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US-Iran War: डेडलाइन से पहले ट्रंप का खेल! युद्ध खत्म बताकर कांग्रेस की मंजूरी से बचने की कोशिश

ट्रंप ने ईरान युद्ध खत्म होने का दावा कर कांग्रेस की मंजूरी से बचने की कोशिश की, लेकिन इस पर कानूनी और राजनीतिक विवाद तेज हो गया है।

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एजेंसियां   
Last Updated- May 02, 2026 | 12:31 PM IST

US-Iran War: अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ जारी सैन्य तनाव को लेकर एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने देश की राजनीति और कानून दोनों में नई बहस छेड़ दी है। ट्रंप प्रशासन ने कांग्रेस को भेजे गए एक पत्र में दावा किया है कि ईरान के साथ “शत्रुता समाप्त हो चुकी है”, जबकि क्षेत्र में अमेरिकी सेना अब भी तैनात है और हालात पूरी तरह सामान्य नहीं कहे जा सकते।

क्या है पूरा मामला

राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रतिनिधि सभा के स्पीकर Mike Johnson और सीनेट के प्रेजिडेंट प्रो टेम्पोर Chuck Grassley को लिखे पत्र में कहा कि 28 फरवरी 2026 से शुरू हुआ सैन्य संघर्ष अब खत्म हो चुका है। इस बयान के जरिए ट्रंप ने उस कानूनी समयसीमा को दरकिनार करने की कोशिश की है, जिसके तहत उन्हें 60 दिनों के भीतर कांग्रेस से युद्ध की मंजूरी लेनी थी।

यह समयसीमा 1 मई को पूरी हो गई, लेकिन कांग्रेस ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। खासकर रिपब्लिकन सांसदों ने राष्ट्रपति के फैसले पर सवाल उठाने से बचते हुए उन्हें समर्थन दिया या चुप्पी साधे रखी।

कानून क्या कहता है

अमेरिका में 1973 का War Powers Resolution स्पष्ट रूप से कहता है कि राष्ट्रपति अगर बिना कांग्रेस की मंजूरी के सेना का इस्तेमाल करते हैं, तो उन्हें 60 दिनों के भीतर या तो सैन्य कार्रवाई खत्म करनी होती है या फिर कांग्रेस से इसकी अनुमति लेनी होती है। जरूरत पड़ने पर 30 दिन की अतिरिक्त मोहलत ली जा सकती है।

लेकिन ट्रंप प्रशासन का कहना है कि चूंकि अप्रैल की शुरुआत में संघर्ष विराम लागू हो गया था, इसलिए यह समयसीमा लागू नहीं होती। उनका तर्क है कि जब सक्रिय लड़ाई नहीं चल रही, तो कानून की घड़ी रुक जाती है।

हालांकि प्रशासन का दावा है कि शत्रुता खत्म हो गई है, लेकिन हकीकत इससे अलग नजर आती है। ईरान अब भी अहम समुद्री मार्ग Strait of Hormuz पर अपनी पकड़ बनाए हुए है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है।

उधर अमेरिकी नौसेना इलाके में मौजूद है और ईरान के तेल टैंकरों को रोकने के लिए नाकेबंदी जैसी स्थिति बनी हुई है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या सच में युद्ध खत्म हुआ है या सिर्फ उसका रूप बदला है।

यह पढ़ें: ईरान का बड़ा कदम: अमेरिका को बातचीत के लिए भेजा नया प्रस्ताव, पाकिस्तान को सौंपी अपनी मांगे

US-Iran War पर ट्रंप का बयान और संकेत

ट्रंप ने अपने पत्र में यह भी कहा कि भले ही अमेरिकी ऑपरेशन सफल रहे हैं और शांति की कोशिशें जारी हैं, लेकिन ईरान से खतरा अभी भी बना हुआ है। इसका मतलब साफ है कि अमेरिका पूरी तरह पीछे हटने के मूड में नहीं है और स्थिति कभी भी फिर से बिगड़ सकती है।

कांग्रेस की भूमिका पर बहस

कांग्रेस में इस मुद्दे को लेकर मतभेद साफ दिख रहे हैं। सीनेट के बहुमत नेता John Thune ने कहा कि फिलहाल युद्ध की मंजूरी पर वोट कराने की कोई योजना नहीं है। इससे साफ है कि रिपब्लिकन नेतृत्व राष्ट्रपति के फैसले के साथ खड़ा है।

वहीं कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने भी माना है कि भविष्य में कांग्रेस की भूमिका जरूरी है। अलास्का की सीनेटर Lisa Murkowski ने कहा कि बिना स्पष्ट योजना और जवाबदेही के लंबे समय तक सैन्य कार्रवाई सही नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि अगर प्रशासन ठोस रणनीति नहीं पेश करता है, तो वह सीमित सैन्य मंजूरी का प्रस्ताव ला सकती हैं।

मेने की सीनेटर Susan Collins ने भी पहली बार डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर युद्ध रोकने के प्रस्ताव का समर्थन किया। उन्होंने साफ कहा कि राष्ट्रपति की शक्तियां असीमित नहीं हैं और 60 दिन की समयसीमा कोई सुझाव नहीं बल्कि अनिवार्य नियम है।

डेमोक्रेट्स का विरोध

डेमोक्रेट नेताओं ने ट्रंप प्रशासन के इस तर्क को खारिज कर दिया है। वर्जीनिया के सीनेटर Tim Kaine ने कहा कि कानून की व्याख्या इस तरह नहीं की जा सकती। उनका मानना है कि संघर्ष विराम का मतलब यह नहीं कि कानूनी प्रक्रिया रुक जाए।

कैलिफोर्निया के सीनेटर Adam Schiff ने भी कहा कि अगर सेना अब भी सक्रिय है और सैन्य संसाधनों का इस्तेमाल हो रहा है, तो यह मानना गलत है कि युद्ध खत्म हो गया।

प्रतिनिधि सभा की सशस्त्र सेवा समिति के वरिष्ठ सदस्य Adam Smith ने तो यहां तक कह दिया कि उन्हें प्रशासन से कानून का पालन करने की उम्मीद ही नहीं है।

US-Iran War: राजनीतिक दबाव और जनता की प्रतिक्रिया

यह पूरा मामला ऐसे समय पर सामने आया है जब अमेरिका में इस युद्ध को लेकर जनता में नाराजगी बढ़ रही है। खासकर तेल की कीमतों पर पड़े असर के कारण आम लोगों की चिंता बढ़ी है।

रिपब्लिकन पार्टी के लिए भी यह एक मुश्किल दौर है। एक तरफ उन्हें अपने राष्ट्रपति का समर्थन करना है, दूसरी तरफ जनता के दबाव और चुनावी असर का भी ध्यान रखना है।

US-Iran War: आगे क्या हो सकता है

फिलहाल स्थिति अनिश्चित बनी हुई है। एक ओर ट्रंप प्रशासन यह कहकर कानूनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहा है कि युद्ध खत्म हो चुका है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हालात और विपक्ष के सवाल इस दावे को चुनौती दे रहे हैं।

आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या कांग्रेस इस मुद्दे पर अपनी ताकत दिखाती है या फिर राष्ट्रपति को खुली छूट मिलती रहती है। अगर टकराव बढ़ता है, तो यह मामला अदालत तक भी पहुंच सकता है।

First Published : May 2, 2026 | 12:31 PM IST