facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

प्रस्तावित खाद्य लेबल प्रणाली में स्पष्ट संदेश का अभावः विशेषज्ञ

Advertisement
Last Updated- December 16, 2022 | 11:21 PM IST
food labeling system

भारत के खाद्य सुरक्षा नियामक के प्रस्तावित फ्रंट पैक न्यूट्रीशन लेबल (एफओपील) में उत्पादों के बारे में स्पष्ट और गैर भ्रामक संदेश नहीं दिया गया है। विशेषज्ञों और डॉक्टरों का कहना है कि इसकी रेटिंग आधारित व्यवस्था के कारण ऐसी स्थिति है। सितंबर में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने एफओपीएल के लिए मसौदा नियम जारी किए थे, जिसे इंडियन न्यूट्रीशन रेटिंग (आईएनआर) नाम भी दिया गया है।

मसौदा पर लोगों से 19 नवंबर तक प्रतिक्रिया मांगी गई थी और एफएसएसएआई ने एक बार फिर डॉक्टरों, सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों और उपभोक्ताओं के अधिकार से जुड़े संगठनों से नए सिरे से प्रतिक्रियाएं मांगी हैं। एफओपीएल का मसौदा नियम स्टार रेटिंग व्यवस्था पर आधारित है, लेकिन राष्ट्रीय महत्त्व के इन संस्थानों में काम कर रहे बाल रोग विशेषज्ञ, एंडोक्रिनोलॉजिस्ट्स और कॉर्डियोलॉजिस्ट का कहना है कि खाद्य एवं बेवरिज पैकेटों पर साफ-साफ शब्दों में चेतावनी लिखी होनी चाहिए।

यह भी पढ़े: आईस्टेम का उत्पाद नेत्र रोगियों के लिए बनेगा उम्मीद की किरण!

एपिडेमियोलॉजिकल फाउंडेशन आफ इंडिया के अध्यक्ष प्रोफेसर उमेश कपिल ने कहा कि हम खतरनाक पैकेज्ड फूड खा रहे हैं, जिनमें ज्यादा चीनी, सोडियम, संतृप्त वसा और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेड होते हैं और यह सीधे तौर पर मधुमेह, लीवर और किडनी, हृदय और कैंसर की बीमारी से जुड़े हैं।

Advertisement
First Published - December 16, 2022 | 11:06 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement