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युद्ध का बड़ा असर: 3 साल बाद तेल की कीमत 100 डॉलर के पार, दुनिया में बढ़ी चिंता

स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज में शिपिंग प्रभावित होने से ब्रेंट 107.97 डॉलर और WTI 106 डॉलर के पार, महंगाई और वैश्विक बाजार पर असर की चिंता बढ़ी

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एजेंसियां   
Last Updated- March 09, 2026 | 8:23 AM IST

Oil Prices: पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण तेल की सप्लाई और शिपिंग प्रभावित हो रही है। इसी वजह से रविवार को कच्चे तेल की कीमत साढ़े तीन साल बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज में कारोबार शुरू होने के बाद 107.97 डॉलर प्रति बैरल हो गई। यह शुक्रवार के बंद भाव 92.69 डॉलर से लगभग 16.5% ज्यादा है। वहीं अमेरिका में बनने वाला वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चा तेल करीब 106.22 डॉलर प्रति बैरल पर बिक रहा था। यह शुक्रवार के बंद भाव 90.90 डॉलर से लगभग 16.9% अधिक है।

Oil Prices: पिछले हफ्ते भी तेज बढ़ोतरी

पिछले हफ्ते ही अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत 36% और ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 28% बढ़ चुकी है। युद्ध अब दूसरे हफ्ते में पहुंच गया है और इससे उन इलाकों पर असर पड़ा है जो दुनिया में तेल और गैस की सप्लाई के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।

रिसर्च फर्म रिस्टैड एनर्जी के अनुसार, हर दिन लगभग 1.5 करोड़ बैरल तेल (दुनिया के कुल तेल का करीब 20%) स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज से होकर भेजा जाता है। लेकिन ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों के खतरे के कारण तेल टैंकरों की आवाजाही लगभग रुक गई है। इस रास्ते से सऊदी अरब, कुवैत, इराक, कतर, बहरीन, यूएई और ईरान का तेल और गैस बाहर भेजा जाता है। निर्यात कम होने से इराक, कुवैत और यूएई ने तेल उत्पादन घटा दिया है क्योंकि उनके भंडारण टैंक भर रहे हैं। इसके अलावा युद्ध शुरू होने के बाद ईरान, इजरायल और अमेरिका ने तेल और गैस से जुड़े ठिकानों पर भी हमले किए हैं, जिससे सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।

Oil Prices: पहले कब पार हुआ था 100 डॉलर

अमेरिकी कच्चा तेल आखिरी बार 30 जून 2022 को 105.76 डॉलर प्रति बैरल पहुंचा था। वहीं ब्रेंट कच्चा तेल 29 जुलाई 2022 को 104 डॉलर तक गया था।

1 मार्च को इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले के बाद से तेल की कीमतों में तेजी आई है। इससे दुनिया के वित्तीय बाजारों में चिंता बढ़ गई है कि महंगा तेल महंगाई बढ़ा सकता है और लोगों का खर्च कम हो सकता है।

अमेरिका में रविवार को पेट्रोल की कीमत 3.45 डॉलर प्रति गैलन पहुंच गई, जो एक हफ्ते पहले से 47 सेंट ज्यादा है। डीजल की कीमत करीब 4.6 डॉलर प्रति गैलन हो गई, जो एक हफ्ते में 83 सेंट बढ़ी है।

अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा कि पेट्रोल की कीमत जल्द ही 3 डॉलर प्रति गैलन से नीचे आ सकती है। उन्होंने कहा कि अगर सबसे खराब स्थिति भी होती है तो यह संकट कुछ हफ्तों का होगा, महीनों का नहीं।

ईरान ने कहा कि रविवार को तेहरान में तेल डिपो और पेट्रोलियम ट्रांसफर टर्मिनल पर इजरायल के हमले में 4 लोगों की मौत हो गई। इजरायल की सेना का कहना है कि इन ठिकानों का इस्तेमाल ईरान की सेना मिसाइल चलाने के लिए ईंधन देने में कर रही थी।

Oil Prices Hike: चीन पर भी असर संभव

ईरान हर दिन लगभग 16 लाख बैरल तेल निर्यात करता है, जिसमें से ज्यादातर चीन को जाता है। अगर यह सप्लाई बाधित होती है तो चीन को दूसरे देशों से तेल खरीदना पड़ सकता है, जिससे कीमत और बढ़ सकती है।

युद्ध के दौरान प्राकृतिक गैस की कीमत भी बढ़ी है। रविवार को यह करीब 3.33 डॉलर प्रति 1,000 क्यूबिक फीट पर थी, जो शुक्रवार से 4.6% ज्यादा है।

शेयर बाजार पर दबाव

तेल महंगा होने से शेयर बाजार पर भी दबाव दिखा। अमेरिका के S&P 500 फ्यूचर्स 1.6%, डाउ फ्यूचर्स 1.8% और नैस्डैक फ्यूचर्स 1.5% नीचे थे। शुक्रवार को भी अमेरिकी बाजार में गिरावट रही थी। S&P 500 में 1.3%, नैस्डैक में 1.6% गिरावट आई, जबकि डाउ जोन्स दिन में करीब 945 अंक गिरकर बाद में लगभग 450 अंक की गिरावट के साथ बंद हुआ।

First Published : March 9, 2026 | 8:07 AM IST