प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दौरे पर रहेंगे जहां तरल पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) और आपातकालीन या रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार के क्षेत्र में दो महत्त्वपूर्ण समझौते किए जाने हैं। यूएई, भारत के आपातकालीन पेट्रोलियम भंडार में पहला साझेदार देश रहा है। वर्ष 2018 में, इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड (आईएसपीआरएल) और आबु धाबी नैशनल ऑयल कंपनी (एडीएनओसी) ने एक समझौता किया था, जिसके तहत यूएई आईएसपीआरएल की मंगलूरु संयंत्र में 50 लाख बैरल से अधिक कच्चे तेल का भंडारण कर सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी इस दौरे के बाद नीदरलैंड (15-17 मई), स्वीडन (17-18 मई), नॉर्वे (18-19 मई) और इटली (19-20 मई) भी जाएंगे। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, भारत हरित ऊर्जा को अपनाने और महासागरों, समुद्रों, तटों और अंतर्देशीय जलमार्गों से जुड़ी उन सभी आर्थिक गतिविधियों (ब्लू इकॉनमी) से जुड़ी तकनीक के साझा करने पर कई समझौतों पर हस्ताक्षर करने जा रहा है। मोदी के नॉर्वे दौरे से द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जो वर्ष 2024 में लगभग 2.73 अरब डॉलर था। भारत की दिलचस्पी इस बात में है कि नॉर्वे का गवर्नमेंट पेंशन फंड ग्लोबल (जीपीएफजी) और अधिक निवेश करे जिसने फिलहाल भारतीय पूंजी बाजार में करीब 28 अरब डॉलर निवेश किया है। यह नॉर्वे में 43 साल में किसी भारतीय प्रधानमंत्री का पहला दौरा होगा।
नीदरलैंड में अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री उभरती तकनीकों से जुड़े समझौते करने वाले हैं। सूत्रों के अनुसार, टाटा समूह का धोलेरा सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन संयंत्र नीदरलैंड की दिग्गज सेमीकंडक्टर कंपनी एएसएमएल के उपकरणों का उपयोग करेगा और समझौते में कई नई चीजें जुड़ सकती हैं। स्वीडन में, प्रधानमंत्री गोथेनबर्ग भी जाएंगे, जो स्कैंडिनेविया का सबसे बड़ा बंदरगाह है और यह वाहन निर्माता कंपनी वॉल्वो के जन्मस्थल के रूप में मशहूर है। इटली के रोम में मोदी, खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के मुख्यालय का दौरा करेंगे।
प्रधानमंत्री यूएई में ऐसे वक्त में दौरा कर रहे हैं जब पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण भारत की ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान आ रहे हैं। पिछले महीने विदेश मंत्री एस. जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और विदेश सचिव विक्रम मिश्र यूएई का दौरा कर चुके हैं। ऊर्जा संबंधों की बात करें तो यूएई, पिछले वर्ष भारत का चौथा सबसे बड़ा कच्चे तेल स्रोत रहा, जो देश की जरूरतों का लगभग 11 प्रतिशत पूरा करता है।