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US-Iran War: ट्रंप को नहीं पसंद आया ईरान का प्लान, क्या अब और भड़केगा युद्ध?

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने की कोशिशें परमाणु मुद्दे और युद्धविराम की प्राथमिकता को लेकर मतभेद के कारण अटक गई हैं।

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एजेंसियां   
Last Updated- April 28, 2026 | 9:20 AM IST

US-Iran War: अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ईरान के ताजा प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं हैं। एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक इस वजह से चल रहे युद्ध को खत्म करने की कोशिशों को झटका लगा है। यह संघर्ष पिछले दो महीनों से जारी है और इसके कारण ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है, महंगाई बढ़ी है और हजारों लोगों की जान जा चुकी है।

रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने सुझाव दिया है कि उसके परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा युद्ध खत्म होने के बाद की जाए। साथ ही खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही से जुड़े विवादों को भी पहले सुलझाने की बात कही गई है।

लेकिन अमेरिकी पक्ष इस प्रस्ताव से सहमत नहीं दिख रहा। अमेरिका का मानना है कि किसी भी समझौते की शुरुआत परमाणु मुद्दे से ही होनी चाहिए। इसी वजह से ट्रंप ने इस योजना का विरोध किया है।

एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा, “ईरान का यह प्रस्ताव हमारी प्राथमिकताओं से मेल नहीं खाता। परमाणु मुद्दे को शुरुआत में शामिल करना जरूरी है।”

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता ओलिविया वेल्स ने कहा, “हम मीडिया के जरिए बातचीत नहीं करते और हमारे तय मानक अब भी वही हैं।”

गौरतलब है कि साल 2015 में ईरान और कई बड़े देशों के बीच एक समझौता हुआ था, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कड़ी पाबंदियां लगाई गई थीं। हालांकि बाद में ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान इस समझौते से अमेरिका को अलग कर लिया था।

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अमेरिका का दौरा रद्द, ईरान की पहल जारी, लेकिन भरोसे की कमी से बातचीत की राह मुश्किल

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने अपने दूत Steve Witkoff और सलाहकार Jared Kushner का Islamabad दौरा रद्द कर दिया, जिसके बाद बातचीत आगे बढ़ने की संभावना और कम हो गई।

इधर ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araqchi लगातार कूटनीतिक कोशिशों में जुटे रहे। उन्होंने पहले Islamabad और Oman का दौरा किया और फिर Russia पहुंचे। वहां उन्होंने राष्ट्रपति Vladimir Putin से मुलाकात की, जहां उन्हें एक अहम सहयोगी का समर्थन मिला।

अराकची का कहना है कि अमेरिका बातचीत इसलिए करना चाहता है क्योंकि वह युद्ध में अपने लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया है।

सूत्रों के अनुसार, ईरान ने जो प्रस्ताव रखा है उसमें चरणबद्ध तरीके से बातचीत की बात कही गई है। सबसे पहले युद्धविराम और भविष्य में संघर्ष न होने की गारंटी पर जोर दिया गया है। इसके बाद समुद्री विवाद सुलझाने और Strait of Hormuz को फिर से खोलने की योजना है, जिस पर ईरान की निगरानी होगी।

इन शुरुआती कदमों के बाद ही परमाणु मुद्दे पर बातचीत आगे बढ़ेगी। इसमें ईरान अपनी यूरेनियम संवर्धन के अधिकार को मान्यता देने की मांग रखेगा।

हालांकि मौजूदा हालात में दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी साफ नजर आ रही है, जिससे समाधान की राह अभी भी मुश्किल बनी हुई है।

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होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव से तेल कीमतों में तेजी, सप्लाई पर बढ़ी चिंता

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी देखी जा रही है। इसकी मुख्य वजह तेल की आपूर्ति में आ रही बाधाएं हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अब बाजार पर बयानों का असर कम और असल में तेल की आवाजाही ज्यादा अहम हो गई है।

मार्केट एनालिस्ट फवाद रजाकजादा के मुताबिक, ट्रेडर्स की नजर इस बात पर है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल का प्रवाह कितना हो रहा है, क्योंकि फिलहाल वहां से सप्लाई प्रभावित बनी हुई है।

शिपिंग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, हाल के दिनों में ईरान का तेल लेकर जा रहे कम से कम छह टैंकरों को अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई के चलते वापस लौटना पड़ा है। इससे सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया है।

युद्ध से पहले हर दिन करीब 125 से 140 जहाज इस रास्ते से गुजरते थे, लेकिन अब यह संख्या तेजी से घट गई है। पिछले 24 घंटों में सिर्फ सात जहाजों की आवाजाही दर्ज की गई और इनमें से कोई भी वैश्विक बाजार के लिए तेल नहीं ले जा रहा था।

ईरान ने अपने टैंकरों के खिलाफ अमेरिकी कदमों की कड़ी आलोचना करते हुए इसे खुली लूट जैसा बताया है।

घरेलू दबाव बढ़ा, युद्ध खत्म करने को लेकर ट्रंप पर सवाल तेज

ट्रंप पर युद्ध खत्म करने का दबाव बढ़ता जा रहा है। देश के अंदर उनकी लोकप्रियता में गिरावट देखी जा रही है और युद्ध को लेकर उनकी बदलती दलीलों पर भी सवाल उठ रहे हैं।

इस बीच कूटनीतिक कोशिशें जारी हैं, लेकिन दोनों पक्षों के बीच अब भी कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई है। सबसे बड़ा मतभेद इस बात को लेकर है कि पहले युद्धविराम किया जाए या ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बात शुरू की जाए।

First Published : April 28, 2026 | 9:20 AM IST