आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की दौड़ तेज होती जा रही है और दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियां इस रेस में आगे निकलने के लिए अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं। Amazon, Microsoft, Google और Meta जैसी कंपनियां डेटा सेंटर, चिप्स और AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्ड निवेश कर रही हैं। इसका फायदा तो फिलहाल क्लाउड कारोबार को मिल रहा है, लेकिन दूसरी तरफ भारतीय IT कंपनियों के लिए नई चुनौती भी खड़ी हो रही है।
एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग की रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 की पहली तिमाही में दुनिया की बड़ी क्लाउड कंपनियों की ग्रोथ और तेज हुई है। पिछले तिमाही में जहां इन कंपनियों की आय 31 फीसदी बढ़ी थी, वहीं अब यह बढ़कर 37 फीसदी हो गई है। इसकी सबसे बड़ी वजह कंपनियों के बीच AI टूल्स को तेजी से अपनाना, क्लाउड पर शिफ्ट होना और ज्यादा डेटा प्रोसेसिंग की जरूरत है।
इस तिमाही में Google Cloud सबसे बड़ा स्टार बनकर उभरा। कंपनी की आय 63 फीसदी बढ़कर पहली बार 20 अरब डॉलर के पार पहुंच गई। वहीं Microsoft Azure का कारोबार 40 फीसदी बढ़ा, जबकि Amazon Web Services यानी AWS ने 28 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की, जो पिछले 15 तिमाहियों में उसकी सबसे तेज वृद्धि है। रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ी कंपनियां अब AI की सुविधाएं हासिल करने के लिए तेजी से क्लाउड पर शिफ्ट हो रही हैं। यही वजह है कि क्लाउड कंपनियों का कारोबार लगातार मजबूत बना हुआ है।
दिलचस्प बात यह है कि AI की मांग इतनी तेजी से बढ़ रही है कि बड़ी टेक कंपनियां भी ग्राहकों की पूरी जरूरत पूरी नहीं कर पा रही हैं। Microsoft का कहना है कि उसके पास जितनी क्षमता है, उससे ज्यादा मांग आ रही है और यह स्थिति कम से कम 2026 तक बनी रह सकती है। Google ने भी माना है कि अगर उसके पास ज्यादा इंफ्रास्ट्रक्चर होता तो उसकी क्लाउड ग्रोथ और ज्यादा हो सकती थी। Amazon ने भी बताया कि उसके पास 364 अरब डॉलर का ऑर्डर बैकलॉग है, जो आने वाले कई सालों की मजबूत मांग का संकेत देता है।
AI की रेस में बने रहने के लिए टेक कंपनियां भारी निवेश कर रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, Amazon, Microsoft, Google और Meta मिलकर 2026 में करीब 460 अरब डॉलर का पूंजीगत निवेश (CapEx) कर सकती हैं। यह 2025 के लगभग 290 अरब डॉलर के मुकाबले 60 फीसदी से ज्यादा ज्यादा है। यानी कंपनियों की कमाई तो बढ़ रही है, लेकिन AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च उससे भी तेज रफ्तार से बढ़ रहा है।
इतना बड़ा निवेश कंपनियों के फ्री कैश फ्लो (FCF) पर दबाव डाल रहा है। Microsoft और Google पहले ही बता चुकी हैं कि AI पर बढ़ते खर्च की वजह से उनका फ्री कैश फ्लो प्रभावित हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 तक यह दबाव और बढ़ सकता है। Amazon का फ्री कैश फ्लो कुछ समय के लिए नकारात्मक भी हो सकता है। हालांकि कंपनियों का मानना है कि इन निवेशों का फायदा अगले कुछ वर्षों में मिलना शुरू होगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता खर्च भारतीय IT कंपनियों के लिए निकट अवधि में चुनौती बन सकता है। इसकी वजह यह है कि बड़ी वैश्विक कंपनियां अब अपने बजट का बड़ा हिस्सा AI और डेटा सेंटर पर खर्च कर रही हैं। नतीजतन, पारंपरिक IT आउटसोर्सिंग और दूसरे डिस्क्रेशनरी प्रोजेक्ट्स पर खर्च कम हो रहा है। इससे भारतीय IT सर्विस कंपनियों की ग्रोथ पर दबाव पड़ सकता है।
हालांकि अच्छी बात यह है कि लंबी अवधि में तस्वीर अलग हो सकती है। जैसे-जैसे कंपनियां AI को बड़े पैमाने पर अपनाएंगी, वैसे-वैसे AI आधारित एप्लिकेशन, डेटा मॉडर्नाइजेशन और बड़े डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन प्रोजेक्ट्स की मांग बढ़ेगी। इससे IT कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग का कहना है कि फिलहाल बड़े IT शेयरों को लेकर उसका रुख सावधानी वाला है। ब्रोकरेज ने बड़ी IT कंपनियों पर ‘होल्ड’ रेटिंग बरकरार रखी है। वहीं मिडकैप IT कंपनियों में उसे Coforge और Mphasis ज्यादा पसंद हैं। ब्रोकरेज का मानना है कि AI और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन से जुड़ी मांग बढ़ने पर इन कंपनियों को बेहतर फायदा मिल सकता है।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)