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तेल संकट और कमजोर पर्यटन ने मॉरीशस की अर्थव्यवस्था को झकझोरा, भारत भी रहे सतर्क

पश्चिम एशिया तनाव, महंगा तेल और कमजोर पर्यटन ने बढ़ाई मॉरीशस की चिंता, IMF ने भी घटाया वृद्धि दर अनुमान

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बीएस वेब टीम   
Last Updated- May 14, 2026 | 4:04 PM IST

दुनिया में बढ़ते तनाव और कमजोर होते ग्लोबल माहौल का असर अब मॉरीशस की अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखने लगा है। केयरएज रेटिंग्स अफ्रीका की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक 2026 में मॉरीशस की आर्थिक रफ्तार पहले के मुकाबले धीमी पड़ सकती है। खासकर पश्चिम एशिया में जारी युद्ध जैसे हालात, महंगा होता तेल, कमजोर वैश्विक मांग और पर्यटन सेक्टर में नरमी देश के लिए चिंता बढ़ा रहे हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि मॉरीशस की सरकारी एजेंसी Statistics Mauritius ने 2026 में देश की वृद्धि दर करीब 3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। लेकिन अगर पश्चिम एशिया का तनाव और बढ़ता है या लंबे समय तक चलता है, तो यह वृद्धि दर घटकर करीब 2.3 प्रतिशत तक आ सकती है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF ने भी मॉरीशस को लेकर अपना अनुमान घटा दिया है। IMF ने 2026 के लिए देश की वृद्धि दर का अनुमान 3.4 प्रतिशत से घटाकर 2.8 प्रतिशत कर दिया है। IMF का कहना है कि बाहरी दबाव और वैश्विक अनिश्चितता की वजह से मॉरीशस की अर्थव्यवस्था की रफ्तार कमजोर पड़ सकती है।

हालांकि IMF ने यह भी कहा कि 2025 में मॉरीशस की अर्थव्यवस्था ने ठीक-ठाक प्रदर्शन किया था। उस समय पर्यटन और वित्तीय सेवाओं ने देश को सहारा दिया था और GDP ग्रोथ करीब 3.2 प्रतिशत रही थी। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं और 2026 में चुनौतियां बढ़ सकती हैं।

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पर्यटन सेक्टर पर दिखने लगी कमजोरी

मॉरीशस की अर्थव्यवस्था काफी हद तक पर्यटन पर निर्भर है। लेकिन अब इस सेक्टर में भी दबाव दिखने लगा है। अप्रैल 2026 में देश में आने वाले पर्यटकों की संख्या सालाना आधार पर 3.7 प्रतिशत घट गई। हालांकि साल की शुरुआत अच्छी रही थी। जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच कुल पर्यटकों की संख्या 4 प्रतिशत बढ़कर 4.64 लाख से ज्यादा रही। लेकिन अप्रैल के आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि अब पर्यटन की रफ्तार धीमी पड़ने लगी है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ते हवाई किराये, फ्लाइट कैंसिलेशन और दुनिया भर में बनी आर्थिक अनिश्चितता की वजह से लोग यात्रा पर कम खर्च कर रहे हैं। इसका असर आने वाले महीनों में और ज्यादा दिख सकता है। हालांकि फिलहाल पर्यटन से होने वाली कमाई मजबूत बनी हुई है। मार्च 2026 में पर्यटन से आय 23 प्रतिशत बढ़कर 9.6 अरब मॉरीशियन रुपये पहुंच गई। जनवरी से मार्च के बीच कुल पर्यटन आय 30.2 अरब मॉरीशियन रुपये रही, जो पिछले साल के मुकाबले 28 प्रतिशत ज्यादा है।

रिपोर्ट के मुताबिक इसकी वजह यह रही कि पर्यटक पहले के मुकाबले ज्यादा खर्च कर रहे हैं। इसके अलावा यूरो के मुकाबले मॉरीशियन रुपये की कमजोरी से भी स्थानीय मुद्रा में कमाई बढ़ी है। लेकिन रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि अगर पर्यटकों की संख्या लगातार घटती रही, तो आने वाले समय में पर्यटन से होने वाली कमाई भी कमजोर पड़ सकती है।

मालदीव और सेशेल्स से अभी बेहतर स्थिति

हालांकि चुनौतियों के बावजूद मॉरीशस का प्रदर्शन अब भी अपने कई पड़ोसी पर्यटन देशों से बेहतर माना जा रहा है। जनवरी से अप्रैल 2026 के दौरान मॉरीशस में पर्यटकों की संख्या 4 प्रतिशत बढ़ी, जबकि इसी दौरान सेशेल्स में 13.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वहीं मालदीव में जनवरी से मार्च के बीच पर्यटक संख्या में सिर्फ 0.2 प्रतिशत की मामूली बढ़त हुई। इससे पता चलता है कि मुश्किल हालात के बावजूद मॉरीशस अभी भी क्षेत्रीय पर्यटन बाजार में अपनी पकड़ बनाए हुए है।

महंगाई फिर बढ़ने लगी

मॉरीशस में महंगाई का दबाव भी बढ़ रहा है। अप्रैल 2026 में महंगाई बढ़कर 3.6 प्रतिशत पहुंच गई, जबकि मार्च में यह 2.7 प्रतिशत थी। सबसे ज्यादा असर ट्रांसपोर्ट, होटल-रेस्टोरेंट, बिजली-पानी और रोजमर्रा की सेवाओं में देखने को मिला। रिपोर्ट में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और इसका असर अब घरेलू कीमतों पर दिखने लगा है। मॉरीशस ईंधन के लिए आयात पर काफी निर्भर है, इसलिए तेल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट, बिजली और खाने-पीने की चीजें भी महंगी हो जाती हैं।

इसके अलावा सरकार की तरफ से ईंधन, बिजली और कुछ खाद्य चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी ने भी महंगाई का दबाव बढ़ाया है। रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले महीनों में महंगाई और बढ़ सकती है, हालांकि बाद में इसमें कुछ स्थिरता आने की उम्मीद है।

व्यापार घाटा भी बढ़ा

फरवरी 2026 में मॉरीशस का व्यापार घाटा बढ़कर 16.5 अरब मॉरीशियन रुपये हो गया। एक साल पहले यह 14 अरब रुपये था। इसकी बड़ी वजह निर्यात में गिरावट और आयात में बढ़ोतरी रही। खाने-पीने की चीजों और मशीनरी के निर्यात में तेज गिरावट दर्ज की गई। वहीं दूसरी तरफ मशीनरी, केमिकल और खाद्य उत्पादों का आयात बढ़ गया। हालांकि जनवरी-फरवरी 2026 के दौरान कुल व्यापार घाटे में थोड़ी राहत भी देखने को मिली। इस दौरान व्यापार घाटा घटकर 29.5 अरब मॉरीशियन रुपये रहा, जो पिछले साल 31.2 अरब रुपये था। इसकी वजह आयात मांग में कुछ कमी आना रही।

लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि मॉरीशस की अर्थव्यवस्था आयात पर काफी निर्भर है, इसलिए तेल और दूसरी जरूरी चीजों की वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे देश के व्यापार संतुलन पर पड़ता है।

विदेशी मुद्रा भंडार अभी मजबूत

इतनी चुनौतियों के बावजूद मॉरीशस का विदेशी मुद्रा भंडार अभी मजबूत स्थिति में है। अप्रैल 2026 में देश का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 9.8 अरब डॉलर पर स्थिर रहा। यह भंडार देश के करीब 13.6 महीने के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है। इस दौरान मॉरीशियन रुपये में डॉलर के मुकाबले हल्की कमजोरी भी देखने को मिली। फरवरी से अप्रैल के बीच मुद्रा करीब 1.3 प्रतिशत कमजोर हुई। हालांकि अप्रैल में केंद्रीय बैंक यानी Bank of Mauritius ने बाजार में 1.5 करोड़ डॉलर बेचकर रुपये में ज्यादा गिरावट और उतार-चढ़ाव को रोकने की कोशिश की।

आगे और बढ़ सकती हैं चुनौतियां

केयरएज रेटिंग्स अफ्रीका की रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले महीनों में मॉरीशस के सामने सबसे बड़ी चुनौती महंगा तेल, कमजोर पर्यटन, बढ़ती आयात लागत और वैश्विक अनिश्चितता होगी। अगर पश्चिम एशिया का तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर पर्यटन, व्यापार, महंगाई और मुद्रा पर और ज्यादा दिख सकता है। ऐसे में 2026 मॉरीशस की अर्थव्यवस्था के लिए आसान साल नहीं रहने वाला।

First Published : May 14, 2026 | 3:57 PM IST