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US-Iran War: ईरान का बड़ा हमला, 2 अमेरिकी विमान ढेर; एक जवान लापता

ईरान-अमेरिका युद्ध तेज होने से सैन्य टकराव, तेल संकट और वैश्विक तनाव बढ़ गया है।

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एजेंसियां   
Last Updated- April 04, 2026 | 9:36 AM IST

US-Iran War: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध में हालात और गंभीर हो गए हैं। शुक्रवार को ईरान ने अलग-अलग हमलों में अमेरिका के दो सैन्य विमानों को मार गिराने का दावा किया है। इस घटना के बाद एक अमेरिकी जवान को सुरक्षित निकाल लिया गया, जबकि कम से कम एक सैनिक अभी भी लापता बताया जा रहा है।

यह पहली बार है जब इस संघर्ष के दौरान अमेरिकी विमानों को नुकसान पहुंचा है। युद्ध को शुरू हुए करीब पांच हफ्ते हो चुके हैं और इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने हाल ही में कहा था कि अमेरिका ने ईरान को काफी कमजोर कर दिया है और जल्द ही बाकी कार्रवाई पूरी कर ली जाएगी।

जानकारी के मुताबिक, एक लड़ाकू विमान ईरान के अंदर गिराया गया। उस विमान में सवार एक सदस्य को बचा लिया गया, लेकिन दूसरे की तलाश जारी है। अमेरिकी सेना ने सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है।

व्हाइट हाउस और पेंटागन ने इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। एक मीडिया बातचीत में ट्रंप ने इस मुद्दे पर ज्यादा जानकारी देने से इनकार किया, लेकिन कहा कि इसका असर ईरान के साथ चल रही बातचीत पर नहीं पड़ेगा।

दूसरी ओर, ईरान के सरकारी मीडिया ने दावा किया है कि एक अमेरिकी A-10 अटैक विमान को फारस की खाड़ी में मार गिराया गया।

एक अमेरिकी अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर बताया कि पश्चिम एशिया में एक लड़ाकू विमान के गिरने की घटना सामने आई है। अभी यह साफ नहीं है कि विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ या उसे मार गिराया गया। इसमें ईरान की भूमिका थी या नहीं, इस पर भी कोई पुष्टि नहीं हुई है। विमान में मौजूद चालक दल की स्थिति और यह घटना ठीक कहां हुई, इसकी जानकारी भी तुरंत नहीं मिल सकी।

इस बीच शुक्रवार को ईरान ने पश्चिम एशिया के कई ठिकानों पर हमले किए। इन हमलों से इजरायल और खाड़ी देशों पर दबाव बना हुआ है, जबकि अमेरिका और इजरायल का कहना है कि ईरान की सैन्य क्षमता काफी हद तक कमजोर हो चुकी है।

गिरे हुए विमान को लेकर व्हाइट हाउस और पेंटागन ने सार्वजनिक तौर पर ज्यादा जानकारी साझा नहीं की है। हालांकि पेंटागन ने हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी को जानकारी दी कि इस फाइटर जेट में मौजूद दूसरे सैनिक की स्थिति अभी अज्ञात है।

एक ईमेल में पेंटागन ने यह भी बताया कि उन्हें पश्चिम एशिया में एक विमान को मार गिराए जाने की सूचना मिली है, लेकिन इसके बारे में विस्तार से कुछ नहीं कहा गया।

ईरान के हमलों का असर खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा ढांचे पर भी पड़ा है। साथ ही होरमुज जलडमरूमध्य पर उसकी पकड़ के कारण वैश्विक बाजारों में हलचल बढ़ गई है। इस रास्ते से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल और गैस का गुजरता है। हालात बिगड़ने से शेयर बाजारों में गिरावट आई है, तेल की कीमतें बढ़ गई हैं और आम जरूरत की चीजों, खासकर खाने-पीने की वस्तुओं के महंगे होने का खतरा बढ़ गया है।

ईरान में अमेरिकी लड़ाकू विमान गिरने की खबर, बढ़ सकता है तनाव

ईरान में जारी संघर्ष के बीच एक अहम घटना सामने आई है। खबरों के मुताबिक एक अमेरिकी लड़ाकू विमान गिर गया है, जिससे इलाके में तनाव और बढ़ सकता है।

बचाव अभियान की जानकारी सामने आने से पहले सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो वायरल हुए थे। इनमें पहाड़ी इलाके के ऊपर अमेरिकी ड्रोन, विमान और हेलीकॉप्टर उड़ते हुए दिखाई दिए। एक ईरानी टीवी चैनल ने दावा किया था कि विमान से कम से कम एक पायलट ने पैराशूट के जरिए बाहर निकलने की कोशिश की।

टीवी एंकर ने लोगों से अपील की कि अगर उन्हें कोई दुश्मन पायलट मिले तो उसे पुलिस के हवाले करें। इसके लिए इनाम देने का भी वादा किया गया।

इस संघर्ष के दौरान यह पहली बार बताया जा रहा है कि ईरान की जमीन पर अमेरिका का कोई विमान गिरा है। इसे अमेरिका पर बढ़ते दबाव के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि इससे पहले भी ईरान ने कई बार दुश्मन के विमानों को मार गिराने का दावा किया था, जो सही नहीं पाए गए। लेकिन इस बार पहली बार सरकारी टीवी पर लोगों से सीधे पायलट को खोजने की अपील की गई है।

ईरान के सरकारी मीडिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दावा किया कि उनकी सेना ने अमेरिकी एफ-15ई स्ट्राइक ईगल विमान को मार गिराया है। यह विमान दो लोगों के साथ उड़ता है, जिसमें एक पायलट और एक हथियार विशेषज्ञ होता है।

अमेरिकी वायुसेना के पूर्व सुरक्षा अधिकारी एलन डील के अनुसार इस तरह के विमान में एक खास उपकरण होता है, जो आपात स्थिति में पायलट की लोकेशन बताने में मदद करता है।

वहीं व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति को इस मामले की जानकारी दे दी गई है, लेकिन उन्होंने ज्यादा विवरण नहीं दिया। राष्ट्रपति ने बाद में सोशल मीडिया पर ईरान को लेकर कुछ पोस्ट किए, लेकिन इस घटना का जिक्र नहीं किया।

ईरान ने कुवैत के मीना अल-अहमदी तेल रिफाइनरी पर किया हमला

ईरान और उसके विरोधी देशों के बीच जारी संघर्ष तेज होता जा रहा है। ताजा घटनाओं में ईरान ने कुवैत के मीना अल-अहमदी तेल रिफाइनरी पर हमला किया। कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के अनुसार, हमले के बाद कई जगह आग लग गई, जिसे बुझाने के लिए दमकल कर्मी लगातार कोशिश कर रहे हैं।

कुवैत ने यह भी बताया कि एक डिसैलिनेशन प्लांट को नुकसान पहुंचा है। ऐसे प्लांट खाड़ी देशों में पीने के पानी का मुख्य स्रोत होते हैं, इसलिए इन्हें अब इस युद्ध में अहम निशाना माना जा रहा है।

बहरीन में सायरन बजे, जबकि सऊदी अरब ने दावा किया कि उसने ईरान के कई ड्रोन मार गिराए हैं। वहीं इजरायल ने भी अपनी ओर मिसाइल हमलों की चेतावनी दी है।

संयुक्त अरब अमीरात में एक गैस फील्ड को एहतियात के तौर पर बंद कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि एक मिसाइल को हवा में ही नष्ट किया गया, लेकिन उसका मलबा गैस फील्ड पर गिरा, जिससे आग लग गई।

ईरान की राजधानी तेहरान और इस्फहान शहर के आसपास भी हमलों की खबरें आई हैं, हालांकि यह साफ नहीं हो पाया है कि किन ठिकानों को निशाना बनाया गया।

लेबनान में भी हालात गंभीर बने हुए हैं। इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच जारी संघर्ष के बीच बेरूत के पास जुमे की नमाज के बाद लौट रहे लोगों पर ड्रोन हमला हुआ, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई।

इस युद्ध में अब तक ईरान में 1900 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। एक अमेरिकी संस्था की रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादातर हमले सुरक्षा ठिकानों और सरकारी संस्थानों के आसपास हुए हैं, न कि आम रिहायशी इलाकों पर।

खाड़ी देशों और वेस्ट बैंक में दो दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। इजरायल में 19 लोगों की जान गई है, जबकि 13 अमेरिकी सैनिक भी मारे गए हैं।

लेबनान में हालात और ज्यादा खराब हैं, जहां 1300 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और दस लाख से ज्यादा लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। वहीं इस संघर्ष में 10 इजरायली सैनिकों की भी मौत हुई है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की पकड़, दुनिया भर में बढ़ी चिंता

ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ मजबूत कर रखी है, जिससे वैश्विक व्यापार और तेल सप्लाई पर असर पड़ रहा है। इस रणनीतिक रास्ते पर नियंत्रण को लेकर दुनिया के कई बड़े देश चिंता जता चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। मौजूदा हालात में यह ईरान की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है।

इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक शनिवार को होने की संभावना है, जहां सदस्य देश आगे की रणनीति पर चर्चा कर सकते हैं।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख इस मामले में साफ नहीं दिखा है। उन्होंने एक ओर ईरान को चेतावनी दी है कि जलडमरूमध्य को खोला जाए, वहीं दूसरी ओर अन्य देशों से कहा कि वे अपने तेल के इंतजाम खुद करें। शुक्रवार को सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा कि थोड़ा समय मिलने पर अमेरिका इस रास्ते को खोल सकता है, तेल हासिल कर सकता है और बड़ा मुनाफा कमा सकता है।

इस तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 109 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है, जो युद्ध शुरू होने के बाद से 50 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ चुकी है।

First Published : April 4, 2026 | 9:36 AM IST