ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका कई महीनों तक भारत और दूसरे देशों पर रूस से तेल खरीद कम करने या रोकने का दबाव डालता रहा, लेकिन अब वही अमेरिका ऐसी खरीद को बढ़ावा दे रहा है | फोटो: PTI
भारत द्वारा रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति की बिसात एक बार फिर गरमा गई है। हाल ही में अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की विशेष छूट (वेवर) दी है, जिस पर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका के इस कदम को उसका ‘दोहरा रवैया’ करार दिया है।
ईरानी विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया पर अपनी भड़ास निकालते हुए कहा कि अमेरिका महीनों तक भारत और अन्य देशों पर रूस से तेल न खरीदने का दबाव बनाता रहा, लेकिन अब वही अमेरिका अपनी जरूरत के हिसाब से इस खरीद को बढ़ावा दे रहा है। अराघची के मुताबिक, वाशिंगटन ने पहले तो देशों को डराने-धमकाने (बुलिंग) की कोशिश की, ताकि वे रूस से तेल आयात बंद कर दें, लेकिन अब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने के नाम पर वह खुद सहयोग मांग रहा है।
इस पूरे विवाद के बीच अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने वाशिंगटन के फैसले का बचाव किया है। उनका कहना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत का रूस से तेल खरीदना ‘जरूरी’ हो गया था। उन्होंने तर्क दिया कि रूसी कच्चे तेल की कई खेपें पहले से ही समुद्र में थीं और भारत के रास्ते में थीं। ऐसे में इन जहाजों को भारत पहुंचने देना एक व्यावहारिक कदम था ताकि वहां की रिफाइनरियों की मांग पूरी हो सके। बेसेंट ने यह भी कहा कि अगर यह छूट न दी जाती, तो ये जहाज चीन जैसे देशों की ओर मुड़ जाते, जिससे वैश्विक बाजार में तेल की किल्लत और बढ़ सकती थी।
दरअसल, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से ऊर्जा सप्लाई चेन काफी प्रभावित हुई है। खासकर ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर सबकी नजरें टिकी हैं, क्योंकि युद्ध की स्थिति में यहां से तेल की आवाजाही रुकने का खतरा है।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और लागत घटाने के लिए रूस से भारी मात्रा में रियायती दरों पर तेल खरीदा है। भारत हमेशा से यह कहता रहा है कि उसकी ऊर्जा जरूरतें किसी राजनीति से नहीं, बल्कि देश के आर्थिक हितों और घरेलू मांग से तय होती हैं।
दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ ईरान अमेरिका की आलोचना कर रहा है, तो दूसरी तरफ उसने भारत के प्रति नरमी भी दिखाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशक्यान के बीच हुई फोन पर बातचीत के बाद, ईरान ने भारत के दो एलपीजी (LPG) जहाजों को स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से सुरक्षित गुजरने का रास्ता दिया है।