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US Iran War: ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसियों ने गुरुवार को एक चार्ट जारी किया, जिसमें संकेत दिया गया कि देश की पैरामिलिट्री रिवोल्यूशनरी गार्ड ने युद्ध के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री माइंस बिछाई थीं। इसे अमेरिका पर दबाव बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि दो हफ्ते का हालिया युद्धविराम अभी भी अनिश्चित बना हुआ है और पाकिस्तान में आगे की बातचीत की उम्मीद है।
अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच यह युद्धविराम अभी तक किसी तरह बना हुआ है, लेकिन तेहरान और वॉशिंगटन इस समझौते की शर्तों को लेकर अलग-अलग दावे कर रहे हैं।
इजराइल का कहना है कि यह समझौता लेबनान में हिज़्बुल्लाह के खिलाफ उसके युद्ध पर लागू नहीं होता, और उसने वहां हमले तेज कर दिए हैं। ईरान का आरोप है कि इससे समझौते का उल्लंघन हो रहा है। वहीं, ईरान का दावा है कि उसे होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण, टोल वसूलने और यूरेनियम संवर्धन की अनुमति मिल गई है। जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का कहना है कि समझौते में जलडमरूमध्य को खोलना और ईरान द्वारा अपना यूरेनियम भंडार सौंपना शामिल है।
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यह चार्ट ISNA और तसनीम समाचार एजेंसियों ने जारी किया, जिन्हें रिवोल्यूशनरी गार्ड के करीब माना जाता है। इसमें फारसी भाषा में “डेंजर जोन” दिखाया गया है, जो उस मार्ग पर है जहां से जहाज गुजरते हैं। यह जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी का संकरा हिस्सा है, जहां से दुनिया के लगभग 20 फीसदी तेल और गैस का व्यापार होता है।
चार्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि जहाज अब ईरान के तट के पास उत्तरी रास्ते से गुजर रहे हैं, खासकर लारक द्वीप के पास। युद्ध के दौरान कुछ जहाजों को इस रास्ते से गुजरते हुए देखा गया था। यह चार्ट 28 फरवरी से 9 अप्रैल तक का बताया गया है, लेकिन यह साफ नहीं है कि इस दौरान माइंस हटाई गई हैं या नहीं।
इस बीच, युद्धविराम पर संदेह के चलते तेल की कीमतें फिर बढ़कर 97 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं और एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट देखी गई। ब्रेंट क्रूड 2.9 फीसदी बढ़कर 97.46 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी कच्चा तेल 3.7 फीसदी बढ़कर 97.94 डॉलर प्रति बैरल हो गया।
शिप ट्रैकिंग करने वाली कंपनी केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, युद्धविराम के पहले दिन बुधवार को केवल चार जहाज अपने ट्रैकिंग सिस्टम चालू रखकर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरे। हालांकि, इसमें वे जहाज शामिल नहीं हैं जो अपने ट्रैकिंग सिस्टम बंद करके चलते हैं, जिन्हें “डार्क फ्लीट” कहा जाता है। ऐसे कई जहाज ईरान का प्रतिबंधित कच्चा तेल बाजार तक पहुंचाते हैं।