केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान मीडिया से बात करते हुए | फोटो: PTI
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा, राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) अगले साल से ऑनलाइन यानी कंप्यूटर-आधारित टेस्ट (सीबीटी) प्रारूप में आयोजित की जाएगी। परीक्षा प्रणाली में छात्रों का भरोसा जगाने के प्रयास के तहत शुक्रवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने यह ऐलान किया। साथ ही उन्होंने यह भी जानकारी दी कि प्रश्नपत्र लीक होने की वजह से रद्द की गई नीट-यूजी 2026 की पुनः परीक्षा अब 21 जून को होगी। इसके लिए प्रवेश पत्र 14 जून तक जारी कर दिए जाएंगे। दोबारा परीक्षा में बैठने वाले छात्रों को 15 मिनट का अतिरिक्त समय भी दिया जाएगा।
नई दिल्ली में संवाददाताओं से बात करते हुए प्रधान ने कहा, ‘समस्या का मूल कारण ओएमआर (ऑप्टिकल मार्क रिकग्निशन) प्रणाली है, इसलिए अगले साल से परीक्षा कंप्यूटर-आधारित टेस्ट (सीबीटी) के माध्यम से होगी।’ उन्होंने कहा, ‘राधाकृष्णन समिति ने परीक्षा को सीबीटी मोड में स्थानांतरित करने की सिफारिश की थी। हम पहले इस सिफारिश को लागू नहीं कर पाए थे, लेकिन अगले साल से यह व्यवस्था शुरू होगी।’ सूत्रों के अनुसार, ये तमाम निर्णय गुरुवार रात शिक्षा मंत्री के आवास पर उच्च-स्तरीय बैठक के दौरान लिए गए।
बैठक में उच्च और स्कूली शिक्षा के सचिवों, राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) के महानिदेशक, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के अध्यक्ष और केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) तथा नवोदय विद्यालय समिति (एनवीएस) के आयुक्तों सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। प्रधान ने पिछले परीक्षा विवादों के बाद सुधारों को लागू करने के बावजूद हुई कमियों को स्वीकार किया।
उन्होंने कहा, ‘राधाकृष्णन समिति की सभी सिफारिशों को लागू करने के बावजूद परीक्षा प्रणाली में सेंध लगी है। हम इसे स्वीकार करते हैं। सीबीआई इसकी जांच कर रही है, ताकि जिम्मेदार लोगों की पहचान की जा सके।’ उन्होंने सरकार की प्रतिक्रिया को शिक्षा माफिया के खिलाफ एक दीर्घकालिक लड़ाई बताया। प्रधान ने कहा, ‘परीक्षा के दौरान ओएमआर शीट पर शुरुआत और अंत में हस्ताक्षर जैसी औपचारिकता पूरी करने के कारण छात्रों का काफी समय चला जाता है। ऐसे में जो परीक्षा पहले दोपहर 2:00 से 5:00 बजे तक होती थी, वह दोपहर 2:00 से 5:15 बजे तक चलेगी। सभी छात्रों तक प्रवेश पत्र 14 जून तक पहुंच जाएंगे।’
वर्ष 2024 में नीट-यूजी और यूजीसी-नेट में अनियमितताओं के कारण हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठने के बाद इसरो के पूर्व प्रमुख के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में उच्च-स्तरीय समिति बनाई गई थी। परीक्षा प्रणाली को बेदाग बनाने के लिए इस समिति ने कई सिफारिशें की थीं, लेकिन उनमें से कई को लागू नहीं किया गया था। समिति की प्रमुख सिफारिशों में नीट जैसी बड़ी परीक्षाओं को कंप्यूटर-आधारित टेस्ट (सीबीटी) प्रारूप में स्थानांतरित करना, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और एआई-आधारित पहचान सत्यापन की शुरुआत करना, प्रश्न पत्र वितरण प्रणालियों को एन्क्रिप्ट करना, कई सत्रों में परीक्षा आयोजित करना शामिल था।
इसके अलावा एनटीए को अधिक स्वायत्त और जवाबदेह बनाने की बात भी इसमें कही गई थी। ऑनलाइन मोड पर सवाल उठाने वालों को जवाब देते हुए प्रधान ने कहा कि सीबीटी प्रारूप ओएमआर की तुलना में अधिक सुरक्षित है।
राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) से जुड़ी चिंताओं को दिसंबर 2025 में एक संसदीय स्थायी समिति ने भी उठाया था। समिति ने कहा था कि एजेंसी अपने कामकाज से भरोसा कायम नहीं कर पाई है। इसका उदाहरण देते हुए समिति ने कहा था कि एनटीए द्वारा 2024 में आयोजित 14 प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में से पांच में गंभीर गड़बडि़यां सामने आई थीं। इनमें नीट-यूजी में लीक के आरोप, यूजीसी-नेट और नीट-पीजी का स्थगन और सीयूईटी परिणामों में देरी जैसे मसले शामिल थे।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2017 में राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) के गठन को मंजूरी दी थी। इसने 2018 में शिक्षा मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय के रूप में काम करना शुरू किया और देश की प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं का संचालन करने की जिम्मेदारी इसे सौंपी गई।