US Iran War: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत फिर शुरू होने की उम्मीद है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों के बीच 16 अप्रैल को एक और दौर की बातचीत हो सकती है।
खबर है कि पिछले सप्ताह इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी थी। इसके बाद अब दोनों पक्ष एक बार फिर बातचीत की कोशिश में हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने ईरान से यूरेनियम संवर्धन को 20 साल के लिए रोकने की मांग रखी थी। हालांकि ईरान ने साफ कर दिया है कि वह इतने लंबे समय के लिए तैयार नहीं है। ईरान ने प्रस्ताव दिया है कि वह केवल पांच साल तक ही संवर्धन पर रोक लगाने के लिए राजी हो सकता है।
US Iran War के बीच मंगलवार सुबह 10 बजे तक के प्रमुख घटनाक्रम:
अमेरिका से जुड़े घटनाक्रम
US Iran War एक बार फिर तेजी से बढ़ता दिख रहा है। मंगलवार सुबह 10 बजे तक सामने आए ताजा घटनाक्रम इस तरह हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सोमवार को दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के बंदरगाहों और तटीय इलाकों की घेराबंदी शुरू कर दी है। इसके जवाब में ईरान ने भी चेतावनी जारी की है और कहा है कि वह फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में स्थित बंदरगाहों को निशाना बना सकता है।
ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान ने एक बार फिर वॉशिंगटन से बातचीत की इच्छा जताई है, जबकि अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाई और कड़े रुख के साथ आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने दावा किया कि ईरानी नौसेना को भारी नुकसान पहुंचा है और 158 जहाज नष्ट होकर समुद्र में डूब चुके हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि छोटे तेज गति वाले हमलावर जहाजों को निशाना नहीं बनाया गया है।
इस बीच अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी नौसेना ने क्षेत्र में कम से कम 15 युद्धपोत तैनात किए हैं। इनमें विमानवाहक पोत USS Abraham Lincoln और कई विध्वंसक जहाज शामिल हैं। माना जा रहा है कि ये तैनाती समुद्री नाकेबंदी को लागू करने के लिए की गई है।
अमेरिका ने यह भी साफ किया है कि वह ईरान पर लगे प्रतिबंधों के उल्लंघन में शामिल किसी भी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगा, खासकर तेल खरीद और बिक्री से जुड़े मामलों में।
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ईरान जुड़े घटनाक्रम
ईरान से जुड़ी ताजा खबरों के अनुसार, अमेरिका की उस मांग पर कि ईरान अगले 20 साल तक यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह रोक दे, तेहरान ने नया प्रस्ताव दिया है। ईरान ने कहा है कि वह इस अवधि को घटाकर पांच साल तक सीमित करने के लिए तैयार हो सकता है। यह जानकारी द न्यूयॉर्क टाइम्स के हवाले से सामने आई है।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि देश ने लगातार दबाव और बाहरी कोशिशों के बावजूद अपनी “राष्ट्रीय प्रतिरोध क्षमता” बनाए रखी है। उनके अनुसार, विदेशी ताकतें ईरान को कमजोर करने में सफल नहीं हो पाई हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि देश के लोगों ने मुश्किल हालात में एकजुटता और धैर्य दिखाया है, जिससे विरोधी योजनाएं नाकाम हुई हैं।
वहीं ईरान के दूत मोहम्मद फतहाली ने संकेत दिया कि तेहरान अमेरिका के साथ नए सिरे से बातचीत के लिए तैयार है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि यह तभी संभव होगा जब वॉशिंगटन “अनुचित शर्तों” से बचे और ईरान की बातों का सम्मान करे।
इज़राइल की सैन्य स्थिति
इज़राइल से जुड़ी सुरक्षा और कूटनीति की अहम गतिविधियों के बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने मेजर जनरल रोमन गोफमैन को देश की खुफिया एजेंसी मोसाद का अगला प्रमुख नियुक्त किया है।
उधर, इज़राइल और लेबनान के बीच बातचीत को लेकर भी हलचल तेज है। दोनों देशों के प्रतिनिधियों की बैठक मंगलवार को वॉशिंगटन डीसी में तय है। इस बैठक में अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो के भी शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
सैन्य मोर्चे पर इज़राइली डिफेंस फोर्सेज ने दावा किया है कि उसने लेबनान की ओर से आए 10 से ज्यादा हवाई खतरों को रोक दिया है। साथ ही सेना का यह भी कहना है कि हाल के हमलों में हिज़बुल्लाह के 250 से अधिक कमांडरों की मौत हुई है।
इसके अलावा, नेतन्याहू ने ईरान पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी के फैसले का समर्थन करते हुए कहा है कि दोनों देश इस मुद्दे पर मिलकर काम कर रहे हैं।
मध्य पूर्व और भारत से जुड़ी बड़ी घटनाएं
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच लेबनान के हिज़्बुल्लाह ने अमेरिका की मध्यस्थता में चल रही लेबनान और इज़राइल के बीच बातचीत को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया है। समूह ने कहा है कि वह किसी भी ऐसे नतीजे को मान्यता नहीं देगा जो उसकी शर्तों के अनुरूप न हो। साथ ही, हिज़्बुल्लाह ने रविवार को इज़राइली ठिकानों पर 43 हमलों की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया कि ये कार्रवाई संघर्ष विराम के कथित उल्लंघनों के जवाब में की गई है।
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भारत से जुड़े घटनाक्रम में बड़ा विकास
भारत से जुड़े मामलों में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है, जहां ईरान पर प्रतिबंधों के तहत चिह्नित दो सुपरटैंकर भारतीय बंदरगाहों के पास खड़े पाए गए हैं। बताया जा रहा है कि करीब सात साल बाद इस तरह की ईरानी कच्चे तेल की खेप भारत के नजदीक पहुंची है। ये दोनों जहाज, MT Jaya और MT Felicity, प्रत्येक लगभग दो-दो मिलियन बैरल कच्चा तेल लेकर आए हैं और ओडिशा के पारादीप तथा गुजरात के सिका बंदरगाह के पास मौजूद हैं।
ईरानी राजदूत मोहम्मद फथाली ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले भारतीय जहाजों से ईरान कोई टोल या शुल्क नहीं वसूलता है। वहीं भारत सरकार ने उन रिपोर्टों को खारिज किया है जिनमें कहा गया था कि भारत ने एलपीजी आपूर्ति के लिए ईरान को कोई भुगतान किया है। सरकार के अनुसार ऐसी कोई डील नहीं हुई है।
इस बीच, जानकारी के मुताबिक लगभग 15 भारतीय झंडे वाले जहाज फिलहाल फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि क्षेत्र में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास लगातार जारी हैं। मंत्रालय ने यह भी बताया कि अब तक 9 लाख से अधिक भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है।
कच्चा तेल सस्ता, ब्रेंट और WTI दोनों में गिरावट दर्ज
US Iran War के बीच वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है।
ब्रेंट क्रूड का दाम 1.86 डॉलर यानी 1.87 प्रतिशत टूटकर 97.50 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 2.25 डॉलर यानी 2.27 प्रतिशत की गिरावट के साथ 96.83 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ।
तेल की कीमतों में यह गिरावट अंतरराष्ट्रीय मांग और आपूर्ति से जुड़े संकेतों के बीच देखने को मिली है।
First Published : April 14, 2026 | 1:03 PM IST