहे एक ‘फ्यूल-कंट्रोल स्विच पैनल’ के परीक्षण की निगरानी करेंगे। इस पैनल को फरवरी में एयर इंडिया के एक 787 विमान से हटा दिया गया था, जब लंदन-बेंगलूरु उड़ान के पायलटों ने इसमें संभावित खराबी की बात कही थी। यह जानकारी रॉयटर्स द्वारा देखे गए दस्तावेज से पचा तली है।
भारतीय अधिकारियों ने इस परीक्षण को ‘संवेदनशील’ बताया है। इस परीक्षण ने बोइंग ड्रीमलाइनर में लगे उन स्विचों पर फिर से ध्यान केंद्रित कर दिया है, जो विमान के इंजनों में जेट ईंधन का प्रवाह नियंत्रित करते हैं। यह ऐसे समय में हो रहा है जब जांचकर्ता पिछले जून में गुजरात में हुए एयर इंडिया 787 विमान हादसे की अंतिम रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। इस हादसे में 260 लोगों की जान चली गई थी।
ये स्विच इस तरह से डिजाइन किए गए हैं कि अगर पायलट कोई विशेष ऐक्शन नहीं लेते हैं तो इन्हें हिलाया नहीं जा सकता। लेकिन इस हादसे की शुरुआती रिपोर्ट में यह सामने आने के बाद कि ये स्विच लगभग एक ही समय पर बंद हो गए थे और जिससे इंजनों को ईंधन मिलना बंद हो गया था, ये स्विच अब जांच के दायरे में आ गए हैं।
भारत के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने पहले बताया था कि लंदन में फरवरी में हुई घटना के दौरान पायलटों ने इंजन चालू करते समय देखा कि पहले दो प्रयासों में जब हल्का दबाव डाला गया, तो फ्यूल स्विच ‘रन’ स्थिति में स्थिर नहीं रहे, लेकिन उड़ान भरने से पहले तीसरे प्रयास में वे स्थिर हो गए। एयर इंडिया ने कहा, ‘अतिरिक्त परीक्षण में एक नियंत्रित प्रयोगशाला परिवेश में जांच शामिल है, ताकि इसके प्रदर्शन की निश्चित रूप से पुष्टि की जा सके।’डीजीसीए औऱ बोइंग ने रॉयटर्स के सवालों का जवाब नहीं दिया।