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जनसांख्यिकी रिपोर्ट: अमीर देशों के बराबर पहुंची भारत की प्रजनन दर, तेजी से घट रही है आबादी की रफ्तार

ताजा आंकड़ों के मुताबिक भारत की कुल प्रजनन दर घटकर 1.9 रह गई है। दक्षिण और पश्चिम के कई राज्यों में यह आंकड़ा विकसित देशों से भी कम है

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शिखा चतुर्वेदी   
Last Updated- June 01, 2026 | 10:25 PM IST

प्रजनन दर बहुत तेजी से उत्तर और दक्षिण भारत के बीच जनसांख्यिकीय विभाजन पैदा कर रही है। एसआरएस 2025 के ताजा आंकड़ों के अनुसार देश की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) 1.9 है, जो 2024 में दर्ज की गई 2.1 के प्रतिस्थापन स्तर से नीचे है।

दक्षिणी और पश्चिमी राज्य इस मामले में आगे हैं। केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र आदि राज्य जापान, फिनलैंड और नॉर्वे जैसी विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में और कुछ मामलों में उनसे भी कम प्रजनन दर दर्ज कर रहे हैं। वहीं, बिहार और उत्तर प्रदेश प्रतिस्थापन स्तर से काफी ऊपर बने हुए हैं।

यह विभाजन अब परिसीमन, राजनीतिक प्रतिनिधित्व, नकद हस्तांतरण और भविष्य की श्रम आपूर्ति पर बहस का केंद्र बन गया है। जिन राज्यों में अब जनसंख्या स्थिर है, उन्हें राजनीतिक मोर्चे पर नुकसान होने का डर सता रहा है। यह बदलाव असामान्य रूप से निम्न आय स्तरों पर भी हो रहा है। कई राज्यों की ​स्थिति इस मामले में विकसित देशों के समान हो गई है।

देश के 14 प्रमुख राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अब राष्ट्रीय स्तर की 1.9 की टीएफआर से नीचे हैं और कई राज्य अब कम प्रजनन दर के मामले में विकसित देशों के बराबर पहुंच चुके हैं। यह  नहीं, राज्यों ने अमीर देशों की आय स्तर के एक अंश पर ही निम्न प्रजनन दर हासिल की है।

First Published : June 1, 2026 | 10:25 PM IST