Wheat Stocks: दुनिया के गेहूं बाजार में इस समय एक दिलचस्प स्थिति बन रही है। अमेरिका में गेहूं का उत्पादन कम होने जा रहा है, जिससे वहां सप्लाई थोड़ी तंग हो सकती है। लेकिन दूसरी तरफ रूस, तुर्किये और यूक्रेन जैसे बड़े उत्पादक देशों में अच्छी फसल की उम्मीद है। यही वजह है कि वैश्विक स्तर पर गेहूं की उपलब्धता फिलहाल बेहतर बनी हुई है और कीमतों में बड़ी तेजी की आशंका कम नजर आ रही है।
USDA के ताजा अनुमानों के मुताबिक 2026-27 सीजन में अमेरिका का गेहूं उत्पादन घटकर 1.543 अरब बुशल रह सकता है। फसल कम होने की वजह से वहां का गेहूं भंडार भी घटने वाला है। अनुमान है कि सीजन के अंत तक अमेरिका का गेहूं स्टॉक 744 मिलियन बुशल रहेगा, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 20 फीसदी कम है।
अमेरिका में हार्ड रेड विंटर गेहूं की पैदावार उम्मीद से कमजोर रही है। इसके अलावा प्रति एकड़ उत्पादन का अनुमान भी घटा दिया गया है। इसी वजह से कुल उत्पादन कम होने की संभावना जताई गई है। हालांकि अच्छी बात यह है कि अमेरिका ने अपने गेहूं निर्यात अनुमान में कोई बदलाव नहीं किया है और निर्यात पहले की तरह जारी रहने की उम्मीद है।
जहां अमेरिका में फसल कमजोर हुई है, वहीं रूस, तुर्किये और यूक्रेन में मौसम किसानों के पक्ष में रहा है। रूस में अब गेहूं उत्पादन 8.8 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जो पहले के अनुमान से ज्यादा है। तुर्किये में रिकॉर्ड 2.25 करोड़ टन गेहूं उत्पादन की उम्मीद की जा रही है। वहीं यूक्रेन में भी मौसम बेहतर रहने से फसल की स्थिति सुधरी है। यानी दुनिया के सबसे बड़े गेहूं निर्यातक क्षेत्रों में से एक ब्लैक सी क्षेत्र इस बार अच्छी फसल देने की राह पर है, जिससे वैश्विक बाजार को बड़ा सहारा मिल रहा है।
ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान में गेहूं उत्पादन कम रहने की उम्मीद है। लेकिन रूस, तुर्किये और यूक्रेन में बढ़ी फसल इतनी बड़ी है कि इन देशों की कमी की भरपाई आसानी से हो सकती है। यही वजह है कि वैश्विक गेहूं उत्पादन का अनुमान बढ़ा दिया गया है।
USDA का अनुमान है कि इस सीजन में दुनिया में गेहूं की खपत करीब 82.46 करोड़ टन रहेगी। वहीं वैश्विक गेहूं व्यापार 21.2 करोड़ टन तक पहुंच सकता है। सबसे अहम बात यह है कि दुनिया का कुल गेहूं भंडार बढ़कर 27.54 करोड़ टन रहने का अनुमान है।
यानी अमेरिका में फसल कम होने के बावजूद दुनिया में गेहूं की उपलब्धता फिलहाल पर्याप्त बनी हुई है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं की कीमतों पर बहुत ज्यादा दबाव बनने की संभावना नहीं दिख रही है।