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आग लगने की घटनाओं पर सख्त हुई महाराष्ट्र सरकार, Malls का फायर ऑडिट 90 दिनों में

29 अप्रैल 2025 को मुंबई के लिंक स्क्वायर मॉल और ड्रीम मॉल में बार-बार आग लगने की घटनाओं के मद्देनजर राज्य सरकार ने फायर ऑडिट को लेकर सख्त कदम उठाने का फैसला किया है।

Last Updated- July 03, 2025 | 6:56 PM IST
प्रतीकात्मक तस्वीर

मुंबई की शॉपिंग माल और दूसरे कारोबारी ठीकानों में आग लगने की घटनाएं प्रशासन के लिए चुनौती बन चुकी है। सरकार आग की बढ़ती घटनाओं की मुख्य वजह नियमों की अनदेखी को मान रही है। दुर्घटनाओं से निपटने के लिए राज्य सरकार ने सख्त रुख अख्तियार किया है। सरकार ने सभी महानगर पालिकाओं को निर्देश दिया है कि राज्य के सभी मॉल का फायर ऑडिट 90 दिनों के भीतर किया जाएं। अग्नि सुरक्षा मानकों को पूरा न करने वाले मॉल के बिजली और पानी के कनेक्शन कट कर दिये जाए।

शॉपिंग मॉल , होटल, पब और औद्योगिक ठीकानों में लगने वाली आग और निपटने की तैयारी पर उद्योग मंत्री उदय सामंत ने विधान परिषद में जानकारी देते हुए कहा कि 29 अप्रैल 2025 को मुंबई के लिंक स्क्वायर मॉल और ड्रीम मॉल में बार-बार आग लगने की घटनाओं के मद्देनजर राज्य सरकार ने फायर ऑडिट को लेकर सख्त कदम उठाने का फैसला किया है। राज्य के सभी मॉल का फायर ऑडिट 90 दिनों के भीतर पूरा करने के निर्देश संबंधित नगर पालिकाओं को दिए जाएंगे। साथ ही, अग्नि सुरक्षा मानकों को पूरा न करने वाले मॉल के बिजली और पानी के कनेक्शन काटने की कार्रवाई भी की जाएगी ।

सामंत ने कहा कि मुंबई महानगरपालिका ने इस संबंध में कार्रवाई शुरू कर दी है और ड्रीम मॉल फिलहाल बंद है। अग्नि सुरक्षा को लेकर अब किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और राज्य के सभी वर्ग बी, सी, डी महानगरपालिकाओं को मॉल में अग्नि सुरक्षा अनुपालन की जांच करनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर महाराष्ट्र अग्नि निवारण और जीवन सुरक्षा अधिनियम 2006 के प्रावधानों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। मुंबई फायर ब्रिगेड (एमएफबी) ने पिछले कुछ महीनों से शहर के मॉल, होटल और पंबों की जांच तेज कर दी है। जिनमें कई खामियां पाई गई है। जिन मॉलों में अग्निशमन प्रणालियां खराब पाई गईं या जिनकी मरम्मत चल रही थी, उन्हें तत्काल सुधार के लिए नोटिस जारी कर दिया गया है, तथा निरीक्षण के बाद शेष गैर-अनुपालन वाले मॉलों को भी नगर निकाय नोटिस जारी करेगा।

आग लगने की बढ़ती घटनाओं पर कारोबारियों का कहना है कि कड़े नियम पहले से बने हुए हैं। कोई भी इकाई शुरू करने के लिए अग्निशमन विभाग से एनओसी प्राप्त करना सबसे जरूरी प्रक्रिया में शामिल है। इसके लिए विभाग काफी जांच-पड़ताल करता है। कमला मिल्स घटना के बाद इकाइयों का नियमित तौर पर निरीक्षण किया जाता है। गौरतलब है कि दिसंबर 2017 में मुंबई के सबसे बड़े ऑफिस एवं रेस्टोरेंट कॉम्प्लेक्स कमला मिल्स के एक पब में आग लग गई थी। इसमें कई लोगों की जान चली गई थी। इस मामले की जांच अभी भी जारी है। कई लोगों का मानना है कि अग्नि सुरक्षा के इंतजाम करने पर अच्छा खासा खर्च आता है, जिससे लोग इन्हें नजरअंदाज कर जाते हैं।

होटल, पंब में आग लगने का बड़ा कारण यह है कि छोटी इकाइयों में आग से बचाव के नियमों का पालन नहीं किया जाता। इसमें बड़े निवेश की आवश्यकता होती है, जिससे इकाइयां कतराती हैं। जो इकाइयां अग्नि सुरक्षा के इंतजामों पर खर्च भी करती हैं, वे इन उपकरणों की नियमित तौर पर रखरखाव नहीं कर पातीं। इस मामले में जागरूकता की बहुत कमी है। सुरक्षा उपायों और सामग्री की छंटनी की व्यवस्था के लिए कंपनियों के पास कोई बजट नहीं होता। जबकि छोटी इकाई पर भी अग्नि सुरक्षा उपायों पर 25 लाख से 1 करोड़ रुपये खर्च आता है।

First Published - July 3, 2025 | 6:48 PM IST

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