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BRICS बैठक में ईरान और UAE के बीच तीखी बहस, माहौल संभालने के लिए रूस को करना पड़ा दखल

ईरान ने अमेरिका-इजरायल की कार्रवाई की निंदा करने की मांग की, जबकि UAE ने ईरान पर सीधे आरोप लगाए

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अर्चिस मोहन   
Last Updated- May 15, 2026 | 8:52 AM IST

नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय ब्रिक्स विदेश मंत्रियों के सम्मेलन में पहले दिन गुरुवार को पश्चिम एशिया में युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी के मुद्दे हावी रहे। सम्मेलन में ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के विदेश मामलों के राज्य मंत्री खलीफा शाहीन अल मरार के बीच तीखी बहस हुई। इससे सम्मेलन के पहले दिन माहौल तनावपूर्ण रहा। बाद में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के हस्तक्षेप के बाद माहौल थोड़ा शांत हुआ।

‘ब्रिक्स’ समूह (जिसमें मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे) का 2024 में विस्तार हुआ और इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान और यूएई शामिल हुए, जबकि इंडोनेशिया 2025 में शामिल हुआ। ब्रिक्स विदेश मंत्रियों ने दोपहर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। चर्चा के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ब्रिक्स सदस्यों के बीच एकजुटता की अपील की। ईरान के विदेश मंत्री अरागची ने समूह से अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ चलाए जा रहे सैन्य अभियान की निंदा करने का अनुरोध किया और आम सहमति बनाने के लिए भारत का समर्थन मांगा।

प्रधानमंत्री मोदी शुक्रवार को यूएई की यात्रा पर जा रहे हैं। 5 मई को प्रधानमंत्री ने यूएई के फुजैरा पर हुए हमले की निंदा की मगर ईरान का नाम नहीं लिया। भारत ने यूएई और ईरान के साथ अपने संबंधों को संतुलित रखने का प्रयास किया है। मगर उसे इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि यूएई 45 लाख भारतीय यूएई में रहते और काम करते हैं जबकि ईरान में यह संख्या काफी कम है। इनमें भी ज्यादातर 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद वापस लौट चुके हैं।

यूएई के प्रतिनिधि द्वारा ईरान द्वारा बुनियादी ढांचे पर किए गए हमलों का मुद्दा उठाने के बाद सम्मेलन में आम सहमति बनने की संभावना कम है। बुधवार को ईरान के उप-विदेश मंत्री (कानूनी एवं अंतरराष्ट्रीय मामलों के मंत्री) काजेम गरीबाबादी ने मीडिया को बताया कि ब्रिक्स समूह का एक सदस्य देश (जिसका उन्होंने नाम नहीं बताया) समूह पर ईरान की निंदा करने के लिए दबाव डाल रहा है जिससे संघर्ष पर आम सहमति में बाधा आ रही है।

रूस के विदेश मंत्री लावरोव ने भी प्रधानमंत्री मोदी से अलग से मुलाकात की। दोनों ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया की स्थिति सहित विभिन्न क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। ईरान के विदेश मंत्री अरागची ने भी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल से अलग से मुलाकात की।

इस मुलाकात के दौरान अरागची ने ब्रिक्स सदस्य देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सभी जिम्मेदार सदस्यों से अमेरिका और इजरायल द्वारा अंतरराष्ट्रीय कानून के ‘उल्लंघन’ की निंदा करने का अनुरोध किया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संस्थानों का राजनीतिकरण और युद्ध भड़काने पर रोक लगाने तथा संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन करने वालों को मिलने वाली छूट समाप्त करने के लिए ठोस कार्रवाई करने का भी आग्रह किया।

अरागची ने कहा,‘हमारा मानना है कि ब्रिक्स एक अधिक न्यायपूर्ण, संतुलित और मानवीय वैश्विक व्यवस्था को आकार देने में प्रमुख स्तंभों में से एक बन सकता है। इसे एक ऐसी संस्था का शक्ल लेना चाहिए जिसमें ताकत के जोर पर कोई देश अपना हित नहीं साध पाए। जो राष्ट्र अपनी गरिमा और स्वतंत्रता के लिए खड़े होते हैं उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है मगर वे कभी पराजित नहीं होंगे।’

उन्होंने कहा कि यूएई अमेरिका के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ सैन्य अभियानों में सीधे तौर पर शामिल है। अरागची ने कहा कि ईरान ने यूएई सहित खाड़ी देशों पर हमले करके इसका जवाब दिया। भारत के विदेश मंत्री जयशंकर ने पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज स्ट्रेट में ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री स्थिरता पर इसके प्रभाव पर गंभीर चिंता व्यक्त की और ब्रिक्स देशों से भू-राजनीतिक उथल-पुथल और एकतरफा दबाव वाले प्रतिबंधों से निपटने के लिए व्यावहारिक तरीके विकसित करने का आग्रह किया। जयशंकर ने किसी भी देश का नाम लिए बिना कहा कि संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान अंतरराष्ट्रीय संबंधों का आधार होना चाहिए।

विदेश मंत्री ने कहा कि ‘शांति टुकड़ों में नहीं हो सकती’ और ‘अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करना, नागरिकों की रक्षा करना और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने से बचना आवश्यक है।’ जयशंकर ने कहा,‘पश्चिम एशिया में संघर्ष विशेष ध्यान देने योग्य है। निरंतर तनाव, समुद्री यातायात के लिए जोखिम और ऊर्जा बुनियादी ढांचे में व्यवधान स्थिति की गंभीरता को उजागर करते हैं।’

उन्होंने गाजा संघर्ष का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने लेबनान और सीरिया के सामने आने वाली चुनौतियों के साथ-साथ सूडान, यमन और लीबिया में मौजूदा स्थिति का भी उल्लेख किया।

First Published : May 15, 2026 | 8:52 AM IST