अंतरराष्ट्रीय

जयशंकर-रुबियो की बैठक में तेल-व्यापार व समुद्री सुरक्षा पर बनी बड़ी सहमति, व्यापारिक तनाव दूर करने पर भी बातचीत

भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो की दिल्ली में हुई अहम बैठक में ऊर्जा, $500 बिलियन की ट्रेड डील और वीजा विवाद पर सकारात्मक चर्चा हुई

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अर्चिस मोहन   
Last Updated- May 24, 2026 | 10:31 PM IST

नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो की मुलाकात में ऊर्जा आपूर्ति एक प्रमुख मुद्दा रहा। भारत द्वारा अमेरिका से ऊर्जा आपूर्ति बढ़ाने से जुड़ा मुद्दा प्रमुखता से छाय रहा। रविवार को हुई इस बैठक में भारत द्वारा अमेरिका से ऊर्जा की खरीद बढ़ाने पर मुख्य रूप से चर्चा हुई।

रूबियो पहली बार भारत की आधिकारिक यात्रा पर आए हैं। वह ऐसे समय में आए हैं जब भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों में खटास आ गई है। जयशंकर और रूबियो की बैठक में दोनों देशों के बीच नागरिक परमाणु सहयोग, महत्त्वपूर्ण खनिज, रक्षा और व्यापार संबंध और होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) पर ईरान के नियंत्रण जैसे मुद्दों का भी जिक्र हुआ।

उन्होंने हिंद-प्रशांत क्षेत्र जैसे समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर भी बात की जो ऊर्जा और व्यापार के लिहाज से जरूरी है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि पारस्परिक लाभकारी समझौता जल्द होने वाला है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका की आव्रजन नीतियों में बदलाव भारत को ध्यान में रखकर नहीं किए गए हैं। रविवार सुबह हुई बातचीत के बाद संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में रूबियो ने भारत और अमेरिका संबंधों के बीच गर्मजोशी में आई कमी से जुड़ी चिंता दूर करने का प्रयास किया। उन्होंने दोनों देशों के बीच संबंधों को वैश्विक स्तर पर ‘सबसे अहम’ बताया।

रूबियो ने कहा,‘भारत-अमेरिका संबंधों में कोई कमी नहीं आई है  और आने वाले वर्षों में ये संबंध और मजबूत होंगे।’उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष लगभग सभी प्रमुख वैश्विक मुद्दों पर ‘रणनीतिक रूप से एकमत’ हैं। रूबियो अपनी चार दिवसीय भारत यात्रा पर शनिवार को आए और सबसे पहले कोलकाता का संक्षिप्त दौरा किया।

विदेश मंत्री जयशंकर ने भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा सहयोग का जिक्र किया और अमेरिका को एक ‘महत्त्वपूर्ण और विश्वसनीय’ ऊर्जा साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका से भारत को ऊर्जा आपूर्ति में काफी ‘बढ़ोतरी’ हुई है है और भारत ऊर्जा के बड़े, भरोसेमंद और किफायती स्रोत से आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। जयशंकर ने संकेत दिया कि अमेरिका भारत के लिए ऐसे ही एक स्रोत के रूप में उभरा है।

केप्लर के पूर्वानुमानित आंकड़ों के मुताबिक भारत मई में अमेरिका से बड़ी मात्रा में एलपीजी और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस का आयात करने के लिए तैयार है।

रूबियो और जयशंकर की ऊर्जा पर चर्चा ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका भारत को वेनेजुएला से अधिक तेल खरीदने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। वेनेजुएला हाल के हफ्तों में भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाले शीर्ष तीन देशों में से एक बनकर उभरा है। गुरुवार को स्वीडन और भारत की अपनी यात्राओं पर रवाना होने से पहले मियामी में पत्रकारों से बात करते हुए रूबियो ने कहा कि अमेरिका उतनी ही मात्रा में ऊर्जा बेचने के लिए तैयार है जितनी भारत खरीदने को तैयार है।

उन्होंने कहा,‘हम चाहते हैं कि वेनेजुएला उनके पोर्टफोलियो का एक बड़ा हिस्सा बने। हमें वेनेजुएला के तेल में भी अवसर दिखाई देते हैं।’ अमेरिकी तेल कंपनियां वेनेजुएला से तेल निकालने के सौदे को अंतिम रूप देने के करीब हैं। जयशंकर और रूबियो ने व्यापार समझौते को जल्द से जल्द पूरा करने की आवश्यकता पर भी चर्चा की। 

अमेरिकी विदेश मंत्री ने शनिवार दोपहर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। कुछ घंटों बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में रूबियो ने भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और अन्य अमेरिकी राजनयिकों की भारत में ‘उनके शानदार काम’ के लिए तारीफ की। इस पोस्ट में रूबियो ने कहा कि भारत ने ‘अगले पांच वर्षों में ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और कृषि पर ध्यान केंद्रित करते हुए 500 अरब डॉलर के अमेरिकी सामान खरीदने’ की प्रतिबद्धता जताई।

First Published : May 24, 2026 | 7:36 PM IST