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मध्यस्थता समझौते से जुड़ा विवाद मध्यस्थता से ही निबटे

Last Updated- December 10, 2022 | 1:06 AM IST

सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले सप्ताह नंदन बायोमैट्रिक्स लिमिटेड और डी 1 ऑयल्स लिमिटेड के बीच विवादास्पद मामले को मध्यस्थता के लिए सिंगापुर इंटरनैशनल आर्बिट्रेशन सेंटर भेज दिया।
नंदन बायोमैट्रिक्स बीज के क्लोनिंग और उत्पादन, नर्सरी विकास और वृक्षारोपण प्रबंधन से जुड़ी हुई है। इस कंपनी ने डी 1 ऑयल्स के साथ तीन समझौते किए और एक साझा उपक्रम तैयार किया। उस दौरान एक टर्मिनेशन ऐग्रीमेंट यानी समापन समझौता भी किया गया था, जो उस वक्त झगड़े का कारण बन गया जब नंदन ने आपूर्ति समझौते के तहत शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप लगा दिया।
जहां नंदन इस मामले की मध्यस्थता चाहती थी, वहीं दूसरी कंपनी ने किसी तरह की अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता खंड से इनकार कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि वास्तव में इस मामले में एक मध्यस्थता समझौता था और इसलिए मुआवजे के लिए दावा किया गया था। इस मामले को मध्यस्थता से ही निपटाया जाना चाहिए।
दिल्ली उच्च न्यायालय के खिलाफ अपील खारिज

सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय के एक फैसले के खिलाफ इलेक्ट्रिकल मैन्युफैक्चरिंग कंपनी लिमिटेड की अपील खारिज कर दी है। इस मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया था कि एक बिजली परियोजना के लिए कंपनी की बोली को पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड द्वारा ठुकराया जाना गलत नहीं है।
विद्युत मंत्रालय के अधीन काम करने वाले कॉरपोरेशन ने इलेक्ट्रिकल ट्रांसमिशन लाइन बिछाए जाने के लिए निविदाएं आमंत्रित की थीं। इलेक्ट्रिकल मैन्युफैक्चरिंग कंपनी लिमिटेड ने सबसे कम बोली लगाई। हालांकि इस कंपनी की बोली को इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि वह अनुबंध में निर्दिष्ट अपेक्षित तकनीकी अनुभव से लैस नहीं है।
कंपनी ने इसे एकपक्षीय फैसला बताते हुए इसके खिलाफ चुनौती दी। हालांकि कंपनी की बोली सबसे कम थी और यह 1951 से इलेक्ट्रिक ट्रांसमिशन कारोबार में सक्रिय है। उच्च न्यायालय ने पाया कि कंपनी ने ‘100 किलोमीटर लंबी लाइन बिछाने के कार्य’ को संतोषजनक पूरा नहीं किया है।
हालांकि इसने कई परियोजनाएं पूरी की हैं, लेकिन वे या तो 100 किलोमीटर से कम की हैं या उन्हें संतोषजनक रूप से पूरा नहीं किया गया है। इसलिए उच्च न्यायालय ने कंपनी के खिलाफ फैसला दिया। कंपनी की अपील को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा भी खारिज कर दिया गया है।
गुजरात न्यायालय करे ईंधन मामले की जांच

सर्वोच्च न्यायालय ने गुजरात उच्च न्यायालय से कहा है कि वह यह निर्धारित करे कि प्राकृतिक गैस, फर्नेस ऑयल, लाइट डीजल ऑयल, नेफ्था जैसे ईंधनों का इस्तेमाल औद्योगिक इकाइयों द्वारा बिजली पैदा करने के लिए किया गया था, जिसका इस्तेमाल कास्टिक सोडा, औद्योगिक रसायनों आदि के निर्माण में किया जाता था।
गुजरात सेल्स टैक्स एक्ट के तहत क्या इसे ‘कच्चा माल’ या ‘प्रसंस्करण सामग्री’ या ‘उपभोग करने लायक स्रोत’ समझा जाए? यह निर्देश गुजरात उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार की अपील पर दिया गया है।
उच्च न्यायालय ने एएमआई पिगमेंट्स (प्राइवेट) लिमिटेड जैसे सैकड़ों उद्योगों को बिक्री कर लाभ पहुंचाया था। उधर आंध्र प्रदेश बिक्री कर कानून के मामले में सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले की प्रासंगिकता को लेकर संदेह बना हुआ है। सर्वोच्च न्यायालय ने गुजरात उच्च न्यायालय से कहा है कि वह संदेह को स्पष्ट करते हुए इस प्रमुख मुद्दे को सुलझाए।

First Published - February 15, 2009 | 9:54 PM IST

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