US President Donald Trump (File Photo)
US-Iran War: अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने शनिवार को कहा कि वह ईरान की ओर से आए नए प्रस्ताव की समीक्षा कर रहे हैं, जिसका मकसद युद्ध को खत्म करना है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि इस प्रस्ताव से समझौता हो पाएगा, इस पर उन्हें संदेह है।
रिपोर्टरों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्हें प्रस्ताव की पूरी जानकारी जल्द ही दी जाएगी। उन्होंने बताया कि ईरान की तरफ से प्रस्ताव का सटीक मसौदा भेजा जा रहा है, जिसके बाद ही वह कोई अंतिम राय देंगे।
बाद में सोशल मीडिया पर भी ट्रंप ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि यह प्रस्ताव स्वीकार करने योग्य होगा। उनका मानना है कि ईरान ने पिछले कई दशकों में जो किया है, उसके मुकाबले अभी उसने पर्याप्त कीमत नहीं चुकाई है।
इस बयान से साफ है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी भी बना हुआ है और किसी समझौते तक पहुंचने में समय लग सकता है।
ईरान की नोबेल शांति पुरस्कार विजेता Narges Mohammadi की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें शुक्रवार को उत्तर-पश्चिमी ईरान के ज़ंजान शहर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। जानकारी के मुताबिक उन्हें दिल से जुड़ी गंभीर परेशानी हुई और वे बेहोश हो गई थीं।
परिवार का कहना है कि उनकी सेहत पिछले कुछ समय से खराब चल रही थी। दिसंबर में गिरफ्तारी के दौरान उनके साथ हुई मारपीट को भी इसका एक कारण बताया जा रहा है।
ज़ंजान के डॉक्टरों ने इलाज शुरू करने से पहले उनके मेडिकल रिकॉर्ड मांगे हैं। साथ ही विशेषज्ञों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए तेहरान ले जाने की सलाह दी है। हालांकि, उनके पति ताघी रहमानी का आरोप है कि ईरान का खुफिया मंत्रालय उन्हें तेहरान ट्रांसफर करने के खिलाफ है। उनका कहना है कि एंजियोग्राफी जैसे जरूरी टेस्ट के लिए भी अनुमति नहीं दी जा रही।
नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी ने भी इस मामले पर चिंता जताई है। कमेटी ने ईरानी अधिकारियों से अपील की है कि मोहम्मदी को तुरंत उनकी मेडिकल टीम के पास भेजा जाए, क्योंकि उनकी जान को खतरा हो सकता है।
उनके पति ने यह भी कहा कि मोहम्मदी मानसिक रूप से मजबूत हैं और जेल की स्थिति का सामना कर सकती हैं, लेकिन उनका शरीर अब साथ नहीं दे रहा। उन्होंने यह भी बताया कि उनके बच्चे 2015 से अपनी मां से नहीं मिल पाए हैं।
नरगिस मोहम्मदी को 12 दिसंबर को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी से पहले वह पहले से ही 13 साल 9 महीने की सजा काट रही थीं। उन पर ईरान की सरकार के खिलाफ प्रचार और राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ साजिश जैसे आरोप हैं। हालांकि स्वास्थ्य कारणों से उन्हें 2024 के आखिर में अस्थायी तौर पर रिहा किया गया था। अब उनके वकील इस मामले को आगे बढ़ाते हुए जनरल प्रॉसिक्यूटर के दफ्तर में कानूनी कार्रवाई कर रहे हैं।
अमेरिका ने शिपिंग कंपनियों को चेतावनी दी है कि अगर वे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित गुजरने के लिए ईरान को भुगतान करती हैं तो उन पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
बताया जा रहा है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के साथ संघर्ष के बाद ईरान ने इस अहम समुद्री रास्ते पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। कुछ जहाजों को अपने तट के पास से सुरक्षित रास्ता देने के बदले फीस भी ली जा रही थी। अब अमेरिका ने साफ कहा है कि सिर्फ नकद ही नहीं, बल्कि डिजिटल भुगतान, वस्तु विनिमय या किसी अन्य तरीके से किया गया भुगतान भी नियमों के खिलाफ माना जाएगा।
इस चेतावनी के बाद अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों की चिंता बढ़ गई है और क्षेत्र में तनाव और गहराने के संकेत मिल रहे हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। 13 अप्रैल से अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों के खिलाफ नौसैनिक घेराबंदी कर रखी है। इस कदम का सीधा असर ईरान की तेल सप्लाई पर पड़ा है, जिससे उसकी कमजोर अर्थव्यवस्था पर और दबाव बढ़ गया है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, शनिवार तक 48 व्यापारिक जहाजों को वापस लौटने के लिए कहा गया है। माना जा रहा है कि इससे ईरान की तेल से होने वाली कमाई पर बड़ा असर पड़ेगा।
इधर, ईरान ने शनिवार को दो लोगों को फांसी देने की जानकारी दी है। इन पर इजरायल के लिए जासूसी करने का आरोप था। न्यायपालिका से जुड़े मीडिया प्लेटफॉर्म मिजान ऑनलाइन के अनुसार, याकूब करीमपुर पर आरोप था कि वह इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के एक अधिकारी को संवेदनशील जानकारी भेज रहा था।
वहीं, नासेर बेकरजादेह पर सरकारी और धार्मिक नेताओं से जुड़ी जानकारी साझा करने का आरोप था। उसने नतांज से जुड़ी जानकारी भी भेजी थी, जहां परमाणु संवर्धन केंद्र स्थित है और जिसे पिछले साल इजरायल और अमेरिका ने निशाना बनाया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के हफ्तों में ईरान ने जासूसी और आतंकी गतिविधियों के आरोप में एक दर्जन से ज्यादा लोगों को फांसी दी है। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि ऐसे मामलों में अक्सर बंद कमरे में सुनवाई होती है, जिसमें आरोपियों को खुद का पक्ष रखने का पूरा मौका नहीं मिल पाता।