पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के दौरान जहां निफ्टी ऑयल एंड गैस इंडेक्स करीब 9 प्रतिशत गिर गया, वहीं अदाणी टोटल गैस इस सेक्टर की सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली कंपनी बनकर उभरी है। इस दौरान कंपनी का शेयर लगभग 40 प्रतिशत चढ़ गया। एसीई इक्विटीज के आंकड़ों के मुताबिक, अदाणी टोटल गैस का शेयर 27 फरवरी 2026 को 512 रुपये पर था, जो 3 जून 2026 तक बढ़कर 717.60 रुपये पहुंच गया। इस तरह कंपनी ने निफ्टी ऑयल एंड गैस इंडेक्स में सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज की।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ी है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई और पूरे ऑयल एंड गैस सेक्टर पर दबाव बना।
बाजार विशेषज्ञ अविनाश गोरक्षकर के मुताबिक, अदाणी टोटल गैस के शेयर में तेजी आने की तीन बड़ी वजहें हैं। पहली, सरकार की कुछ नीतियों से कंपनी को फायदा मिला। दूसरी, कंपनी ने सीएनजी और औद्योगिक गैस के दाम बढ़ाए, जिससे उसकी कमाई बढ़ने की उम्मीद बनी। तीसरी, अदाणी समूह को लेकर निवेशकों का भरोसा पहले के मुकाबले मजबूत हुआ है।
गोरक्षकर का कहना है कि कंपनी ने गैस के दाम कई बार बढ़ाए, जिससे बढ़ती लागत का असर कम हुआ और निवेशकों को लगा कि कंपनी का मुनाफा बेहतर हो सकता है। उनका मानना है कि अगर कच्चे तेल के दाम ऊंचे बने रहते हैं, तो तेल और गैस निकालने वाली कंपनियों को सबसे ज्यादा फायदा होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्हें ऊंची कीमतों पर अपना उत्पाद बेचने का मौका मिलता है।
वहीं, तेल विपणन कंपनियों और रिफाइनरियों पर दबाव बना रह सकता है, क्योंकि बढ़ती लागत का असर उनके मुनाफे पर पड़ता है।
अदाणी टोटल गैस के अलावा इस दौरान चेन्नई पेट्रोलियम का शेयर करीब 24 फीसदी, एजिस लॉजिस्टिक्स का 10.5 फीसदी और ऑयल इंडिया का 1.5 फीसदी चढ़ा। वहीं कई बड़ी कंपनियों के शेयर दबाव में रहे। रिलायंस इंडस्ट्रीज में 6 फीसदी, ओएनजीसी में 4 फीसदी और गेल में 3 फीसदी की गिरावट आई। सबसे ज्यादा नुकसान सरकारी तेल कंपनियों को हुआ। इंडियन ऑयल का शेयर 23 फीसदी, बीपीसीएल का करीब 27 फीसदी और एचपीसीएल का 24 फीसदी टूट गया। इसके अलावा महानगर गैस, पेट्रोनेट एलएनजी, एजिस वोपाक टर्मिनल्स, इंद्रप्रस्थ गैस और कैस्ट्रॉल इंडिया के शेयरों में भी गिरावट रही। इनमें कुछ शेयर 16 फीसदी तक फिसल गए।
चॉइस इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के एनर्जी विश्लेषक धवल पोपत का कहना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव बना रहता है और कच्चे तेल के दाम ऊंचे रहते हैं, तो तेल निकालने वाली कंपनियों को इसका फायदा मिल सकता है। हालांकि, उनका मानना है कि कुछ रिफाइनरी कंपनियां भी अच्छा प्रदर्शन कर सकती हैं। खासकर वे कंपनियां जो विदेशों में ज्यादा तेल उत्पाद बेचती हैं और जिनका डीजल उत्पादन ज्यादा है।
पोपत के मुताबिक, रूस से यूरोप को डीजल की सप्लाई कम होने के बाद दुनिया भर में डीजल की मांग मजबूत बनी हुई है। ऐसे में आधुनिक और बेहतर तकनीक वाली रिफाइनरियां ज्यादा मुनाफा कमा सकती हैं। इसी वजह से चॉइस इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने मंगलूर रिफाइनरी एण्ड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (एमआरपीएल) और चेन्नई पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (सीपीसीएल) पर ‘खरीदारी’ की सलाह दी है। ब्रोकरेज ने एमआरपीएल के लिए 215 रुपये और सीपीसीएल के लिए 1,265 रुपये का टारगेट रखा है।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)