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होर्मुज में बारूदी सुरंगों का जाल: समंदर की सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर यह क्यों है एक गंभीर खतरा?

होर्मुज में ईरानी बारूदी सुरंगों को हटाने के लिए अमेरिका ने ऑपरेशन शुरू करने का दावा किया है, लेकिन डिफेंस एक्सपर्ट का मानना है कि इसमें छह महीने तक का समय लग सकता है

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ऋषभ राज   
Last Updated- April 25, 2026 | 8:37 PM IST

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अब दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक पट्टी ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) जंग के नए मैदान में तब्दील हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि अमेरिकी नौसेना इस इलाके से ईरानी समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाने का काम युद्धस्तर पर कर रही है। हालांकि, एक्सपर्ट्स और सैन्य अधिकारियों का मानना है कि समंदर के नीचे बिछे इस मौत के जाल को साफ करना इतना आसान नहीं है और इसमें महीनों का वक्त लग सकता है।

गौरतलब है कि दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है, ऐसे में यहां पैदा हुआ गतिरोध पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है।

सुरंगें साफ करने की चुनौती और छह महीने का वक्त

पेंटागन के अधिकारियों ने अमेरिकी सांसदों को एक गोपनीय ब्रीफिंग में बताया है कि ईरान द्वारा बिछाई गई इन बारूदी सुरंगों को पूरी तरह साफ करने में कम से कम छह महीने का समय लग सकता है। हालांकि, अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने सार्वजनिक रूप से किसी निश्चित समयसीमा के बारे में नहीं बताया है, लेकिन उन्होंने इस संभावना से इनकार भी नहीं किया।

हेगसेथ का कहना है कि अमेरिकी सेना अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखती है और वह सही समय के भीतर इन खतरों को खत्म कर देगी। फिलहाल राष्ट्रपति ट्रंप ने नौसेना को निर्देश दिए हैं कि वे माइन्स हटाने के काम को तीन गुना रफ्तार से बढ़ाएं और यदि कोई ईरानी नाव बारूदी सुरंग बिछाते हुए पकड़ी जाए, तो उस पर तुरंत हमला किया जाए।

मनोवैज्ञानिक युद्ध: ‘खतरा न होकर भी डर का साया’

इस पूरे विवाद में सबसे पेचीदा पहलू मनोवैज्ञानिक दबाव है। फॉरेन पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट की विद्वान एम्मा सालिसबरी का कहना है कि ईरान को असल में माइन्स बिछाने की जरूरत भी नहीं है; उसे सिर्फ दुनिया को यह यकीन दिलाना है कि वहां माइन्स मौजूद हैं। समुद्र में सुरक्षा का भरोसा बहाल करना सबसे मुश्किल काम है।

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अगर अमेरिका यह दावा भी कर दे कि रास्ता साफ है, तब भी ईरान सिर्फ एक बयान जारी कर यह कह सकता है कि ‘अभी सारी सुरंगें नहीं मिली हैं’। यह अनिश्चितता कमर्शियल जहाजों और उनकी बीमा कंपनियों को डराने के लिए काफी है। जब तक जहाजों के मालिकों को पूरी तरह सुरक्षा का एहसास नहीं होगा, वे इस रास्ते से गुजरने का जोखिम नहीं उठाएंगे।

माइन्स बिछाना आसान, लेकिन ढूंढना टेढ़ी खीर

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, समंदर में बारूदी सुरंगें बिछाना बेहद आसान काम है। इसे एक तेज रफ्तार नाव के जरिए भी अंजाम दिया जा सकता है। ईरान के पास ऐसी छोटी पनडुब्बियां भी हैं जिन्हें पकड़ पाना मुश्किल है और वे चुपचाप माइन्स बिछा सकती हैं। ये माइन्स वैसी नहीं होतीं जैसी फिल्मों में दिखाई जाती हैं (कांटों वाली तैरती हुई गेंदें), बल्कि ये अक्सर समुद्र की तलहटी में बैठी होती हैं या किसी केबल के जरिए सतह के नीचे छिपी रहती हैं।

ये जहाज के इंजन की आवाज या पानी के दबाव में आने वाले बदलाव से सक्रिय हो जाती हैं। अमेरिका ने अभी इस इलाके में दो ‘लिटोरल कॉम्बैट शिप’ तैनात किए हैं और दो अन्य माइन्सस्वीपर जहाज जापान से रवाना किए गए हैं, लेकिन इनका काम घास काटने जैसा धीमा और थका देने वाला होता है।

वैश्विक शिपिंग और बीमा कंपनियों की चिंता

मौजूदा हालात ने समुद्री माल ढुलाई करने वाली कंपनियों की मुसीबत बढ़ा दी है। अब बीमा कंपनियां अपनी पॉलिसी में नई शर्तें जोड़ रही हैं। शिपिंग कंपनियों को अब ईरान के तट के पास से गुजरने वाले नए रास्तों का इस्तेमाल करने के लिए ईरानी अधिकारियों से संपर्क करना पड़ रहा है। हालांकि, कंपनियां इस रास्ते से व्यापार करने के लिए उत्सुक हैं क्योंकि यह बेहद मुनाफे वाला रूट है, लेकिन ‘अदृश्य खतरे’ के साये ने उनकी रफ्तार रोक दी है।

अमेरिका की रणनीति अब यह है कि वह पूरे स्ट्रेट को साफ करने के बजाय एक ‘सुरक्षित चैनल’ तैयार करे, ताकि जरूरी यातायात को बहाल किया जा सके। लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक युद्ध का तनाव पूरी तरह खत्म नहीं होता, होर्मुज की लहरों में छिपा बारूद वैश्विक अर्थव्यवस्था को डराता रहेगा।

(एजेंसी के इनपुट के साथ)

First Published : April 25, 2026 | 8:33 PM IST