Mojtaba Khamenei, Iran's new Supreme Leader
Iran-Israel War: ईरान की सबसे उच्च राजनीतिक और धार्मिक सत्ता का पद अब मोजेतबा खामनेई के नाम किया गया है। रविवार को ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्ला अली खामनेई के निधन के बाद उनकी जगह उनके बेटे मोक्तबा को इस अहम पद के लिए चुना गया है।
आयातुल्ला अली खामनेई 86 वर्ष के थे और हाल ही में एक हवाई हमले में उनकी मौत हो गई थी। उनके निधन के बाद देश में रणनैतिक और राजनीतिक उठापटक के बीच मोजेतबा का नाम सुप्रीम लीडर के रूप में सबसे आगे रहने लगा था।
मोजेतबा खामनेई को चुने जाने की घोषणा देश की एसेम्बली ऑफ़ एक्सपर्ट्स नाम की धार्मिक संस्था ने की, जो ईरान के सर्वोच्च नेता का चुनाव करती है। इस समूह में 88 मौलवियों को शामिल किया जाता है।
मोजेतबा अपने पिता के सबसे करीबी सहयोगी माने जाते थे। हालांकि उन्होंने कभी भी कोई चुनाव नहीं जीता और न ही कभी सरकारी पद संभाला, लेकिन लंबे समय से वे ईरानी शासन की अंदरूनी राजनीति में सक्रिय रहे हैं।
उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब देश अमेरिका और इज़राइल के साथ बढ़ते तनाव के बीच युद्ध‑संबंधी परिस्थितियों से गुजर रहा है। मोजेतबा अब देश की रणनीति, सुरक्षा और सैन्य मामलों में केंद्रीय निर्णय लेने वाले व्यक्ति होंगे।
मोजेतबा के परिवार में हाल ही में एक और दुखद घटना हुई थी। इसी हवाई हमले में उनकी पत्नी ज़हरा हद्दाद अदेल की भी मृत्यु हुई थी। उनकी पत्नी का परिवार भी वर्षों से देश की धार्मिक और राजनीतिक संरचना में प्रमुख रहा है।
मोजेतबा खामनेई के समर्थकों का कहना है कि उनका नाम इस पद पर रखना राष्ट्रीय और धार्मिक भावना को मजबूती देगा। वहीं आलोचकों का यह भी कहना है कि इससे ईरान में वंशानुक्रम आधारित सत्ता का मार्ग खुल सकता है, जो देश की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था के लिए नया मोड़ है।
मोजेतबा के हाथ अब ईरान का क़ाफ़ी शक्तिशाली सैन्य बल रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स सहित देश की बाहरी और भीतरी नीतियों का नियंत्रण होगा। साथ ही इन नीतियों का असर पूरी मध्य पूर्व राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है।
इस पद की शक्ति सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि सैन्य और धार्मिक दोनों क्षेत्रों में गहरी है। अब इस पद की जिम्मेदारी मोज़ता क़मनेई के पास आने की संभावना है।
मोजेतबा खामनेई का जन्म 1969 में ईरान के शहर मशहद में हुआ था। उनका जन्म उस दौर में हुआ जब शाह मोहम्मद रजा पहलवी की तानाशाही के खिलाफ विद्रोह पहले से ही शुरू हो चुका था। उनके पिता, आयतुल्लाह अली खामनेई, शाह के शासन के खिलाफ सक्रिय रूप से विरोध कर रहे थे।
एक आधिकारिक जीवनी के अनुसार, शाह की गुप्त पुलिस, सवाक, ने एक बार उनके घर पर छापा मारा और उनके पिता को पीटा। जब मोजेतबा खामनेई और उनके भाई-बहन जागे, तो उन्हें बताया गया कि उनके पिता छुट्टी पर जा रहे हैं। उनके पिता ने कहा कि सच बताने में कोई हर्ज नहीं है।
शाह के पतन के बाद खामनेई का परिवार तेहरान में रहने लगा। मोजेतबा खामनेई ने ईरान-इराक युद्ध में हबीब इब्न मजाहिर बटालियन के साथ हिस्सा लिया। यह बटालियन ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड की एक इकाई थी, जिनके कई सदस्य बाद में देश की खुफिया और सैन्य ताकत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने लगे।
1989 में उनके पिता अली खामनेई ईरान के सर्वोच्च नेता बने। इसके साथ ही मोज़ता और उनका परिवार बुनियादों (बोन्याद्स) और अरबों डॉलर की संपत्ति तक पहुँचने लगे। ये बुनियाद राज्य उद्योगों और शाह की पूर्व संपत्ति से वित्त पोषित होती हैं।
मोजेतबा खामनेई,ने अपने पिता के कार्यालय में काम करते हुए धीरे-धीरे राजनीतिक और सैन्य शक्ति हासिल की। अमेरिकी डिप्लोमैटिक काबल्स के अनुसार, उन्हें “पावर बिहाइंड द रोब्स” यानी पर्दे के पीछे ताकत के रूप में देखा जाता था। उनके ऊपर आरोप था कि उन्होंने अपने पिता के फोन की जाँच भी की और अपने देश में अपना राजनीतिक आधार मजबूत किया।
मोजेतबा खामनेई, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड के साथ करीबी संपर्क में हैं। यह गार्ड, जिसने जनवरी 2022 में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों को दबाया, अमेरिकी सरकार द्वारा 2019 में आतंकवादी संगठन घोषित किया गया था।
अमेरिका ने उन्हें 2019 में उन गतिविधियों के कारण प्रतिबंधित किया जिनसे उनके पिता की क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं और आंतरिक उत्पीड़न को बढ़ावा मिला। इसमें 2005 में कट्टरपंथी राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद के चुनाव और 2009 में उनके विवादित पुन: चुनाव में गुप्त समर्थन देने के आरोप शामिल हैं।
इरान में सर्वोच्च नेता की सत्ता में केवल एक बार बदलाव हुआ है। पहले यह पद आयतुल्लाह रूहोल्लाह खुमैनी के पास था, जिन्होंने 1979 के इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान का नेतृत्व किया। अब मोज़ता खामनेई अपने पिता के साथ ही ईरान के सैन्य और राजनीतिक शक्तियों के केंद्र में हैं।
सर्वोच्च नेता का पद देश की सैन्य नीतियों, रिवोल्यूशनरी गार्ड और विदेश नीति में निर्णायक होता है। रिवोल्यूशनरी गार्ड के पास न केवल मिसाइल और हथियार प्रणालियाँ हैं, बल्कि अरबों डॉलर की संपत्ति और मध्य पूर्व में “एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस” के तहत गठित कट्टरपंथी समूहों पर भी उनका प्रभाव है।
-एजेंसी इनपुट के साथ