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ईरान युद्ध को लेकर वैश्विक चिंता कम होने के बाद अब निवेशकों की नजर शेयर बाजारों में अगले बड़े मौके पर टिक गई है। इस बीच एशियाई बाजार खासतौर पर दक्षिण कोरिया और ताइवान दुनिया भर के निवेशकों की पहली पसंद बनते दिख रहे हैं।
दक्षिण कोरिया और ताइवान के शेयर बाजारों में इस महीने सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली है। कोस्पी इंडेक्स में आई जोरदार बढ़त के बाद यह इस साल अब तक करीब 78 फीसदी चढ़ चुका है।
बाजार में यह तेजी मुख्य रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़ी कंपनियों के दम पर आई है। Samsung Electronics, SK Hynix और Taiwan Semiconductor Manufacturing Company (TSMC) जैसी दिग्गज कंपनियां AI चिप्स और सेमीकंडक्टर कारोबार में अपनी मजबूत पकड़ के चलते निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि AI टेक्नोलॉजी की बढ़ती मांग ने इन दोनों बाजारों को वैश्विक निवेश का बड़ा केंद्र बना दिया है।
इक्विटी डेरिवेटिव्स रणनीतिकार अब बाजार में आगे भी तेजी बने रहने की संभावना जता रहे हैं। कई निवेशक और ट्रेडर्स इस रैली में शामिल होने के लिए ऑप्शंस बाजार में बड़े दांव लगा रहे हैं, जिससे ऑप्शंस की लागत भी बढ़ गई है।
इसका असर यह हुआ है कि ताइवान और दक्षिण कोरिया के शेयर बाजारों में इम्प्लाइड वोलैटिलिटी लगातार बढ़ रही है। ताइएक्स और कोस्पी 200 इंडेक्स की वोलैटिलिटी अब अमेरिकी S&P 500 इंडेक्स के मुकाबले अपने ऊंचे स्तरों के करीब पहुंच गई है। वहीं अमेरिका का Cboe Volatility Index यानी VIX फिर से अपने एक साल के औसत से नीचे आ गया है।
Samsung Securities के डेरिवेटिव्स विश्लेषक जुन ग्युन ने कहा कि कोरियाई बाजार में मौजूदा तेजी ने पुराने ट्रेंड को पूरी तरह पलट दिया है।
उनके मुताबिक फिलहाल बाजार में ऐसा दौर चल रहा है जहां शेयर कीमतों के साथ-साथ वोलैटिलिटी भी बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति तब तक बनी रह सकती है जब तक बाजार में स्थिरता या कंसोलिडेशन का दौर शुरू नहीं हो जाता।
वैश्विक बाजारों में एक बार फिर टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़े शेयरों का दबदबा बढ़ता दिख रहा है। इसके चलते भारत जैसे बाजार पीछे छूटते नजर आ रहे हैं, जो कच्चे तेल पर काफी निर्भर हैं और जहां AI सेक्टर की हिस्सेदारी अभी सीमित मानी जाती है।
भारतीय शेयर बाजार का प्रमुख इंडेक्स S&P BSE Sensex इस साल अब तक करीब 9.3 फीसदी गिर चुका है। प्रदर्शन के लिहाज से यह दुनिया के सबसे कमजोर बाजारों में शामिल हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये की रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंचती कमजोरी और तेल कीमतों का दबाव भी भारतीय बाजार पर असर डाल रहा है।
दक्षिण कोरिया के शेयरों में तेजी इतनी मजबूत रही है कि Interactive Brokers Group ने अमेरिकी रिटेल निवेशकों को सीधे कोरियाई बाजार में निवेश की सुविधा देना शुरू कर दिया है।
इसके साथ ही लीवरेज्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स यानी ETF में निवेश भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। JPMorgan Chase की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण कोरिया में अब सिंगल स्टॉक आधारित लीवरेज्ड ETF की लोकल लिस्टिंग को भी मंजूरी मिल गई है। इससे आने वाले समय में इन उत्पादों में निवेश और बढ़ सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह के निवेश उत्पाद बाजार में तेज फंड फ्लो की वजह से कीमतों में जरूरत से ज्यादा उतार-चढ़ाव का जोखिम बनाए रख सकते हैं।
Samsung Securities के विश्लेषक जुन ग्युन का कहना है कि निकट अवधि में कोरियाई बाजार के लिए बढ़ती वोलैटिलिटी से जुड़ी लॉन्ग-गामा रणनीतियां फायदेमंद हो सकती हैं।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगले तीन महीने या उससे लंबे समय के नजरिए से ट्रेडर्स को शॉर्ट-गामा पोजिशन बनाने पर विचार करना चाहिए, क्योंकि वोलैटिलिटी अपने उच्च स्तर के करीब पहुंच सकती है।
Societe Generale के रणनीतिकारों के मुताबिक कोस्पी 200 और अमेरिकी S&P 500 इंडेक्स के बीच 12 महीने का वेरिएंस स्प्रेड अब बेहद ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है।
वैश्विक निवेश बैंक JPMorgan के रणनीतिकारों ने उभरते बाजारों में आगे भी तेजी बने रहने की संभावना जताई है। बैंक का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI थीम, बेहतर वैश्विक आर्थिक माहौल और मजबूत फंडामेंटल्स की वजह से उभरते बाजारों के शेयर बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
JPMorgan ने iShares MSCI Emerging Markets ETF में तेजी वाले निवेश ढांचे अपनाने की सलाह दी है। रणनीतिकारों के मुताबिक AI सेक्टर से जुड़ी कंपनियों में मजबूत ग्रोथ की उम्मीद निवेशकों का भरोसा बढ़ा रही है।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping के बीच होने वाली आगामी शिखर बैठक से पहले निवेशकों की नजर खासतौर पर AI नीतियों पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच टेक्नोलॉजी और AI सहयोग अहम मुद्दा रह सकता है।
इसी उम्मीद में अमेरिकी बाजार में सूचीबद्ध चीनी ETF में तेजी से खरीदारी देखने को मिली है। निवेशकों ने iShares China Large-Cap ETF में कॉल स्प्रेड और KraneShares CSI China Internet ETF में कॉल ऑप्शंस खरीदे हैं। इससे संकेत मिलता है कि बाजार चीन की टेक कंपनियों में आगे भी तेजी की उम्मीद कर रहा है।
JPMorgan के रणनीतिकार टोनी ली की अगुवाई वाली टीम ने AI हार्डवेयर सेक्टर में तेजी जारी रहने की संभावना जताई है। इसके लिए उन्होंने ताइवान के Taiex इंडेक्स, दक्षिण कोरिया के Kospi 200 और जापान के Nikkei 225 इंडेक्स पर तेजी वाले दांव लगाने की सलाह दी है।
रणनीतिकारों ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि अमेरिकी बड़ी टेक कंपनियों, दक्षिण कोरिया के मेमोरी और कंपोनेंट सप्लायर्स तथा ताइवान के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में एक समान ट्रेंड देखने को मिल रहा है। जिन कंपनियों का AI हार्डवेयर सप्लाई से ज्यादा जुड़ाव है, वहां कमाई का प्रदर्शन सबसे मजबूत बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि AI थीम की सबसे बड़ी ताकत अभी भी हार्डवेयर सेक्टर ही है और इस पूरे ट्रेंड को समझने के लिए ताइवान का बाजार सबसे प्रभावी संकेतक बनकर उभरा है।