Metal Stocks: पश्चिम एशिया में हालात अब पहले से काफी शांत हैं। कुछ हफ्ते पहले तक डर था कि अगर संघर्ष और बढ़ा तो दुनिया में एल्युमिनियम की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है। इसी वजह से एल्युमिनियम की कीमतें तेजी से भागी थीं और 4 साल के सबसे ऊंचे स्तर तक पहुंच गई थीं।
अब हालात सुधरने लगे हैं, इसलिए कीमतों में थोड़ा ठहराव आया है। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। बाजार के जानकारों का मानना है कि एल्युमिनियम की कीमतों को आगे भी मजबूत सहारा मिलता रह सकता है, क्योंकि सप्लाई को लेकर कुछ बड़े सवाल अभी भी बने हुए हैं।
जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा था, तब दुनिया के करीब 9 फीसदी एल्युमिनियम उत्पादन पर खतरा मंडरा रहा था। सबसे बड़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर थी। अगर यहां आवाजाही प्रभावित होती तो एल्युमिनियम समेत कई कमोडिटी की सप्लाई अटक सकती थी। यही वजह रही कि एल्युमिनियम की कीमतें बढ़कर 3,851 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गईं। हालांकि अब कीमतें कुछ नीचे आई हैं, लेकिन अभी भी मजबूत स्तर पर बनी हुई हैं।
बाजार की नजर अब दो देशों पर टिकी हुई है- चीन और गिनी। चीन दुनिया का सबसे बड़ा एल्युमिनियम उत्पादक है। वहां की फैक्ट्रियां पिछले कुछ समय से काफी ऊंची क्षमता पर काम कर रही हैं। लेकिन अब चीन में बिजली की खपत और प्रदूषण को लेकर सख्ती बढ़ सकती है।
अगर सरकार ने उत्पादन पर कोई रोक-टोक लगाई तो बाजार में सप्लाई कम हो सकती है। दूसरी तरफ गिनी है, जो बॉक्साइट का बड़ा उत्पादक देश है। बॉक्साइट वही कच्चा माल है जिससे एल्युमिनियम बनता है। चीन अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा गिनी से मंगाता है।
अब खबर है कि गिनी सरकार बॉक्साइट के निर्यात पर कुछ नियंत्रण लगाने पर विचार कर रही है। अगर ऐसा होता है तो चीन को कच्चा माल महंगा पड़ सकता है। लागत बढ़ेगी तो एल्युमिनियम भी महंगा हो सकता है।
Emkay ब्रोकरेज का अनुमान है कि एल्युमिनियम की कीमतें अगले कुछ समय तक 3,200 से 3,300 डॉलर प्रति टन के आसपास बनी रह सकती हैं। मतलब यह कि जो लोग यह सोच रहे हैं कि पश्चिम एशिया का तनाव खत्म होते ही एल्युमिनियम सस्ता हो जाएगा, उन्हें शायद थोड़ा इंतजार करना पड़े। क्योंकि सप्लाई से जुड़े जोखिम अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं।
एल्युमिनियम की कीमतें अगर मजबूत रहती हैं तो इसका सीधा फायदा इस धातु को बनाने वाली कंपनियों को मिलेगा। हाल के दिनों में इन कंपनियों के शेयरों में कुछ कमजोरी जरूर दिखी है, लेकिन कमाई के मोर्चे पर तस्वीर अभी भी ठीक नजर आ रही है।
सेक्टर में सबसे ज्यादा भरोसा हिंडाल्को पर जताया गया है। इसकी वजह सिर्फ एल्युमिनियम की कीमतें नहीं हैं। कंपनी की विदेशी इकाई नोवेलिस का कारोबार भी सुधरता दिख रहा है। स्क्रैप से जुड़े मार्जिन बेहतर हो रहे हैं और कुछ बंद सुविधाएं दोबारा शुरू होने से भी फायदा मिलने की उम्मीद है। इसी वजह से माना जा रहा है कि आने वाले समय में हिंडाल्को का प्रदर्शन बाकी कंपनियों के मुकाबले बेहतर रह सकता है।
वहीं नालको के शेयर हाल के दिनों में तेजी से चढ़े हैं। करीब दो हफ्तों में शेयर में 16 फीसदी तक उछाल आ चुका है। ऐसे में माना जा रहा है कि फिलहाल इसमें ज्यादा तेजी की गुंजाइश सीमित हो सकती है।
Emkay की रिपोर्ट में हिंडाल्को के लिए 1,200 रुपये का टारगेट प्राइस रखा गया है। वहीं नालको में हाल की तेजी के बाद सतर्क रहने की सलाह दी गई है और इसका टारगेट प्राइस 370 रुपये दिया गया है। दूसरी ओर स्टील सेक्टर में टाटा स्टील पर ‘खरीदें’ की राय बरकरार है, जबकि जेएसडब्ल्यू स्टील और जिंदल स्टील एंड पावर में भी अच्छी बढ़त की संभावना जताई गई है।
सेल पर भी सकारात्मक नजरिया रखा गया है। माइनिंग स्पेस में कोल इंडिया को जोड़ने की सलाह दी गई है। वहीं रीसाइक्लिंग सेक्टर की ग्रेविटा और ग्रेफाइट इलेक्ट्रोड कंपनियों ग्रेफाइट इंडिया व एचईजी पर भी भरोसा जताया गया है। कुल मिलाकर रिपोर्ट में धातु और खनन क्षेत्र के कई शेयरों में आगे भी अच्छी कमाई और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद दिखाई गई है।
| सेक्टर | कंपनी | रेटिंग | मौजूदा भाव (रुपये) | टारगेट प्राइस (रुपये) |
|---|---|---|---|---|
| स्टील | टाटा स्टील | खरीदें | 196.0 | 230.0 |
| स्टील | जेएसडब्ल्यू स्टील | जोड़ें | 1,274.3 | 1,400.0 |
| स्टील | जिंदल स्टील एंड पावर | खरीदें | 1,139.8 | 1,400.0 |
| स्टील | सेल | खरीदें | 181.0 | 200.0 |
| एल्युमिनियम | हिंडाल्को | जोड़ें | 982.4 | 1,200.0 |
| एल्युमिनियम | नालको | घटाएं | 366.6 | 370.0 |
| खनन | कोल इंडिया | जोड़ें | 451.0 | 475.0 |
| रीसाइक्लिंग | ग्रेविटा | खरीदें | 1,663.9 | 2,400.0 |
| ग्रेफाइट इलेक्ट्रोड | ग्रेफाइट इंडिया | खरीदें | 654.5 | 850.0 |
| ग्रेफाइट इलेक्ट्रोड | एचईजी | खरीदें | 541.3 | 750.0 |
सोर्स: Emkay की रिपोर्ट
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)