अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम File Image
पश्चिम एशिया में जारी कूटनीतिक प्रयासों के बीच अमेरिकी रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने पाकिस्तान पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि उन्हें पाकिस्तान पर “जरा भी भरोसा नहीं” है। उन्होंने सुझाव दिया कि अमेरिका को ईरान के साथ संभावित युद्धविराम के लिए किसी दूसरे मध्यस्थ की तलाश करनी चाहिए।
सीनेटर ग्राहम की यह कड़ी टिप्पणी उन आरोपों के बाद आई है जिनमें कहा गया है कि पाकिस्तान ने चुपचाप ईरानी सैन्य विमानों को अपने एयरबेस पर खड़ा होने की अनुमति दी, ताकि उन्हें अमेरिकी हवाई हमलों से बचाया जा सके।
ग्राहम ने कहा, “मुझे पाकिस्तान पर उतना भी भरोसा नहीं है जितना मैं उन्हें फेंक सकता हूं। अगर वास्तव में पाकिस्तान ने ईरानी विमानों को अपने एयरबेस पर जगह दी है ताकि ईरान की सैन्य संपत्तियों की रक्षा की जा सके, तो इसका मतलब है कि हमें किसी और को मध्यस्थ बनाने पर विचार करना चाहिए। कोई आश्चर्य नहीं कि यह मामला आगे नहीं बढ़ रहा है।” सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से सीनेट एप्रोप्रिएशंस कमेटी में सुनवाई के दौरान पाकिस्तान की निष्पक्षता पर सवाल उठाया।
चर्चा का केंद्र यह था कि क्या पाकिस्तान की जमीन पर ईरानी विमानों की मौजूदगी उसे “निष्पक्ष मध्यस्थ” साबित करती है। रक्षा मंत्री हेगसेथ ने इस विवाद से बचने की कोशिश करते हुए कहा कि वह बातचीत के बीच राजनीतिक तनाव में नहीं पड़ना चाहते, लेकिन दक्षिण कैरोलिना से रिपब्लिकन सीनेटर ग्राहम ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
इससे पहले ग्राहम, जो अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के करीबी राजनीतिक सहयोगी माने जाते हैं, ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा था कि अगर यह रिपोर्ट सही निकली तो उन्हें “कोई हैरानी नहीं होगी।” उन्होंने इजरायल को लेकर पाकिस्तान के रक्षा अधिकारियों के पुराने बयानों का भी जिक्र किया।
ग्राहम ने अपने पोस्ट में लिखा, “अगर यह रिपोर्ट सही है, तो ईरान, अमेरिका और अन्य पक्षों के बीच मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका का पूरी तरह से पुनर्मूल्यांकन करना होगा। पाकिस्तान के रक्षा अधिकारियों के इजरायल को लेकर पहले दिए गए बयानों को देखते हुए मुझे इस पर बिल्कुल आश्चर्य नहीं होगा।”
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CBS News की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल की शुरुआत में राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा युद्धविराम की घोषणा के तुरंत बाद तेहरान ने कई विमान रावलपिंडी के नूर खान एयरबेस भेजे थे। यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब पाकिस्तान ने पुष्टि की थी कि उसे ईरान की ओर से शांति प्रस्ताव मिले हैं, जिन्हें वह “अमेरिकी पक्ष के साथ साझा” करेगा। इससे पाकिस्तान की सार्वजनिक कूटनीति और कथित गुप्त सैन्य सहयोग के बीच विरोधाभास पैदा हो गया।
हालांकि पाकिस्तान ने इन रिपोर्टों को खारिज करते हुए उन्हें “भ्रामक और सनसनीखेज” बताया है। विदेश मंत्रालय ने औपचारिक बयान जारी कर कहा कि ईरानी विमान शुरुआती वार्ताओं के बाद युद्धविराम के दौरान पहुंचे थे और उनका किसी सैन्य योजना या सुरक्षा व्यवस्था से “कोई संबंध नहीं” है।
पाकिस्तान ने यह भी कहा कि इस तरह की “अटकलों पर आधारित कहानियां” क्षेत्रीय शांति प्रयासों को नुकसान पहुंचाने के लिए फैलाई जा रही हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने फिलहाल धैर्यपूर्ण रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा आर्थिक दबाव जारी रहने तक बातचीत में “जल्दबाजी की जरूरत नहीं” है।
न्यूयॉर्क के TalkRadio 77 WABC को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, “हमें किसी बात की जल्दी नहीं है। हमारे पास ऐसा प्रतिबंध है जिससे उन्हें पैसा नहीं मिल रहा। मामला बहुत सीधा है- हम ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दे सकते, क्योंकि वे उसका इस्तेमाल करेंगे।”
ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को रोकने के अंतिम लक्ष्य पर बात करते हुए ट्रंप ने पूरा भरोसा जताया। जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका ईरान को यूरेनियम संवर्धन या परमाणु बम बनाने से रोक सकता है, तो उन्होंने जवाब दिया, “100 प्रतिशत। वे रुक जाएंगे और उन्होंने खुद मुझसे कहा है… ईरानियों ने मुझसे कहा कि वे इसे खत्म कर देंगे।”