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‘Operation Fauxios’: ईरानी संसद के स्पीकर ने अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों का उड़ाया मजाक

ईरानी संसद के स्पीकर ने Axios रिपोर्ट को खारिज किया, परमाणु समझौते और युद्धविराम वार्ता पर बढ़ी वैश्विक नजर

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एजेंसियां   
Last Updated- May 07, 2026 | 6:58 PM IST

ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद-बाकर गालिबाफ (Mohammad-Bagher Ghalibaf) ने गुरुवार को ईरान और अमेरिका के बीच संभावित समझौते से जुड़ी रिपोर्टों को खारिज कर दिया। उन्होंने अमेरिकी मीडिया संस्थानों पर बार-बार “भ्रामक खबरें” फैलाने का आरोप लगाया। यह जानकारी ईरान के सरकारी मीडिया Press TV ने दी।

गालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए अमेरिकी मीडिया आउटलेट एक्सियस (Axios) की हालिया रिपोर्टों का मजाक उड़ाया और व्यंग्यात्मक अंदाज में इसे “Operation Fauxios” (ऑपरेशन फॉक्सियस) कहा। उन्होंने लिखा, “Operation Trust Me Bro विफल हो गया। अब फिर से ऑपरेशन फॉक्सियस के साथ पुराना खेल शुरू हो गया है।”

प्रेस टीवी के अनुसार, ईरानी संसद के स्पीकर ने संकेत दिया कि इस तरह की रिपोर्टें अमेरिकी मीडिया के उस पुराने पैटर्न का हिस्सा हैं, जहां अनाम सूत्रों के हवाले से खबरें चलाई जाती हैं। ईरानी अधिकारियों ने ऐसी खबरों को कई बार बेबुनियाद बताया है और बाद में वे गलत भी साबित हुई हैं।

बातचीत एक प्रारंभिक समझौते की ओर!

इस बीच, वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत कथित तौर पर एक प्रारंभिक समझौते की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसका मकसद मौजूदा संघर्ष को रोकना और व्यापक परमाणु वार्ता के लिए एक ढांचा तैयार करना है। एक्सियस की रिपोर्ट के मुताबिक, कई अमेरिकी अधिकारियों और बातचीत से जुड़े सूत्रों का मानना है कि यह प्रगति संघर्ष शुरू होने के बाद से सबसे अहम घटनाक्रम है, हालांकि अभी अंतिम समझौता नहीं हुआ है।

रिपोर्ट के अनुसार प्रस्तावित ढांचे में एक पेज का 14-बिंदुओं वाला समझौता ज्ञापन शामिल है, जिसका मकसद तत्काल युद्धविराम लागू करना और व्यापक समझौते के लिए 30 दिन की वार्ता अवधि शुरू करना है। इन शर्तों के तहत ईरान अस्थायी रूप से यूरेनियम संवर्धन रोकने पर सहमत हो सकता है। इसके बदले अमेरिका प्रतिबंधों में ढील देने और ईरान की अरबों डॉलर की संपत्तियों को अनफ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू करेगा।

होर्मुज स्ट्रेट खोलने पर बनेगी बात?

इसके अलावा, दोनों देश तनाव कम करने और होर्मुज स्ट्रेट में आवाजाही पर लगे प्रतिबंधों को आसान बनाने की दिशा में भी काम करेंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि कई शर्तें आगे की बातचीत के नतीजों पर निर्भर हैं, जिससे साफ है कि आगे का रास्ता अब भी संघर्ष और अनिश्चितता के जोखिम से भरा हुआ है।

ए​क्सियस के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने हाल ही में होर्मुज स्ट्रेट में सैन्य गतिविधियां कम करने का फैसला इसी कूटनीतिक प्रगति के कारण लिया। इस कूटनीतिक पहल का नेतृत्व अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर कर रहे हैं, जो सीधे और तीसरे पक्ष के माध्यमों से तेहरान के संपर्क में हैं।

अगर यह समझौता औपचारिक रूप लेता है, तो यह आधिकारिक रूप से युद्ध समाप्त होने की घोषणा करेगा और तकनीकी वार्ताओं को इस्लामाबाद या जिनेवा स्थानांतरित किया जा सकता है।

यूरेनियम संवर्धन पर फंचा पेंच!

सबसे बड़ा विवाद ईरान के यूरेनियम संवर्धन पर रोक की समयसीमा को लेकर बना हुआ है। जहां अमेरिका कथित तौर पर 20 वर्षों तक की रोक चाहता है, वहीं ईरान 5 साल का प्रस्ताव दे रहा है। सूत्रों के मुताबिक 12 से 15 वर्षों के बीच समझौता हो सकता है।

अमेरिका यह भी चाहता है कि अगर ईरान शर्तों का उल्लंघन करे, तो रोक की अवधि बढ़ाने का प्रावधान हो। इस अवधि के बाद प्रस्ताव के तहत ईरान को “3.67 प्रतिशत तक सीमित संवर्धन” दोबारा शुरू करने की अनुमति मिल सकती है। ईरान को यह वादा भी करना होगा कि वह परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में आगे नहीं बढ़ेगा।

रिपोर्ट में शामिल एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि समझौते में ऐसा प्रावधान भी हो सकता है, जो ईरान को भूमिगत परमाणु सुविधाएं संचालित करने से रोके और संयुक्त राष्ट्र निरीक्षकों द्वारा अचानक जांच अनिवार्य बनाए। एक और संवेदनशील प्रस्ताव ईरान के उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार को हटाने से जुड़ा है। एक विकल्प यह बताया गया है कि इस सामग्री को अमेरिका भेजा जाए।

बातचीत में प्रगति के बावजूद व्हाइट हाउस सतर्क

हालांकि बातचीत में प्रगति के बावजूद व्हाइट हाउस सतर्क बना हुआ है। उसे लगता है कि ईरानी नेतृत्व के भीतर मतभेद हैं, जिससे अंतिम सहमति बनने में दिक्कत आ सकती है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने तकनीकी चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा, “हमें एक ही दिन में पूरा समझौता लिखने की जरूरत नहीं है।”

उन्होंने कहा कि ऐसा समाधान जरूरी है, जो उन मुद्दों पर स्पष्ट हो जिन पर ईरान बातचीत करने को तैयार है और वह शुरुआती चरण में कितनी रियायतें देने को तैयार है। हालांकि रुबियो ने ईरानी नेतृत्व की विश्वसनीयता पर भी संदेह जताया और कुछ नेताओं को “दिमागी तौर पर पागल” बताया।

रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले 48 घंटे बेहद अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि अमेरिका कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर तेहरान की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है। हालांकि मौजूदा प्रस्ताव को तनाव कम करने की दिशा में नाजुक लेकिन महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, लेकिन रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि समझौता टूटने का खतरा अब भी काफी ज्यादा है।

First Published : May 7, 2026 | 12:54 PM IST