अंतरराष्ट्रीय

US-Iran War: हॉर्मुज में फिर बंदूकें गरजीं! ईरान ने टैंकर को बनाया निशाना, ग्लोबल संकट गहराया

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका-ईरान टकराव गहराया, जबकि लेबनान युद्धविराम पर अनिश्चितता बनी हुई है।

Published by
एजेंसियां   
Last Updated- April 18, 2026 | 6:15 PM IST

US-Iran War: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव शनिवार को और तेज हो गया। हालात ऐसे मोड़ पर पहुंच गए जहां स्थिति पहले से ज्यादा अनिश्चित और तनावपूर्ण नजर आ रही है।

अमेरिका जहां ईरानी बंदरगाहों को घेरने की अपनी रणनीति पर आगे बढ़ रहा है, वहीं ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने के अपने शुरुआती संकेत से पीछे हटते हुए एक गुजरते जहाज पर गोलीबारी कर दी। इससे इस अहम समुद्री रास्ते पर तनाव और बढ़ गया है।

ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब पूरी तरह उसके नियंत्रण में है और सेना इसकी सख्त निगरानी कर रही है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि जब तक अमेरिका ईरानी जहाजों और बंदरगाहों पर प्रतिबंध बनाए रखेगा, तब तक इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही रोकी जाती रहेगी।

इस बीच ब्रिटेन की यूनाइटेड किंगडम मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने बताया कि ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड की दो गनबोट्स ने जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक तेल टैंकर पर फायरिंग की। हालांकि जहाज और उसमें सवार सभी लोग सुरक्षित बताए गए हैं। जहाज की पहचान और गंतव्य की जानकारी सामने नहीं आई है।

ईरान ने पहले भी साफ किया था कि वह इस जलमार्ग से केवल उन्हीं जहाजों को गुजरने देगा जिन्हें उसकी अनुमति होगी। पिछले सात हफ्तों से जारी संघर्ष के दौरान ज्यादातर जहाजों की आवाजाही पर रोक बनी हुई है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए चिंता का कारण बन रहा है। इस रास्ते से तेल की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा है, जिससे पहले से चल रहे ऊर्जा संकट और गहरा सकता है। साथ ही, अमेरिका और ईरान के बीच टकराव के और बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है, हालांकि मध्यस्थ देशों को अब भी किसी समझौते की उम्मीद है।

ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख Ebrahim Azizi ने संकेत दिया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य अब फिर से पुराने नियमों की ओर लौट रहा है। उनके मुताबिक, इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों को ईरानी नौसेना की अनुमति लेनी होगी और तय शुल्क भी चुकाना पड़ेगा।

यह बयान ऐसे समय आया है जब एक दिन पहले ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने इस जलमार्ग को खुला घोषित किया था। उसी दौरान इजरायल और लेबनान में सक्रिय हिज्बुल्लाह के बीच 10 दिन का युद्धविराम भी लागू किया गया। हिज्बुल्लाह, जिसे ईरान का समर्थन प्राप्त है, उसके साथ इजरायल के संघर्ष को खत्म करना तेहरान की बड़ी शर्तों में शामिल था। हालांकि इजरायल का कहना है कि पहले हुए समझौते में लेबनान शामिल नहीं था।

इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump का रुख भी थोड़ा बदलता नजर आया। पहले उन्होंने जलडमरूमध्य को खोलने के संकेत दिए, लेकिन बाद में कहा कि जब तक ईरान के साथ परमाणु कार्यक्रम समेत व्यापक समझौता नहीं होता, तब तक अमेरिकी नाकेबंदी जारी रहेगी।

हालांकि फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम बना हुआ है, लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर जारी बयानबाजी यह दिखाती है कि हालात कभी भी बिगड़ सकते हैं। दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल की सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है, इसलिए इसका महत्व बेहद ज्यादा है।

दरअसल, इस जलमार्ग पर नियंत्रण ईरान के लिए बड़ा दबाव बनाने का जरिया रहा है। इसी के चलते अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी शुरू की और अपनी सैन्य मौजूदगी भी बढ़ाई, ताकि पाकिस्तान की मध्यस्थता से प्रस्तावित युद्धविराम को लागू कराया जा सके। यह संघर्ष करीब सात हफ्तों से जारी था, जिसमें इजरायल, अमेरिका और ईरान आमने-सामने रहे।

डेटा फर्म Kpler के मुताबिक, फिलहाल जलडमरूमध्य से गुजरने वाली आवाजाही सीमित है और जहाजों को ईरान की मंजूरी वाले रास्तों से ही गुजरना पड़ रहा है। वहीं US Central Command ने बताया कि नाकेबंदी शुरू होने के बाद से अब तक 21 जहाजों को वापस ईरान भेजा जा चुका है।

अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की दिशा में प्रगति, पाकिस्तान की अहम भूमिका

मध्य पूर्व में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर तनाव बढ़ने के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे बढ़ती नजर आ रही है। पाकिस्तान के अधिकारियों का कहना है कि 22 अप्रैल तक तय संभावित युद्धविराम की समयसीमा से पहले दोनों देशों के बीच समझौते की दिशा में सकारात्मक प्रगति हो रही है।

तुर्की के अंताल्या में एक कूटनीतिक मंच पर पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा कि लेबनान में हुए युद्धविराम से बातचीत को गति मिली है। उन्होंने बताया कि इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच जारी संघर्ष पहले बातचीत में बड़ी बाधा था, लेकिन हालात में सुधार के बाद पिछले हफ्ते इस्लामाबाद में हुई वार्ता समझौते के काफी करीब पहुंच गई थी।

इस बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने तेहरान का दौरा किया। वहीं प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अंताल्या में तुर्की के राष्ट्रपति Recep Tayyip Erdogan और कतर के Emir Tamim bin Hamad Al Thani से मुलाकात की।

सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान अगले हफ्ते अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का दूसरा दौर आयोजित करने की तैयारी में है, जिससे क्षेत्र में तनाव कम होने की उम्मीद बढ़ गई है।

लेबनान में युद्धविराम पर बने हुए सवाल

लेबनान में युद्धविराम को लेकर अब भी कई सवाल बने हुए हैं। मध्यस्थों ने भले ही सकारात्मक संकेत दिए हों, लेकिन यह साफ नहीं है कि Hezbollah इस समझौते का कितना पालन करेगा, क्योंकि बातचीत में उसकी सीधी भूमिका नहीं रही। साथ ही, दक्षिणी लेबनान के कुछ हिस्सों में Israeli Army की मौजूदगी भी बनी हुई है।

इस बीच Donald Trump ने कहा कि अमेरिका ने इजरायल को लेबनान पर आगे हमले करने से रोका है और अब संघर्ष खत्म होना चाहिए। हालांकि US State Department ने स्पष्ट किया कि यह रोक केवल आक्रामक कार्रवाई पर है, आत्मरक्षा के कदमों पर नहीं।

वहीं इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा कि उन्होंने यह युद्धविराम ट्रंप के अनुरोध पर स्वीकार किया है, लेकिन Hezbollah के खिलाफ अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है। उनका दावा है कि संगठन के करीब 90 प्रतिशत मिसाइल और रॉकेट भंडार को नष्ट कर दिया गया है और कार्रवाई जारी रहेगी।

राजधानी Beirut में हालात थोड़े सामान्य होते दिखे, जहां विस्थापित लोग अपने घरों की ओर लौटने लगे। हालांकि अधिकारियों ने अभी इंतजार करने की सलाह दी है, क्योंकि युद्धविराम की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

इस बीच दक्षिणी लेबनान में तैनात Lebanese Army और United Nations Peacekeeping Forces ने युद्धविराम लागू होने के बाद भी कुछ इलाकों में छिटपुट गोलाबारी की जानकारी दी है।

28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष में भारी जनहानि हुई है। ईरान में करीब 3000 लोगों की मौत हुई, जबकि लेबनान में 2290 से ज्यादा लोग मारे गए। इजरायल में 23 लोगों की जान गई और खाड़ी देशों में भी एक दर्जन से ज्यादा मौतें हुई हैं। इसके अलावा 13 अमेरिकी सैनिकों की भी इस संघर्ष में जान गई है।

First Published : April 18, 2026 | 6:14 PM IST