शिक्षा

CBSE विवाद के बाद सरकार का बड़ा फैसला, अध्यक्ष राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता पद से हटाए गए

राहुल के स्थान पर 2001 बैच के आईएएस अधिकारी लोखंडे प्रशांत सीताराम को सीबीएसई का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है

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अहोना मुखर्जी   
Last Updated- June 02, 2026 | 10:38 PM IST

कक्षा 12 की उत्तर पु​स्तिकाओं के मूल्यांकन और पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया से संबंधित शिकायतों और ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली को लेकर बढ़ते विवाद के बीच सरकार ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के अध्यक्ष राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया है। 

राहुल के स्थान पर 2001 बैच के आईएएस अधिकारी लोखंडे प्रशांत सीताराम को सीबीएसई का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है और 2008 बैच के भारतीय सूचना सेवा अधिकारी वरुण भारद्वाज को हिमांशु गुप्ता के स्थान पर सचिव नामित किया गया है। भारद्वाज वर्तमान में शिक्षा मंत्रालय में निदेशक के रूप में कार्यरत हैं। अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश कैडर से आने वाले  सीताराम वर्तमान में गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के पद पर कार्यरत हैं।

छात्रों की शिकायतों और संसदीय समिति के इस मुद्दे पर विचार-विमर्श के बाद डिजिटल मूल्यांकन ढांचे की समीक्षा तेज होने के बीच यह कदम उठाया गया है। ओएसएम प्रक्रिया में तकनीकी गड़बड़ियों, जांची गईं उत्तर पुस्तिकाओं में अनेक विसंगतियों और रिजल्ट आने के बाद सत्यापन एवं पुनर्मूल्यांकन से जुड़ी समस्याओं को लेकर देश भर में छात्रों की ओर से बड़ी संख्या में शिकायतें मिल रही हैं।

शिक्षा पर संसदीय स्थायी समिति ने भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया और उसने ओएसएम प्रणाली लागू करने से पैदा हुई चिंताओं पर चर्चा करने के लिए शिक्षा मंत्रालय एवं सीबीएसई के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया। इसके अलाव कैबिनेट सचिवालय की ओर से 2 जून को जारी ज्ञापन के अनुसार, सीबीएसई ने ओएसएम सेवाओं की खरीद से संबंधित मामलों की जांच के लिए एक अलग से सदस्यीय समिति का गठन किया है।

समिति का नेतृत्व क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष एस. राधा चौहान करेंगी। जरूरत पड़ने पर यह समिति अन्य कार्यालयों के अधिकारियों की मदद भी ले सकती है। आदेश में कहा गया है कि समिति एक महीने के भीतर कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

समिति द्वारा की जाने वाली यह जांच विशेष रूप से ओएसएम प्रणाली के लिए सेवाओं की खरीद से संबंधित है, जिसे सीबीएसई ने इस वर्ष कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा की उत्तर लिपियों के मूल्यांकन के लिए पेश किया था। 

बोर्ड परीक्षा में पहली बार यह प्रणाली लागू की गई थी, लेकिन इस डिजिटल मार्किंग प्रणाली के कारण क​थित रूप से उत्तर पु​स्तिकाओं के मूल्यांकन में तमाम विसंगतियां सामने आई हैं। कहीं दूसरे छात्र की उत्तर पुस्तिका किसी ओर के रोल नंबर के साथ ​जोड़ दी गई तो कहीं-कहीं उत्तर पु​स्तिकाओं से पन्ने ही गुम हो गए। कई छात्र उनकी कॉपी धुंधली स्कैन होने की ​शिकायत कर रहे हैं, जिससे उन्हें सही तरीके से पढ़ा भी नहीं जा सकता। यही नहीं, परीक्षा परिणाम आने के बाद सीबीएसई के पोर्टलों पर तकनीकी समस्याएं आने की ​शिकायतें आ रही हैं। 

ओएसएम प्रणाली और इससे उत्पन्न गड़बडि़यों के कारण प्रभावित छात्रों की ​शिकायतों का निपटारा किस तरह होगा, इस पर संसदीय समिति, विपक्षी नेता और छात्र संगठन सीबीएसई तथा शिक्षा मंत्रालय से स्पष्टीकरण मांग रहे हैं।

झारखंड के छात्र ने खोली पोल

झारखंड के 17 वर्षीय छात्र सार्थक सिद्धांत ने मंगलवार को कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिकाओं की ऑनलाइन मार्किंग के लिए लाई गई ओएसएम प्रणाली के वेंडरों के चयन की निविदा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर संसदीय स्थायी समिति के समक्ष प्रस्तुति दी। यह छात्र भी सीबीएसई की ऑनलाइन मार्किंग प्रणाली से प्रभावित प्रभावित हुआ है।

सिद्धांत ने ओएसएम सेवाओं की खरीद प्रक्रिया में विसंगतियों का विवरण देने वाली 7 पृष्ठ की रिपोर्ट और ओएसएम प्रणाली के लिए वेंडरों के चयन के संबंध में बोर्ड से कई सवाल पूछे हैं। सार्थक ने निविदा प्रक्रिया में गड़बड़ी और घालमेल को उजागर करती अपनी रिपोर्ट की प्रस्तुति संसदीय समिति, सीबीएसई अध्यक्ष राहुल सिंह, स्कूली शिक्षा सचिव संजय कुमार और शिक्षा मंत्रालय तथा बोर्ड के अन्य अधिकारियों की उपस्थिति में दी।

सूत्रों ने बताया कि समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने छात्र की बात विस्तार से सुनी और रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दों पर सीबीएसई अधिकारियों से जवाब तलब किया।

First Published : June 2, 2026 | 10:38 PM IST