IPO Lock-in Expiry: आने वाले चार महीनों में शेयर बाजार में बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है। कई ऐसी कंपनियों के शेयरों का लॉक-इन पीरियड खत्म होने जा रहा है, जिनकी हाल के सालों में लिस्टिंग हुई है। लॉक-इन खत्म होने के बाद शुरुआती निवेशकों, प्राइवेट इक्विटी फंड्स और अन्य शेयरधारकों को अपने शेयर बेचने की अनुमति मिल जाती है। ऐसे में निवेशकों की नजर उन कंपनियों पर रहती है, जहां बड़ी मात्रा में शेयर अनलॉक होने वाले हों क्योंकि इससे शेयरों पर दबाव बढ़ सकता है।
नुवामा की रिपोर्ट के मुताबिक, 9 जून से 28 सितंबर 2026 के बीच 75 कंपनियों के प्री-आईपीओ निवेशकों और अन्य शेयरधारकों के लॉक-इन खत्म होंगे। इन शेयरों की कुल वैल्यू करीब 31 अरब डॉलर है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि इतने सारे शेयर बाजार में बिकने आ जाएंगे। इनमें से बड़ी हिस्सेदारी प्रमोटरों और उनके समूह के पास है, जो जरूरी नहीं कि अपने शेयर बेचें।
आने वाले महीनों में जिन कंपनियों पर सबसे ज्यादा नजर रहेगी, उनमें Meesho, ICICI Prudential AMC, Bharat Coking Coal, Shadowfax Technologies, Fractal Analytics, Amagi Media Labs और Wakefit जैसे नाम शामिल हैं।
इन कंपनियों में बड़ी मात्रा में शेयर लॉक-इन से बाहर होंगे। उदाहरण के लिए, Meesho के करीब 68 फीसदी शेयर 10 जून को अनलॉक होंगे। ICICI Prudential AMC के लगभग 70 फीसदी शेयर 19 जून को लॉक-इन से बाहर आएंगे। Wakefit के करीब 49 फीसदी और Amagi Media Labs के 56 फीसदी शेयर भी आने वाले महीनों में ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध हो जाएंगे।
इसी तरह Fractal Analytics के 51 फीसदी, Innovision के 54 फीसदी और Rajputana Stainless के 55 फीसदी शेयरों का लॉक-इन भी खत्म होगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, CORONA Remedies, Bharat Coking Coal और ICICI Prudential AMC जैसी कंपनियों में कुल बकाया शेयरों का करीब 70 फीसदी हिस्सा लॉक-इन से बाहर आएगा। इसके अलावा Shadowfax Technologies में 45 फीसदी, Aye Finance में 59 फीसदी और Nephrocare Health Services में 51 फीसदी शेयर अनलॉक होंगे।
इतनी बड़ी हिस्सेदारी के अनलॉक होने की वजह से इन शेयरों पर निवेशकों की खास नजर रहने वाली है।
तीन महीने वाले लॉक-इन में GSP Crop Science, Sai Parenteral, Om Power Transmission, Powerica और OnEMI Technology Solution जैसी कंपनियां शामिल हैं। इनमें कुल शेयरों का 1 फीसदी से 5 फीसदी हिस्सा ही अनलॉक होगा, इसलिए इनका असर अपेक्षाकृत कम रहने की संभावना है।
जब किसी कंपनी का लॉक-इन खत्म होता है तो शुरुआती निवेशकों को मुनाफावसूली का मौका मिलता है। अगर बड़ी संख्या में शेयर बाजार में बेचे जाते हैं तो शेयर की कीमत पर दबाव पड़ सकता है। हालांकि हर बार ऐसा हो, यह जरूरी नहीं है। कई बार प्रमोटर और बड़े निवेशक लंबे समय तक अपनी हिस्सेदारी बनाए रखते हैं।
यही वजह है कि निवेशक लॉक-इन खत्म होने की तारीखों पर करीब से नजर रखते हैं। आने वाले महीनों में 31 अरब डॉलर मूल्य के शेयरों का लॉक-इन खत्म होना भारतीय शेयर बाजार के लिए एक बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है और खासकर उन कंपनियों पर बाजार की नजर रहेगी, जहां बड़ी मात्रा में शेयर अनलॉक होने वाले हैं।
ब्रोकरेज हाउस नुवामा का कहना है कि लॉक-इन खुलने का मतलब सीधे तौर पर शेयरों की बिकवाली नहीं होता, क्योंकि बड़ी संख्या में शेयर प्रमोटर और समूह कंपनियों के पास होते हैं। फिर भी जहां बड़ी हिस्सेदारी अनलॉक हो रही है, वहां निवेशकों को शेयरधारकों की गतिविधियों पर नजर बनाए रखनी चाहिए।