इजरायल के ऊपर आसमान में एक इजरायली एयर डिफेंस मिसाइल उड़ती हुई दिखाई दे रही है | फोटो: रॉयटर्स
भारत ने सोमवार को पश्चिम एशिया में हुए नए हमलों पर गहरा खेद व्यक्त करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में चल रहा संघर्ष सौ दिन से अधिक समय से जारी है, जिससे भारी जन पीड़ा हुई है और वैश्विक अर्थव्यवस्था एवं ऊर्जा आपूर्ति पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ा है। भारत ने अपने देश के नागरिकों से ईरान और इजरायल की यात्रा नहीं करने का आग्रह किया और ईरान में रह रहे भारतीयों को वहां से चले जाने की सलाह दी।
पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय सहित अधिकारियों ने नई दिल्ली में मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि सोमवार दोपहर को ओमान के तट पर 24 भारतीय नाविकों को ले जा रहे एक तेल टैंकर में आग लगने की सूचना मिली। इसी दौरान इजरायल और ईरान ने युद्धविराम के बाद पहली बार एक-दूसरे पर नए हमले किए। भारत के पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के निदेशक ओपेश कुमार शर्मा ने बताया कि मेडागास्कर के ध्वज वाले जहाज एमटी मारिवेक्स में दोपहर करीब 1:30 बजे आग लग गई, लेकिन उन्होंने आग लगने के कारण पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
शर्मा ने बताया कि टैंकर खाली था और होर्मुज स्ट्रेट से काफी दूर था और सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। जहाज ट्रैकिंग डेटा से पता चला कि पोत मस्कट के दक्षिण में लंगर डाले खड़ा था।
प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, ओमान के दुक्म बंदरगाह की ओर जाते समय कथित तौर पर हमले का शिकार होने के बाद टैंकर ने संकटकालीन कॉल की। यह घटना ऐसे समय घटी जब इजरायल और ईरान के बीच शत्रुता फिर से शुरू हो गई। सोमवार को इजरायल ने दक्षिण-पश्चिमी ईरान में एक पेट्रोकेमिकल संयंत्र पर हमला किया और अन्य सैन्य ठिकानों पर भी हमले किए, जबकि ऐसी खबरें थीं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से आगे कोई सैन्य कार्रवाई नहीं करने का आग्रह किया था।
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने अमेरिका पर युद्धविराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया और कहा कि उसने इजरायली शहर हाइफा में इसी तरह के एक संयंत्र पर मिसाइलें दागकर जवाबी कार्रवाई की है।
विदेश मंत्रालय ने एक बयान में पश्चिम एशिया में हुए नए हमलों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए अत्यंत चिंता का विषय बताया। मंत्रालय ने कहा कि संघर्ष सौ दिन से अधिक समय से जारी है और इससे भारी जन पीड़ा हुई है। मंत्रालय ने कहा, ‘इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर भी गंभीर प्रभाव पड़ा है।’ मंत्रालय ने सभी पक्षों से आग्रह किया कि वे तनाव को तुरंत कम करें, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और राजनयिक समाधान के लिए चल रही बातचीत को पूरा करें ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल हो सके।
तेल अवीव और तेहरान स्थित भारतीय दूतावासों ने भारतीय नागरिकों के लिए सलाह जारी की है। उन्होंने दोनों देशों के बीच हुई हालिया झड़प के मद्देनजर सभी भारतीय नागरिकों से इजरायल और ईरान की अनावश्यक यात्रा से बचने का आग्रह किया है। ईरान स्थित भारतीय दूतावास ने एक पोस्ट में कहा, ‘क्षेत्र में हुए नवीनतम घटनाक्रमों को देखते हुए, दूतावास सभी भारतीय नागरिकों को ईरान की यात्रा से बचने की अपनी पूर्व सलाह को दोहराता है।’
दूतावास ने ईरान में मौजूद भारतीयों को उपलब्ध परिवहन साधनों से देश छोड़ने की भी सलाह दी है। तेल अवीव में भारतीय दूतावास ने भारतीयों को इजरायली अधिकारियों और गृह मोर्चा कमान द्वारा जारी सुरक्षा दिशा-निर्देशों और निर्देशों का सख्ती से पालन करने की सलाह दी है।
इजरायल में रहने वाले भारतीय नागरिकों को ‘निर्दिष्ट आश्रय स्थलों के पास रहने’ और ‘अपने निवास या कार्यस्थल के आस-पास के सुरक्षित स्थानों से परिचित होने’ की भी सलाह दी गई है।
दूतावास ने कहा, ‘भारतीय नागरिकों को अगली सूचना तक इजरायल के भीतर सभी गैर-जरूरी और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है। नागरिकों को स्थानीय समाचारों, आधिकारिक घोषणाओं और आपातकालीन चेतावनियों पर नियमित रूप से नजर रखने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।’
इस समय इजरायल में 40,000 से अधिक भारतीय रहते हैं, जो पूरे देश में फैले हुए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 28 फरवरी को जब संघर्ष शुरू हुआ, तब छात्रों सहित लगभग 9,000 भारतीय ईरान में थे। अब तक 1,800 से अधिक भारतीय स्वदेश लौट चुके हैं।
ईरानी सेना की संयुक्त कमान ने सोमवार को कहा कि वह अपने आक्रामक अभियानों को रोक रही है। ईरान की ओर से यह घोषणा दो महीने पहले अमेरिका द्वारा तेहरान के साथ युद्धविराम समझौता किए जाने के बाद से पहली बार इजराइल के साथ हुए संघर्ष के बाद की गई। इजराइल-ईरान के बीच ताजा संघर्ष से पश्चिम एशिया में एक बार फिर पूर्ण युद्ध शुरू होने का खतरा पैदा हो गया था।
संयुक्त कमान ने कहा कि यदि इजराइल या उसके समर्थक दक्षिणी लेबनान सहित किसी भी तरह की आक्रामक और शत्रुतापूर्ण कार्रवाई करते हैं, तो ‘पहले की तुलना में कहीं अधिक कठोर और दमनकारी उपाय किए जाएंगे।’
(साथ में एजेंसियां)