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US-Iran War: चीन यात्रा से पहले ट्रंप की ईरान को खुली चेतावनी, बोले- ‘डील करो वरना तबाही तय’

US-Iran War: अमेरिका-ईरान तनाव और ट्रंप की चेतावनी के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते संकट से वैश्विक तेल बाजार और भू-राजनीति पर गंभीर असर पड़ रहा है।

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एजेंसियां   
Last Updated- May 13, 2026 | 4:05 PM IST

US-Iran War: अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को लेकर एक बार फिर सख्त बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि ईरान को अमेरिका के साथ “अच्छा समझौता” करना होगा, नहीं तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार पहले से ही तनाव में हैं।

चीन यात्रा से पहले बढ़ा कूटनीतिक तनाव

ट्रंप जल्द ही चीन की यात्रा पर जाने वाले हैं। इस दौरान उनकी मुलाकात चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping से होनी है। माना जा रहा है कि इस बातचीत में ईरान और ऊर्जा संकट प्रमुख मुद्दा रहेगा।

चीन, ईरान का सबसे बड़ा तेल खरीदार है और दोनों देशों के बीच मजबूत व्यापारिक संबंध भी हैं।

ईरान पर “समझौता या परिणाम” की चेतावनी

ट्रंप ने बयान में कहा कि ईरान के पास दो ही विकल्प हैं- या तो वह अमेरिका के साथ समझौता करे या फिर उसे गंभीर नुकसान उठाने के लिए तैयार रहना होगा।

Strait of Hormuz में तनाव के कारण वैश्विक तेल बाजार प्रभावित हुआ है। यह वही महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है जिससे दुनिया के बड़े हिस्से का तेल व्यापार होता है।

तनाव बढ़ने के बाद ऊर्जा कीमतों में तेजी देखी गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिंता बढ़ गई है।

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अमेरिका-चीन बातचीत पर नजर

ट्रंप और शी जिनपिंग की होने वाली बातचीत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान मुद्दा, तेल आपूर्ति और मध्य पूर्व में स्थिरता इस बैठक के मुख्य एजेंडे में रह सकते हैं।

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव तेल कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। ऐसे में पूरी दुनिया की नजर इस कूटनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन ने चीन से भी अपील की है कि वह ईरान पर दबाव बनाए ताकि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए तैयार हो जाए।

नाजुक सीजफायर, लेकिन तनाव बरकरार

अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर को एक महीने से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन स्थिति अभी भी बेहद संवेदनशील बनी हुई है। डोनाल्ड ट्रंप ने इस सीजफायर को “बहुत कमजोर स्थिति” में बताया है। उनका कहना है कि यह समझौता किसी भी समय टूट सकता है।

ईरान ने साफ कर दिया है कि वह तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह नहीं खोलेगा जब तक अमेरिका अपनी नौसैनिक घेराबंदी खत्म नहीं करता। तेहरान की मांग है कि अमेरिका पहले ईरानी बंदरगाहों पर लगी पाबंदी हटाए और अरबों डॉलर की फ्रीज की गई संपत्तियों को भी जारी करे।

दूसरी तरफ अमेरिका और उसके सहयोगी इन शर्तों को मानने के मूड में नहीं दिख रहे हैं, जिससे गतिरोध और बढ़ गया है।

खार्ग आइलैंड से तेल निर्यात पर संकट

रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खार्ग आइलैंड से तेल शिपमेंट लगभग रुकने की स्थिति में पहुंच सकता है। माना जा रहा है कि समुद्री नाकेबंदी के कारण वहां से व्यापार प्रभावित हो रहा है, जिससे ईरानी अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है।

युद्धविराम से पहले अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई में ईरान की सैन्य ताकत को काफी नुकसान पहुंचा था। इसके बावजूद नई खुफिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान की सैन्य क्षमता अभी भी काफी हद तक बरकरार है।

न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, गुप्त खुफिया जानकारी में बताया गया है कि ईरान के पास होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास स्थित 33 में से 30 मिसाइल साइट्स अभी भी सक्रिय हैं। साथ ही, उसके पास पहले के मुकाबले लगभग 70 प्रतिशत मिसाइल भंडार मौजूद है।

ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स की विश्लेषक दिना एसफंदीरी (Dina Esfandiary) और बीका वॉसर (Becca Wasser) ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच स्थिति अभी भी काफी दूर है और किसी भी समझौते की संभावना कमजोर दिख रही है। उनके अनुसार, अगर दोनों पक्ष अपने रुख में नरमी नहीं दिखाते हैं तो स्थायी शांति समझौता मुश्किल रहेगा और बीच-बीच में तनाव बढ़ने की स्थिति बनी रह सकती है।

बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड थोड़ा गिरकर 107 डॉलर प्रति बैरल से थोड़ा ऊपर कारोबार कर रहा था। हालांकि, पूरे सप्ताह के दौरान इसमें अब भी 5 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त बनी हुई है।

होर्मुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति पर असर

वैश्विक ऊर्जा बाजार पर सबसे बड़ा असर होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति से पड़ रहा है। यह वही अहम समुद्री रास्ता है जिससे दुनिया के कुल तेल और एलएनजी का लगभग एक-पांचवां हिस्सा गुजरता है। इस मार्ग पर तनाव और संभावित बाधाओं की वजह से आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने चेतावनी दी है कि दुनिया भर में तेल के भंडार तेजी से कम हो रहे हैं। एजेंसी के अनुसार यह गिरावट रिकॉर्ड स्तर पर है और आने वाले महीनों में भी दबाव बना रह सकता है। इससे ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और बढ़ने की आशंका है।

अमेरिका में युद्ध खर्च पर सवाल

अमेरिका में संसद के भीतर युद्ध पर बढ़ते खर्च को लेकर सवाल उठाए गए हैं। रक्षा विभाग से इस खर्च का पूरा ब्यौरा मांगा गया, लेकिन रक्षा मंत्री ने स्पष्ट आंकड़े देने से इनकार कर दिया।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार अब तक इस संघर्ष की अनुमानित लागत करीब 29 अरब डॉलर तक पहुंच गई है, जो पहले बताए गए 25 अरब डॉलर के अनुमान से अधिक है। सांसदों ने पहले इस अनुमान को कम और अवास्तविक बताया था।

First Published : May 13, 2026 | 4:05 PM IST