अंतरराष्ट्रीय

US-Iran War: वेंस पहुंचे पाकिस्तान, ईरान भी तैयार… बातचीत से पहले ही सख्त वार्निंग, माहौल बेहद गरम

US-Iran: अमेरिका-ईरान तनाव के बीच इस्लामाबाद में शुरू होने जा रही अहम वार्ता से समाधान की उम्मीद, लेकिन मतभेद अब भी गहरे।

Published by
बीएस वेब टीम   
Last Updated- April 11, 2026 | 8:54 AM IST

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच एक अहम कूटनीतिक पहल शुरू हो रही है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (US Vice President JD Vance) शुक्रवार को पाकिस्तान के इस्लामाबाद के लिए रवाना हुए, जहां वे ईरान के साथ बातचीत की अगुवाई करेंगे। इस पहल का मकसद करीब छह हफ्तों से चल रहे टकराव को खत्म करने का रास्ता तलाशना है।

रवाना होने से पहले वेंस ने साफ संदेश देते हुए कहा, “अगर ईरान ईमानदारी से बातचीत के लिए तैयार है, तो हम भी खुले दिल से आगे बढ़ने को तैयार हैं। लेकिन अगर वे हमें धोखा देने की कोशिश करेंगे, तो हमारी बातचीत टीम ऐसा बर्दाश्त नहीं करेगी।”

दरअसल, राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने वेंस को यह जिम्मेदारी सौंपी है। खास बात यह है कि वेंस पहले इस संघर्ष को लेकर ज्यादा आक्रामक रुख के पक्ष में नहीं रहे हैं और लंबे समय से विदेशी सैन्य हस्तक्षेप पर सवाल उठाते रहे हैं।

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने बातचीत को लेकर काफी स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं, हालांकि उन्होंने इनका खुलासा नहीं किया। वेंस ने अपने साथ यात्रा कर रहे पत्रकारों के सवालों के जवाब भी नहीं दिए।

इस बीच, हालात काफी नाजुक बने हुए हैं। अस्थायी युद्धविराम कभी भी टूट सकता है। ईरान की मांगों और अमेरिका तथा उसके सहयोगी इज़राइल के रुख के बीच बड़ा अंतर नजर आ रहा है, जिससे समझौते की संभावना फिलहाल मुश्किल दिख रही है।

अमेरिका में भी इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है। माना जा रहा है कि वेंस आने वाले समय में राष्ट्रपति पद की दावेदारी कर सकते हैं, ऐसे में इस संकट का जल्द समाधान उनके लिए भी अहम हो सकता है।

वेंस जब पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंच रहे थे, उसी दौरान ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकिर कालिबाफ ने सोशल मीडिया पर कहा कि लेबनान में युद्धविराम और ईरान की रोकी गई संपत्तियों की रिहाई, बातचीत शुरू होने से पहले पूरी होनी चाहिए।

गौरतलब है कि लेबनान में इजराइल, ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह के ठिकानों को निशाना बना रहा है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।

हालांकि क़ालिबाफ ने अपने बयान में इससे ज्यादा कोई जानकारी नहीं दी।

ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय बाद एक अहम कूटनीतिक हलचल देखने को मिल रही है। शनिवार से शुरू होने वाली बातचीत से पहले ईरान का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंच चुका है। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मोहम्मद बाकर क़ालिबाफ कर रहे हैं।

ईरानी टीम में विदेश मंत्री अब्बास अराघची, सुप्रीम नेशनल डिफेंस काउंसिल के सचिव अली अकबर अहमदियान, सेंट्रल बैंक के गवर्नर अब्दोलनासेर हेमती और कई सांसद भी शामिल हैं। ईरान के सरकारी टीवी के मुताबिक, यह बातचीत दोनों देशों के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में इन वार्ताओं को निर्णायक मोड़ बताया। उन्होंने कहा कि यह बातचीत दोनों पक्षों के रिश्तों के भविष्य को तय कर सकती है।

अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस बातचीत में हिस्सा ले रहे हैं। उनके साथ ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और दामाद जारेड कुशनर भी मौजूद हैं। ये तीनों इससे पहले ईरान के प्रतिनिधियों के साथ तीन दौर की अप्रत्यक्ष बातचीत कर चुके हैं। इन चर्चाओं का मकसद ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को लेकर अमेरिका की चिंताओं को दूर करना और पश्चिम एशिया में सक्रिय सशस्त्र समूहों को लेकर मुद्दों का समाधान निकालना रहा है।

हालांकि व्हाइट हाउस ने अब तक यह साफ नहीं किया है कि यह बातचीत सीधे होगी या फिर अप्रत्यक्ष तरीके से। बैठक के एजेंडे और नतीजों को लेकर भी ज्यादा जानकारी साझा नहीं की गई है।

इसके बावजूद, वेंस का इस बातचीत में शामिल होना एक अहम संकेत माना जा रहा है, क्योंकि 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से दोनों देशों के बीच सीधे उच्चस्तरीय संपर्क बहुत कम रहा है। इससे पहले 2013 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी से फोन पर बातचीत की थी, जो उस दौर का एक बड़ा कूटनीतिक कदम माना गया था।

अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में घोषित अस्थायी युद्धविराम के बाद भी हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं। मंगलवार शाम व्हाइट हाउस और ईरान की ओर से सीजफायर की घोषणा होते ही दोनों पक्ष इसकी शर्तों को लेकर आमने-सामने आ गए।

ईरान का कहना है कि इस युद्धविराम में लेबनान में जारी इजरायल की सैन्य कार्रवाई को भी शामिल किया जाना चाहिए। लेकिन इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया कि यह समझौता लेबनान पर लागू नहीं होता। इसके बाद भी वहां इजरायली ऑपरेशन जारी हैं।

दूसरी तरफ अमेरिका ने ईरान से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने की मांग की है। ईरान ने लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ बढ़ते इजरायली हमलों के जवाब में इस अहम समुद्री रास्ते को बंद कर दिया था।

डॉनल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान पर निशाना साधते हुए कहा कि ईरान के पास ज्यादा विकल्प नहीं हैं और वह अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए कर रहा है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने का असर सिर्फ क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिख रहा है। अमेरिका में महंगाई दर मार्च में सालाना आधार पर 3.3 प्रतिशत तक पहुंच गई है। खास तौर पर पेट्रोल की कीमतों में पिछले कई दशकों की सबसे बड़ी मासिक बढ़ोतरी ने महंगाई को और तेज कर दिया है।

First Published : April 11, 2026 | 8:54 AM IST