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ईरान युद्ध के बीच बड़ा फैसला? अमेरिका भेज सकता है हजारों सैनिक

ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका नए सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा, जमीन पर सेना भेजने का भी प्लान

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एजेंसियां   
Last Updated- March 19, 2026 | 8:54 AM IST

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की सरकार पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य कार्रवाई को और मजबूत करने के लिए हजारों अतिरिक्त सैनिक भेजने पर विचार कर रही है। यह कदम ऐसे समय में सोचा जा रहा है जब ईरान के साथ युद्ध तीसरे हफ्ते में पहुंच चुका है और आगे की रणनीति तैयार की जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, इन सैनिकों की तैनाती से ट्रंप को कई नए विकल्प मिल सकते हैं। इनमें सबसे बड़ा काम होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले तेल जहाजों की सुरक्षा करना है। यह दुनिया के लिए बहुत अहम रास्ता है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल सप्लाई होती है। इसके लिए अमेरिका हवाई और नौसेना ताकत का इस्तेमाल करेगा, लेकिन जरूरत पड़ने पर जमीन पर सैनिक भी भेजे जा सकते हैं।

खार्ग द्वीप पर नजर

अमेरिका ईरान के खार्ग द्वीप पर भी सैनिक भेजने के विकल्प पर विचार कर रहा है। यह द्वीप ईरान के लगभग 90 प्रतिशत तेल निर्यात का मुख्य केंद्र है। हालांकि, यह मिशन काफी जोखिम भरा माना जा रहा है, क्योंकि ईरान इस इलाके को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बना सकता है।

ट्रंप प्रशासन ईरान के समृद्ध यूरेनियम के भंडार को सुरक्षित करने के विकल्प पर भी चर्चा कर रहा है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह काम बहुत मुश्किल और खतरनाक होगा, क्योंकि ये ठिकाने काफी सुरक्षित और जमीन के नीचे बने हैं।

अब तक नहीं हुआ अंतिम फैसला

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि अभी जमीन पर सैनिक भेजने का कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन सभी विकल्प खुले रखे गए हैं। ट्रंप का लक्ष्य ईरान की मिसाइल ताकत को खत्म करना, उसकी नौसेना को कमजोर करना और यह सुनिश्चित करना है कि ईरान परमाणु हथियार न बना सके।

अमेरिका 28 फरवरी से अब तक ईरान पर 7800 से ज्यादा हमले कर चुका है। इन हमलों में ईरान के 120 से ज्यादा जहाजों को नुकसान पहुंचा या नष्ट किया गया है। फिलहाल पश्चिम एशिया में करीब 50,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं।

अमेरिकी सैनिकों को भी नुकसान

इस युद्ध में अब तक 13 अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं और करीब 200 घायल हुए हैं। हालांकि ज्यादातर चोटें मामूली बताई गई हैं। अगर अमेरिका जमीन पर सैनिक भेजता है, तो इससे ट्रंप के लिए राजनीतिक जोखिम बढ़ सकता है। अमेरिका में इस युद्ध के लिए समर्थन ज्यादा नहीं है और ट्रंप पहले नए युद्धों से दूर रहने का वादा कर चुके हैं। (रॉयटर्स के इनपुट के साथ)

First Published : March 19, 2026 | 8:54 AM IST