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Russian Oil: तेल संकट के बीच अमेरिका का बड़ा यू-टर्न, समुद्र में जा रहे रूसी तेल को खरीदने की दी मंजूरी

मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच तेल की कीमतें काबू करने के लिए अमेरिका का नया कदम

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एजेंसियां   
Last Updated- March 13, 2026 | 8:26 AM IST

Russian Oil Import: मध्य पूर्व में जारी युद्ध के कारण तेल की कीमतों में तेज उछाल का खतरा बढ़ गया है। इसी दबाव के बीच अमेरिका ने एक बड़ा कदम उठाते हुए समुद्र में पहले से जा रहे रूसी तेल के कार्गो को खरीदने की दूसरी बार अनुमति दे दी है। अमेरिकी सरकार का कहना है कि यह फैसला तेल बाजार में बढ़ते तनाव और कीमतों को काबू में रखने के लिए किया गया है।

केवल पहले से लदे Russian Oil को ही छूट

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यह फैसला “सीमित और थोड़े समय के लिए” है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह छूट केवल उस रूसी तेल पर लागू होगी जो 12 मार्च से पहले जहाजों पर लादा जा चुका है और पहले से समुद्र में जा रहा है। बेसेंट ने कहा कि इस फैसले से रूस की सरकार को कोई बड़ा आर्थिक फायदा नहीं होगा।

भारत को पहले ही मिल चुकी थी छूट

अमेरिका इससे पहले भारत को भी ऐसी ही एक महीने की छूट दे चुका है। यह छूट 5 मार्च से पहले जहाजों पर लदे रूसी कच्चे तेल के लिए दी गई थी। हालांकि नई व्यवस्था में एक साफ शर्त रखी गई है- ईरान इस तेल को नहीं खरीद सकेगा।

तेल बाजार को शांत करने की कोशिश

तेल और ईंधन की तेजी से बढ़ती कीमतों को रोकने के लिए अमेरिका कई विकल्पों पर विचार कर रहा है। इनमें एक बड़ा कदम यह भी हो सकता है कि एक पुराने समुद्री कानून को अस्थायी रूप से हटाया जाए। इस कानून के मुताबिक अमेरिका के बंदरगाहों के बीच सामान ले जाने के लिए अमेरिकी जहाजों का ही इस्तेमाल करना जरूरी है।

इन सभी कोशिशों के बावजूद तेल बाजार में दबाव बना हुआ है। शुक्रवार को एशियाई कारोबार के शुरुआती समय में ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई।

Russian Oil पर लगे प्रतिबंध ढीले पड़ सकते हैं

स्कॉट बेसेंट पहले भी संकेत दे चुके हैं कि अगर तेल की कीमतें बहुत तेजी से बढ़ती हैं तो अमेरिका रूस के तेल पर लगे कुछ प्रतिबंधों को ढीला कर सकता है। ब्रुकिंग्स संस्थान के वरिष्ठ फेलो रॉबिन ब्रूक्स का कहना है कि अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों पर हमले बढ़ाता है, तो तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। ऐसे में रूस पर लगे प्रतिबंध हटाने का दबाव भी बढ़ेगा।

बेसेंट ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका के इस कदम से रूस को जो भी फायदा होगा, वह “दुर्भाग्यपूर्ण लेकिन अस्थायी” होगा। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि रूस को इससे बहुत कम समय के लिए ही लाभ मिलेगा।

First Published : March 13, 2026 | 8:17 AM IST