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US-Iran War: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने एक बार फिर अपनी सैन्य क्षमता का संकेत दिया है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे की ओर दो इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल दागीं। यह अड्डा अमेरिका और ब्रिटेन द्वारा संयुक्त रूप से संचालित किया जाता है और रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है।
रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि दागी गई दो मिसाइलों में से एक उड़ान के दौरान ही विफल हो गई। दूसरी मिसाइल को रोकने के लिए अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत ने SM-3 इंटरसेप्टर मिसाइल दागी। हालांकि यह साफ नहीं हो सका है कि उस मिसाइल को पूरी तरह नष्ट किया गया या नहीं। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह घटना कब हुई।
SM-3 इंटरसेप्टर मिसाइल अमेरिकी नौसेना की एक उन्नत रक्षा प्रणाली का हिस्सा है, जिसका इस्तेमाल छोटी से मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट करने के लिए किया जाता है। इसकी खास बात यह है कि इसमें विस्फोटक वारहेड नहीं होता। यह सीधे टक्कर के जरिए लक्ष्य को नष्ट करती है। इस तकनीक को हिट टू किल कहा जाता है, जिसमें लक्ष्य को इतनी तेज गति से टक्कर मारी जाती है कि वह पूरी तरह नष्ट हो जाता है। इसकी ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह करीब 600 मील प्रति घंटे की रफ्तार से चलती 10 टन के ट्रक जैसी ताकत पैदा करती है।
डिएगो गार्सिया ईरान से लगभग 4000 किलोमीटर दूर स्थित है। ऐसे में इस हमले की कोशिश को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह ईरान की वास्तविक मिसाइल क्षमता पर नए सवाल खड़े करता है। अब तक ईरान सार्वजनिक तौर पर अपनी मिसाइल रेंज को करीब 2000 किलोमीटर तक सीमित बताता रहा है।
हाल ही में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी कहा था कि देश ने अपनी मिसाइल रेंज को 2000 किलोमीटर तक सीमित रखा है। लेकिन डिएगो गार्सिया को निशाना बनाने की कोशिश इस दावे के विपरीत इशारा करती है और यह संकेत देती है कि ईरान की असली सैन्य क्षमता कहीं ज्यादा हो सकती है।
डिएगो गार्सिया हिंद महासागर में स्थित एक महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा है, जहां से अमेरिका और ब्रिटेन क्षेत्र में अपने सैन्य अभियानों को संचालित करते हैं। यह बेस लंबी दूरी के बमवर्षक विमानों और नौसैनिक अभियानों के लिए बेहद जरूरी माना जाता है।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव लगातार गहराता जा रहा है। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वॉशिंगटन फिलहाल सीजफायर के पक्ष में नहीं है। व्हाइट हाउस के बाहर मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि बातचीत हो सकती है, लेकिन युद्ध के बीच सीजफायर करना सही नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि जब एक पक्ष निर्णायक बढ़त बना रहा हो, तब युद्धविराम का सवाल नहीं उठता।
ट्रंप ने अपने बयान में संकेत दिया कि अमेरिका अपने सैन्य अभियानों को जल्द सीमित कर सकता है, लेकिन उससे पहले तय उद्देश्यों को पूरा करना जरूरी है। उन्होंने एक पोस्ट में दावा किया कि अमेरिका अपने लक्ष्यों के करीब पहुंच चुका है और अब मध्य पूर्व में सैन्य गतिविधियों को धीरे-धीरे कम करने पर विचार किया जा रहा है।
ट्रंप ने अमेरिकी रणनीति के प्रमुख उद्देश्यों को भी स्पष्ट किया। इनमें ईरान की मिसाइल क्षमता को पूरी तरह कमजोर करना, उसके रक्षा उद्योग ढांचे को खत्म करना, नौसेना और वायुसेना को निष्क्रिय करना, ईरान को परमाणु क्षमता हासिल करने से रोकना और क्षेत्रीय सहयोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल है।
तनाव के बीच अमेरिका ने अपनी सैन्य मौजूदगी और बढ़ा दी है। पेंटागन ने क्षेत्र में तीन अतिरिक्त युद्धपोत और हजारों मरीन सैनिक तैनात किए हैं। इससे साफ है कि अमेरिका किसी भी संभावित स्थिति के लिए खुद को तैयार कर रहा है।
दूसरी ओर ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के वरिष्ठ सैन्य प्रवक्ता जनरल अबोलफजल शेखारची ने चेतावनी दी है कि यदि संघर्ष बढ़ता है तो इसका असर मध्य पूर्व से बाहर भी देखने को मिल सकता है। उन्होंने कहा कि ईरान के दुश्मनों के लिए दुनिया भर में सार्वजनिक स्थान जैसे पार्क, पर्यटन स्थल और अन्य जगहें सुरक्षित नहीं रहेंगी। इस बयान ने वैश्विक स्तर पर सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है।
ईरान ने खाड़ी देशों के ऊर्जा ढांचे को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुवैत की मीना अल-अहमदी रिफाइनरी पर ड्रोन हमले किए गए, जिससे वहां आग लग गई। यह रिफाइनरी क्षेत्र की सबसे बड़ी इकाइयों में से एक है और इसकी उत्पादन क्षमता करीब 7.3 लाख बैरल प्रतिदिन है। इस हमले से वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका भी बढ़ गई है।
ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात को भी कड़ी चेतावनी दी है। तेहरान ने कहा है कि अगर यूएई की जमीन से ईरानी द्वीपों पर हमले दोबारा हुए, तो रास अल खैमाह को निशाना बनाया जाएगा। ईरानी सेना ने साफ कहा है कि ऐसी स्थिति में कड़ी सैन्य कार्रवाई की जाएगी।
कूटनीतिक मोर्चे पर भी बयानबाजी तेज हो गई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ब्रिटेन की आलोचना करते हुए कहा कि वह अमेरिका को अपने सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने दे रहा है, जिससे हालात और बिगड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन की आम जनता इस युद्ध का हिस्सा नहीं बनना चाहती, लेकिन सरकार के फैसले से देश के नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने अपने सैन्य कदमों को लेकर स्पष्ट किया है कि वह आत्मरक्षा के अधिकार के तहत कार्रवाई कर रहा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान अपने बचाव के अधिकार का इस्तेमाल करेगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं।
तनाव के बावजूद ईरान ने कुछ नरमी के संकेत भी दिए हैं। ईरान ने संकेत दिया है कि वह जापान से जुड़े जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दे सकता है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ईरान की रणनीतिक लचीलापन दिखाता है, जिससे वह पूरी तरह टकराव की स्थिति से बचते हुए अपने हितों को साधने की कोशिश कर रहा है।
दूसरी ओर, इजराइल ने ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियानों को सफल बताया है। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया कि अमेरिका के साथ मिलकर किए गए हमलों से ईरान की सैन्य क्षमताओं को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
उन्होंने कहा कि ईरान के मिसाइल और ड्रोन सिस्टम को बड़े पैमाने पर कमजोर किया गया है और इसे पूरी तरह खत्म करने की दिशा में कार्रवाई जारी है।
नेतन्याहू के अनुसार, अब केवल हथियारों को ही नहीं बल्कि उन फैक्ट्रियों को भी निशाना बनाया जा रहा है जहां इन मिसाइलों और उपकरणों का निर्माण होता है। उनका कहना है कि इस रणनीति से ईरान के रक्षा उद्योग के पूरे ढांचे को खत्म करने की कोशिश की जा रही है।
इस बीच अमेरिका भी अपनी सैन्य तैयारियों को मजबूत करने में जुटा है। अमेरिकी रक्षा कंपनी RTX Corporation ने जानकारी दी है कि उसकी सहायक कंपनी Raytheon ने अमेरिकी रक्षा विभाग के साथ कई दीर्घकालिक समझौते किए हैं।
इन समझौतों के तहत महत्वपूर्ण मिसाइल सिस्टम्स के उत्पादन को तेजी से बढ़ाया जाएगा। इसमें टॉमहॉक, AMRAAM, SM-3 और SM-6 जैसे उन्नत हथियार शामिल हैं। कंपनी का कहना है कि आने वाले समय में इनका उत्पादन वर्तमान स्तर से दो से चार गुना तक बढ़ाया जाएगा।
(-एजेंसी इनपुट के साथ)