अंतरराष्ट्रीय

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच तेल 110 डॉलर के पार, अमेरिकी बाजार में भारी गिरावट

ट्रंप के सख्त बयान और भू-राजनीतिक तनाव से तेल बाजार में फिर मची उथल-पुथल

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बीएस वेब टीम   
Last Updated- May 18, 2026 | 8:46 AM IST

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार उछाल आया है और अमेरिकी शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। बढ़ती बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक तनाव की वजह से निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड करीब 2 फीसदी चढ़कर 111.4 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी कच्चा तेल WTI भी 2.4 फीसदी से ज्यादा बढ़कर 108 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

ट्रंप के बयान से बढ़ी बाजार की बेचैनी

बाजार में तनाव उस समय और बढ़ गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर सख्त बयान दिया। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा, ‘घड़ी तेजी से चल रही है।’ इसके साथ ही उन्होंने ईरान से ‘जल्दी कदम उठाने’ को कहा। ट्रंप के इस बयान के बाद निवेशकों की चिंता और बढ़ गई। बाजार को डर है कि अगर पश्चिम एशिया में हालात और बिगड़े तो तेल सप्लाई पर असर पड़ सकता है।

तेल की कीमतों में तेजी के बीच अमेरिकी शेयर बाजार कमजोर बंद हुए। सबसे ज्यादा दबाव टेक्नोलॉजी और ग्रोथ शेयरों पर देखने को मिला। अमेरिका के 30 साल के ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड एक साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई, जिससे निवेशकों ने जोखिम वाले शेयरों से दूरी बनानी शुरू कर दी। नैस्डैक कंपोजिट 1.5 फीसदी टूट गया, जो मार्च के बाद इसकी सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट रही। वहीं डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज करीब 540 अंक गिरकर बंद हुआ।

चीन-अमेरिका बातचीत से भी नहीं मिली राहत

ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बातचीत भी बाजार को राहत नहीं दे पाई। निवेशकों को उम्मीद थी कि दोनों देशों के बीच बातचीत से तनाव कम होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब बाजार में राजनीतिक और आर्थिक दोनों तरह के जोखिम बढ़ते दिख रहे हैं।

शुरुआती संकेत बता रहे हैं कि आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। डाउ जोंस फ्यूचर्स करीब 280 अंक नीचे कारोबार करते दिखे। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती तेल कीमतें, भू-राजनीतिक तनाव और सख्त वित्तीय हालात वैश्विक बाजारों के लिए बड़ी चुनौती बन रहे हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ी चिंता

बाजार की सबसे बड़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है। यह दुनिया का बेहद अहम तेल मार्ग है, जहां से करीब 20 फीसदी वैश्विक तेल सप्लाई गुजरती है। अगर यहां किसी तरह की रुकावट आती है तो दुनिया भर में तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है और महंगाई बढ़ सकती है।

इससे पहले 30 अप्रैल को ब्रेंट क्रूड करीब 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। वहीं 9 मार्च को पश्चिम एशिया तनाव बढ़ने के दौरान इसमें 27 फीसदी तक की तेजी आई थी और कीमत 119 डॉलर प्रति बैरल पार चली गई थी। हालांकि मौजूदा कीमतें अभी भी जुलाई 2008 के रिकॉर्ड स्तर 147 डॉलर प्रति बैरल से नीचे हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान 2022 में तेल की कीमतें 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं।

First Published : May 18, 2026 | 8:46 AM IST