ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे गतिरोध को तोड़ने के लिए रविवार को एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। तेहरान ने वाशिंगटन के साथ शांति वार्ता में आ रही रुकावटों को खत्म करने के लिए एक ‘मल्टी-लेयर्ड’ यानी बहु-स्तरीय प्रस्ताव पेश किया है। सूत्रों के मुताबिक, यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच 28 फरवरी को शुरू हुआ युद्ध फिलहाल 8 अप्रैल से ‘होल्ड’ पर है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ट ट्रंप ने इस नए प्रस्ताव पर फिलहाल असंतुष्टि जाहिर की है, जिससे खाड़ी क्षेत्र में शांति की कोशिशों पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।
ईरान की तरफ से आया ताजा प्रस्ताव मुख्य तौर पर चरणबद्ध तरीके से तनाव कम करने (Phased De-escalation) पर आधारित है। ईरान का कहना है कि मौजूदा संघर्ष को संभालने की कोशिशों को उसके परमाणु कार्यक्रम जैसे पुराने और मुश्किल विवादों से अलग रखा जाए। इस प्रस्ताव के तीन बड़े हिस्से हैं:
पहला चरण: सैन्य तनाव कम करना
ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में तनाव कम करने के संकेत दिए हैं। यह समुद्री रास्ता दुनिया में तेल सप्लाई के लिए सबसे जरूरी माना जाता है। ईरान का कहना है कि अगर अमेरिका इस इलाके में अपनी सैन्य मौजूदगी घटाता है और ईरानी तेल निर्यात पर लगी आर्थिक पाबंदियों में कुछ राहत देता है, तो वह इस रास्ते को पूरी तरह सामान्य करने और तनाव कम करने के लिए तैयार है।
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दूसरा चरण: अर्थव्यवस्था और परमाणु मुद्दों को अलग करना
तेहरान की मांग है कि समुद्री व्यापार और तेल सप्लाई से जुड़े मुद्दों को परमाणु वार्ताओं से अलग रखा जाए। ईरान का कहना है कि किसी भी बड़े परमाणु समझौते पर आगे बढ़ने से पहले उसकी आर्थिक स्थिति का सामान्य होना जरूरी है। उसके मुताबिक, यह कदम दोनों पक्षों के बीच भरोसा बहाल करने में मदद करेगा।
तीसरा चरण: परमाणु कार्यक्रम पर शर्तों के साथ नरमी
ईरान ने संकेत दिए हैं कि वह यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) की सीमा तय करने और निगरानी बढ़ाने जैसे मुद्दों पर बातचीत के लिए तैयार है। हालांकि, इसके बदले वह प्रतिबंधों में ठोस राहत और अपने परमाणु अधिकारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देने की मांग कर रहा है।
ईरान की इस पहल पर राष्ट्रपति ट्रंप की प्रतिक्रिया ने शुरुआती उत्साह को कुछ हद तक ठंडा कर दिया। ट्रंप ने साफ कहा, “फिलहाल, वे जो पेशकश कर रहे हैं, उससे मैं संतुष्ट नहीं हूं।” जब उनसे इसकी वजह पूछी गई, तो उन्होंने कहा कि ईरान ऐसी मांगें कर रहा है जिन्हें अमेरिका स्वीकार नहीं कर सकता।
ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरानी नेतृत्व के भीतर आपसी तालमेल की कमी दिखाई दे रही है। संभावित सैन्य कार्रवाई के सवाल पर उन्होंने सीधा जवाब देने से बचते हुए कहा, “दो ही रास्ते हैं, या तो हम उन पर पूरी ताकत से हमला करें, या फिर किसी समझौते की कोशिश करें। मैं दूसरा रास्ता पसंद करूंगा, लेकिन यह नहीं कह सकता कि डील जरूर होगी।”
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शांति वार्ता में सबसे बड़ा विवाद होर्मुज स्ट्रेट और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बना हुआ है। ईरान चाहता है कि संघर्ष विराम के साथ-साथ तेल व्यापार का रास्ता भी सामान्य किया जाए, जबकि अमेरिका का कहना है कि जब तक यह पक्की गारंटी नहीं मिलती कि ईरान परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा, तब तक किसी भी समझौते को मंजूरी देना मुश्किल होगा।
इसके अलावा, ईरान अमेरिका और उसके सहयोगियों से भविष्य में दोबारा सैन्य कार्रवाई न करने की सुरक्षा गारंटी भी मांग रहा है। तेहरान को आशंका है कि अगर समझौता टिकाऊ नहीं हुआ, तो उसे फिर से युद्ध जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणियों पर जवाब देते हुए ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने साफ कहा कि अब फैसला अमेरिका को करना है। उन्होंने कहा, “अब गेंद अमेरिका के पाले में है कि वह कूटनीति का रास्ता चुनता है या टकराव का। ईरान अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा के लिए दोनों ही रास्तों के लिए तैयार है।”
फिलहाल, ट्रंप ने ईरान को एक ‘एकजुट प्रस्ताव’ तैयार करने के लिए दो हफ्ते के संघर्ष विराम को अनिश्चित समय तक बढ़ा दिया है। अब दुनिया की नजरें वॉशिंगटन और तेहरान के अगले कदम पर टिकी हैं, क्योंकि एक गलत फैसला पूरे मध्य पूर्व को फिर से भीषण युद्ध की आग में झोंक सकता है।
(PTI के इनपुट के साथ)