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US-Iran Peace Talks: ट्रंप का बड़ा दावा, ईरान बातचीत से पीछे हट रहा; होर्मुज संकट से बढ़ा वैश्विक तेल संकट

अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता रुकने से पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है, जिससे वैश्विक तेल-गैस आपूर्ति और कीमतों पर बड़ा असर पड़ा है।

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एजेंसियां   
Last Updated- April 26, 2026 | 2:52 PM IST

US-Iran Peace Talks: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता एक बार फिर रुक गई है। तनाव के बीच दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ाने की कोशिशें फिलहाल सफल नहीं हो पाई हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने अपने शीर्ष दूत जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ की पाकिस्तान यात्रा रद्द कर दी है। पाकिस्तान इस बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। ट्रंप ने बाद में कहा कि ईरान की तरफ से कुछ प्रस्ताव दिए गए थे, लेकिन वे पर्याप्त नहीं थे।

वहीं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने साफ कहा है कि उनका देश तब तक किसी भी बातचीत में शामिल नहीं होगा, जब तक उस पर धमकी या नाकेबंदी का दबाव रहेगा।

हालांकि अप्रैल की शुरुआत से संघर्षविराम काफी हद तक बना हुआ है, लेकिन दोनों देशों के बीच तनाव अभी भी जारी है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य पर नाकेबंदी के कारण स्थिति गंभीर बनी हुई है। यह मार्ग दुनिया के करीब पांचवें हिस्से के तेल व्यापार के लिए बेहद अहम है और इसके बाधित होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ा है।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने इस स्थिति को अब तक का सबसे बड़ा तेल आपूर्ति संकट बताया है। इसके चलते दुनिया की आर्थिक विकास दर के अनुमान भी घटाए जा रहे हैं।

इस बीच ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यात्रा में समय बर्बाद हो रहा है और बातचीत के लिए ईरान को खुद संपर्क करना चाहिए।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शनिवार को पाकिस्तान में मध्यस्थों से मुलाकात की और अमेरिकी प्रतिनिधियों के आने से पहले ही इस्लामाबाद छोड़ दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि अभी यह साफ नहीं है कि अमेरिका बातचीत को लेकर कितना गंभीर है। वे रविवार को फिर से इस्लामाबाद लौट सकते हैं।

इसी बीच अमेरिकी सेना ने शनिवार को अरब सागर में एक प्रतिबंधित जहाज को रोक लिया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, इस कार्रवाई में एक नौसैनिक हेलिकॉप्टर भी शामिल था। जहाज को वापस ईरान की ओर लौटने के लिए कहा गया और वह अमेरिकी निर्देशों का पालन करते हुए लौट गया। अब तक इस अभियान के दौरान करीब 37 जहाजों को उनके रास्ते से मोड़ा जा चुका है।

दूसरी ओर, ईरान भी होर्मुज जलडमरूमध्य में अपनी रणनीति के तहत सख्ती बढ़ा रहा है। वहां उसकी छोटी और तेज गति वाली नावों की तैनाती के कारण समुद्री यातायात लगभग ठप हो गया है। पहले जहां रोजाना करीब 135 जहाज इस रास्ते से गुजरते थे, अब संख्या लगभग शून्य के बराबर पहुंच गई है।

तेल क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्थिति से वैश्विक तेल आपूर्ति को बड़ा झटका लग सकता है। एक अनुमान के अनुसार, करीब एक अरब बैरल तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और स्थिति सामान्य होने में लंबा समय लग सकता है।

ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत शुक्रवार को बढ़कर 105.33 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई, जो संघर्ष शुरू होने से पहले 72.48 डॉलर थी। इसी तरह अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत भी बढ़कर करीब 4 डॉलर प्रति गैलन हो गई, जो फरवरी के अंत में लगभग 3 डॉलर थी।

इस संघर्ष की वजह से दुनिया की करीब 20 प्रतिशत लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) सप्लाई पर भी असर पड़ा है। इसके चलते यूरोप में गैस की कीमतें पहले की तुलना में लगभग एक तिहाई ज्यादा हो गई हैं।

उधर, क्षेत्र में हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शनिवार को सेना को लेबनान में हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर हमले करने का आदेश दिया। इसके बाद इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में हथियार भंडारण केंद्रों पर हमले किए। इससे पहले लेबनान की ओर से इजरायल पर दो प्रोजेक्टाइल दागे जाने की भी खबर आई थी।

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने 23 अप्रैल को घोषणा की थी कि इजरायल और लेबनान के बीच संघर्षविराम को तीन हफ्ते के लिए बढ़ाया जाएगा, ताकि दोनों देशों के बीच स्थायी शांति समझौते की बातचीत आगे बढ़ सके।

यह संघर्षविराम 17 अप्रैल को शुरू हुआ था, जो लगभग दो महीने की लड़ाई के बाद लागू हुआ था। यह लड़ाई तब शुरू हुई जब हिज्बुल्लाह ने ईरान पर हुए अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के जवाब में उत्तरी इजरायल के इलाकों को निशाना बनाया था। इसके बाद तनाव और बढ़ गया जब इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में घुसकर वहां एक “सुरक्षा क्षेत्र” बनाने की कोशिश की।

First Published : April 26, 2026 | 2:52 PM IST